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- स्मार्ट सिटी के स्पोटर्स स्टेडियम का टॉयलेट बदहाल

- लंबे समय से नहीं हुई टॉयलेट की सफाई, महिलाओं के लिए नहीं है अलग टॉयलेट

- महिला खिलाड़ी नांक बंद कर करती है ड्रेस चेंज

हम बात कर रहे है डॉ. संपूर्णानंद स्पोटर्स स्टेडियम की. स्मार्ट सिटी के इस स्टेडियम में साफ सफाई न के बराबर है. ऐसा तब है जब जब इस शहर में युवा व खेल मंत्री खुद रहते है. दैनिक जागरण आई नेक्स्ट रिपोर्टर ने मौके पर पहुंचकर खुद यहां के साफ-सफाई की पड़ताल की और देखा कि साफ-सफाई के नाम पर यहां सिर्फ दिखावा भर हो रहा है. खिलाड़ी गंदे टॉयलेट में पल बढ़ रहे इंफेक्शन के बीच खेल रहे है. ऐसे में अगर यहां को कोई खिलाड़ी बीमार हो तो क्यों न हो.

टूटा है टॉयलेट का दरवाजा

रिपोर्टर सबसे पहले पहुंचा आरएसओ कार्यालय के ठीक नीचे खिलाडि़यों के लिए बने टॉयलेट में. जो बेहद गंदा दिखाई दिया. इन करते ही बेसिन भरा हुआ दिखा. फर्श भी बेहद गंदा था. अंदर के दरवाजे और खिड़कियां भी टूटी हुई थी. खिलाडि़यों ने बताया कि सफाई नहीं होती. खिलाड़ी ही डब्बे से पानी डाल देते है. हैरानी ये भी हुई कि मेल टॉयलेट से सटे फिमेल टॉयलेट के बीच कोई प्राइवेसी नहीं है. पार्टिशन का दीवार भी आधी है.

नांक बंद कर करती है चेंज

अब हम आ पहुंचे ताइक्वांडो हाल में यहां के टॉयलेट की हालत सबसे खराब दिखी. टायॅलेट के हर कोने में धूल की परत जमी हुई थी. जिसके उपर मच्छर भिनभिनाते रहे थे. बताया गया कि इस टॉयलेट 6 माह से सफाई नहीं की गई है. टॉयलेट में बदबू इतना ज्यादा रहता कि यहां कोई ज्यादा देर खड़ा हो तो इंफेक्शन से बीमार पड़ जाता है. लेकिन फीमेल प्लेयर इसी नाक बंद कर किसी तरह ड्रेस चेंज करती है.

हर टॉयलेट की हालत खराब

इसी तरह हमने फुटबॉल हॉस्टल, कुश्ती हॉल, मल्टीपरपस हॉल समेत आधा दर्जन से ज्यादा टायलेट और आसपास का मुआयना किया. कमोवश हर टॉयलेट की स्थिति एक जैसी ही दिखी. 27 खिलाडि़यों के हॉस्टल में साफ-सफाई का कुछ खास इंतजाम नहीं है. हैरानी इस बात की भी हुई कि मात्र एक टॉयलेट को छोड़ किसी भी जगह महिला खिलाडि़यों के लिए अलग टॉयलेट नहीं बने है. इससे महिला खिलाडि़यों का ज्यादा प्रॉबलम फेस करनी पड़ रही है.

एक साल पहले बना, शुरु अभी तक नहीं

आरएसओ कार्यालय से 100 मीटर आगे देखा कि वहां एक नया टॉयलेट बनकर तैयार है. कर्मचारियों ने बताया कि नगर निगम की तरफ से इसे एक साल पहले बनाया गया है. लेकिन इसकी शुरुआत अभी तक नहीं हुई. बताया कि इस टॉयलेट में गेट न होने से इसमें लगी सभी टोटिया चोरी हो गई. इसलिए इसे एक लोहे जंगले से कवर कर दिया.

सिर्फ एक स्वीपर

कर्मचारियों की माने तो इसमें सफाई कर्मचारियों का कोई दोष नहीं है. पूरा स्टेडियम सिर्फ मात्र एक स्वीपर के भरोसे चल रहा है. शासन ने लंबे समय से स्वीपर की नियुक्ति नहीं की है. ऐसे में अकेले एक स्वीपर हर जगह सफाई कैसे करेगा.

सबसे बड़ी समस्या स्वीपर की है. इसकी नियुक्ति के लिए शासन को लिखा गया है. फिलहाल ठेके पर स्वीपर रखने की व्यवस्था की जाएगी. जिससे साफ-सफाई बनी रही.

एसएस मिश्रा, आरएसओ, सिगरा स्टेडियम