भारत को जंबूद्वीप कहा गया है, जो हीरे की तरह बना है और जंबू फल की तरह दिखता है। विंध्याचल पर्वत इसे दो हिस्से में बांटते हैं। उत्तरी हिस्से को हम उत्तरपथ और दक्षिण को दक्षिणपथ कहते हैं। यह माना जाता है कि वैदिक परंपरा उत्तर से दक्षिण गई और उसके साथ-साथ बहुत धारणाएं और अनुष्ठान भी। ऋषि जब दक्षिण गए, तो उन्होंने कहा कि हमें यहां भी गंगा चाहिए तो दक्षिण गंगा की संकल्पना की गई। कावेरी नदी को दक्षिण गंगा कहते हैं।

अगस्त मुनि के कमंडल से निकली कावेरी

कथा है कि अगस्त मुनि जब दक्षिण जा रहे थे, तो एक कमंडल में उन्होंने गंगा का पानी लिया। वहां वे कमंडल को पत्थर पर रखकर तप कर रहे थे। तब गणेश एक कौए का रूप लेकर आए और उस कमंडल को गिरा दिया। तो वहां से कावेरी नदी की शुरुआत हुई।

गोदावरी के जन्म की कथा

एक और कथा है, जिसमें गोदावरी दक्षिण गंगा है। यह कहानी गोदावरी महात्म्य में है। जैसे मैंने कहा कि गौरी या पार्वती को बहुत बुरा लगता था कि हमेशा शिव गंगा को अपने सिर पर क्यों रखते हैं? वे उनसे पीछा छुड़ाना चाहती हैं। एक ऋषि थे, जिनका नाम गौतम ऋषि था। उनका आश्रम दक्षिण में था। गणेश जी गाय का रूप धारण कर उनके आश्रम जाते हैं और उनके चावल के खेत में चरने लगते हैं। उनको भगाने के लिए उनकी तरफ वे एक पत्थर फेंकते हैं। गणेश दिखाते हैं कि वे मर गए। गाय मर जाती है, तो गौहत्या मान ली जाती है।

ऋषि कहते हैं कि मुझे इस पाप का पश्चाताप करना पड़ेगा। गणेश वापस वहां आकर कहते हैं कि अच्छा भगवान शिव से मांगिए कि गंगा कैलाश छोड़ कर यहां आ जाएं, ताकि मेरी मां को और परेशानी न हो। गौतम ऋषि शिव से मांगते हैं कि गंगा को दक्षिण में लेकर आइए। इसके बाद शिव गंगा से कहते हैं कि तुम दक्षिण चली जाओ और वे गोदावरी के रूप में दक्षिण में बहने लगती हैं।

देवदत्त पट्टनायक (लेखक पौराणिक आख्यान के अध्येता हैं)

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