-पहले दिन दस हजार बच्चों को पिलाई गई दवाएं

-सरकारी अस्पताल, सीएचसी, पीएचसी और अर्बन हेल्थ पोस्ट पर पिलाई गई दवा

GORAKHPUR: पोलियों की तर्ज पर बच्चों को डायरिया से बचाने के लिए जिला महिला अस्पताल से बच्चों को रोटा वायरस वैक्सीन पिलाने के अभियान की शुरूआत बुधवार को हुई. इसके तहत प्रशिक्षित डॉक्टर व पैरामेडिकल स्टॉफ ने बच्चों को रोटा वायरस की पांच-पांच बूंद पिलाई. सरकारी अस्पताल, सीएचसी व पीएचसी सेंटर, अर्बन हेल्थ पोस्ट पर करीब दस हजार बच्चों को दवा पिलाई गई. हर साल करीब सवा लाख बच्चों को यह दवा पिलाई जाएगी.

जिला अस्पताल से अभियान की शुरूआत

जिला महिला अस्पताल में रोटा वायरस वैक्सीन का शुभारंभ विधायक ग्रामीण विपिन सिंह द्वारा किया गया. इस बीच बच्चों को दवा पिलाई गई. डायरिया की वजह से बच्चों की होने वाली मौतों पर यह वैक्सीन लगाम लगाएगी. इसलिए टीकाकरण में इस वैक्सीन को शामिल किया गया है. इस मौके पर सीएमओ डॉ. श्रीकांत तिवारी सहित महिला अस्पताल एसआईसी डॉ. डीके सोनकर, डॉ. ओपीजी राव, डीएचआईओ डॉ. परवेज आलम, मनोज श्रीवास्तव, गौवासुद्दीन, डॉ. गोस्वामी, नंदलाल, राजीव रंजन व पवन सिंह मौजूद रहे.

पांच साल के बच्चों की होगी पड़ताल

एसीएमओ सीएमओ प्रतिरक्षण डॉ. आईवी विश्वकर्मा ने बताया कि रोटा वायरस डायरिया से देश में सालाना 1.50 लाख बच्चों की मौत हो जाती है. इसका प्रभाव पांच साल तक के बच्चों पर पड़ता है. दो साल या उससे कम उम्र के बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं. इसको देखने हुए शासन ने इसे नियमित टीकाकरण अभियान में शामिल किया है. यह एक सीरप है.

हर तीन महीने पर पिलाई जाएगी दवा

उन्होंने बताया कि नवजात को पहली खुराक डेढ़ महीने के बाद, दूसरी बार ढाई महीने और तीसरी खुराक साढ़े तीन महीने के बाद पिलाई जाएगी. यह पोलियो ड्रॉप की तरह ही होगा. एक साल की उम्र तक के हर बच्चों को दवा पिलाई जाएगी. हर साल करीब एक साल की उम्र तक के सवा लाख बच्चों को यह दवा पिलाई जाएगी.

रोटा वायरस से होता है आंतों का संक्रमण

रोटा वायरस से आंतों का संक्रमण होता है. इस इंफेक्शन से आंत की कोशिकाएं प्रभावित होती हैं. ऐसे में खाना पच नहीं पाता. इससे दस्त आने शुरू हो जाते हैं. समय पर इलाज नहीं होने से बच्चे की मौत हो सकती है.