-चेन स्मोकिंग करने वाले यंगस्टर्स की बर्जर डिसीज पर सर्जरी विभाग की स्टेम सेल थेरेपी कारगर साबित हुई

kanpur@inext.co.in

KANPUR: मेडिकल कॉलेज के सर्जरी डिपार्टमेंट ने स्मोकिंग करने वाले यंगस्टर्स को होने वाली बर्जर डिसीज के इलाज की नई तकनीक इजाद की है. जिसमें स्टेमसेल के जरिए यंगस्टर्स की नसों की सिकुड़न को सही किया जा सकता है. इस बीमारी की अभी तक कोई प्रॉपर लाइन ऑफ ट्रीटमेंट नहीं थी. जिससे कई बार पैर काटने की नौबत भी आ जाती थी. इस तकनीक पर एक्सटेंडेड रिसर्च के लिए मेडिकल कॉलेज की एथिक्स कमेटी ने भी मंजूरी दे दी है. सर्जरी विभाग को इस प्रोजेक्ट में कॉर्डियोलॉजी की भी मदद मिलेगी. जिसमें वह वेरीकोज वेन के इलाज में भी इस तकनीक की मदद लेंगे.

क्या है बर्जर डिसीज

बर्जर डिसीज एक बेहद रेयर बीमारी है. जोकि यंगस्टर्स को होती है. चेन स्मोकिंग करने वाले इन यंगस्टर्स की टांगों में खून पहुंचाने वाली छोटी व माइक्रो नसें सिकुड़ जाती है. जिससे पैर में ब्लड सर्कुलेट नहीं होता. इससे शुरुआत में उन्हें चलने फिरने में प्रॉब्लम होती है. ज्यादा बढ़ने पर पैर काटने तक की नौबत आ जाती है.

टेस्टिंग में आए पॉजिटिव रिजल्ट

बर्जर डिसीज के ट्रीटमेंट में स्टेम सेल तकनीक से सर्जरी विभाग में दो मरीजों का इलाज किया गया. इन मरीजों की पैर की सिकुड़ी नसों में 50 स्टेम सेल डाले गए. जिसके सकारात्मक नतीजे सामने आए और उनकी नसें काफी हद तक खुल गई. अल्सर पर भी इसका बेहद पॉजिटिव असर आया स्टेम सेल लगाने से घाव तेजी से भरने लगे.

कहां से आ रहे स्टेम सेल

सर्जरी विभाग के हेड प्रो. संजय काला ने बताया कि अभी बेंगलुरू की एक कंपनी फ्री में स्टेम सेल मुहैया करा रही है. स्टेम सेल को लिक्विड नाइट्रोजन में माइनस 80 डिग्री टैम्पे्रचर पर स्टोर किया जाता है. मरीज को यह इंजेक्शन के जरिए दिया जाता है.

क्या होता है स्टेम सेल-

स्टेम सेल का निर्माण डोनर की बोन मैरो से निकाल कर किया जाता है. बोन मैरो से निकालने के दौरान इनकी संख्या बेहद कम होती है. इसे कल्चर के जरिए बढ़ा कर स्टोर किया जाता है.

अभी इन बीमारियों में कारगर-

गैंगरीन, अल्सर, ग्रेड-1 आर्थराइटिस

वर्जन-

बर्जर डिसीज का स्टेम सेल से इलाज में काफी पॉजिटिव रिजल्ट्स आएं हैं. इस तकनीक को यूएसएफडीए ने भी अप्रूव किया है. साथ ही मेडिकल कॉलेज में इस पर रिसर्च के लिए एथिक्स कमेटी ने मंजूरी दे दी है.

- प्रो. संजय काला, एचओडी, सर्जरी विभाग, जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज