- 7 अगस्त 2016 को जल निगम के ऑफिसर अब्दुल सलीम फरीदी की किडनैपिंग का मामला

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LUCKNOW : हनी ट्रैप में फंसे अब्दुल सलीम फरीदी की फिरौती देने के बाद रिहाई तो हुई पर वारदात के मास्टरमाइंड प्रेमी युगल संदीप-नीतू का कत्ल हो गया और फिरौती की रकम समेटकर कोई और फरार होने की जुगत में था। किडनैपर्स के दोनों कातिलों व इस घटना में उनके मददगारों की फ्लाइट से अरेस्टिंग की यह कहानी बिल्कुल किसी मुंबइया फिल्म के क्लाईमेक्स की तरह अपने अंजाम तक पहुंचती है पर, इसके बैकग्राउंड में गाजीपुर पुलिस व एसटीएफ की टीमों ने जो तालमेल व सतर्कता दिखाई, उसने हनी ट्रैप के आरोपियों को पुलिस ट्रैप में फंसने को मजबूर कर दिया।

इलाहाबाद में निकली लोकेशन

जल निगम के सेक्शन ऑफिसर अब्दुल सलीम फरीदी की 7 अगस्त 2016 को किडनैपिंग, उनके रिहा होने, फिरौती की रकम की लालच में मास्टरमाइंड संदीप सिंह व नीतू के कत्ल और उनके कातिलों की अरेस्टिंग की पूरी कहानी जितनी दिलचस्प है, इन कातिलों को पकड़ने के लिये पुलिस द्वारा अपनाई गई स्ट्रेटजी उससे भी ज्यादा रोमांचक है। एफआईआर दर्ज होने के बाद से मामले की निगरानी कर रहे तत्कालीन सीओ गाजीपुर दिनेश पुरी ने बताया कि फरीदी के मोबाइल फोन की पहली बार लोकेशन इलाहाबाद के अरैल में निकली। आनन-फानन पुलिस टीम को उनकी तलाश में रवाना कर दिया गया।

10 लाख रुपये दी थी फिरौती

टीम इलाहाबाद पहुंची तो उनकी लोकेशन सोरांव गंगापार निकली। टीम सोरांव पहुंची ही थी कि फरीदी की लोकेशन बदलकर फाफामऊ के मंसूराबाद रोड पर दिखने लगी। पुलिस टीम ने वहां पहुंचकर फरीदी को सड़क किनारे से बरामद कर लिया और उन्हें लेकर वापस लखनऊ लौट आई। पूछताछ में पता चला कि फरीदी के परिजनों ने एचडीएफसी बैंक के एक अकाउंट में 10 लाख रुपये फिरौती जमा की तब जाकर किडनैपर्स ने अब्दुल सलीम फरीदी को रिहा किया। फरीदी ने बताया कि उसे नीतू व संदीप ने किडनैप किया था और रकम संदीप के अकाउंट में जमा कराई गई थी।

मोबाइल की जगह बैंक अकाउंट सर्विलांस पर

संदीप के मोबाइल को सर्विलांस पर लिया। पर उसका मोबाइल लगातार स्विचऑफ आ रहा था। जिसके बाद बैंक अकाउंट की निगरानी के लिये एक पुलिस टीम को एचडीएफसी बैंक में बैठा दिया गया। इसी बीच इलाहाबाद से खबर मिली कि संदीप और नीतू का कत्ल हो गया और उनकी लाश हंडिया व उरांव से बरामद हुई है। लेकिन, संदीप के कत्ल के बाद भी उसके अकाउंट से रुपये निकालने का सिलसिला जारी था। यह भी पता चला कि अज्ञात शख्स रुपये निकालते हुए लखनऊ की ओर बढ़ रहे हैं। पुलिस अकाउंट की हर हलचल पर नजर बनाए थी। इसी बीच बुधवार दोपहर पता चला कि अमौसी एयरपोर्ट स्थित स्पा में संदीप के कार्ड के जरिए पेमेंट किया गया है।

टेकऑफ के लिये तैयार था प्लेन

जानकारी मिलते ही एयरपोर्ट चौकी इंचार्ज को एक्टिव किया गया। उसने फौरन स्पा में पड़ताल की तो पता चला कि दो लोगों ने अपनी मसाज कराई है और उसका पेमेंट संदीप के कार्ड से किया गया है। स्पा में उनका बोर्डिग पास की फोटो कॉपी मिल गई। उन बोर्डिग पास की पड़ताल में पता चला कि वे दोनों मुंबई जाने वाली गो एयर की फ्लाइट पर सवार हो चुके हैं। फ्लाइट को टेकऑफ से रोका जाना बेहद जरूरी था। लिहाजा सीओ पुरी ने तुरंत आईजी ए। सतीश गणेश को इसकी जानकारी दी। आईजी ने एटीसी को फोन कर फ्लाइट को टेकऑफ करने से रुकवाया। जिसके बाद पुलिस ने रनवे पर पहुंचकर फ्लाइट से संदीप व नीतू के कातिलों इमरान व जीतेश को अरेस्ट कर लिया।

खुलासे के सूत्रधार: दिनेश पुरी, तत्कालीन सीओ गाजीपुर

7 अगस्त 2016 की देर रात किडनैपिंग की सूचना मिलने के बाद तत्कालीन सीओ गाजीपुर ने पूरे मामले की कमान अपने हाथों में ले ली। किडनैप हुए अब्दुल सलीम फरीदी की सकुशल बरामदगी के बाद फिरौती के लिये जिस बैंक अकाउंट में रकम जमा कराई गई, उसे सर्विलांस पर लिया गया। इसके लिये एक टीम को एचडीएफसी बैंक में बिठा दिया गया और उसकी निगरानी शुरू करा दी। उनका यह फैसला सही साबित हुआ और बैंक अकाउंट की निगरानी ने आखिरकार पुलिस को मुख्य किडनैपर्स के कातिलों व किडनैपिंग में मददगार रहे दो आरोपियों तक पहुंचा दिया। इतिहास में पहली बार रनवे पर टेकऑफ के लिये तैयार खड़ी फ्लाइट से दोनों आरोपियों को अरेस्ट कर लिया गया। बेहद प्रोफेशनल तरीके से किये गुडवर्क के लिये तत्कालीन डीजीपी जावीद अहमद ने सीओ दिनेश पुरी व उनकी टीम की जमकर सराहना की और 50 हजार रुपये का इनाम देने की घोषणा की थी।