क्त्रन्हृष्ट॥ढ्ढ: राजधानी में गली-मोहल्लों को चकाचक करने के लिए स्ट्रीट लाइट लगाई गई हैं ताकि रात के अंधेरे में भी लोगों को दिक्कतों का सामना न करना पड़े. लेकिन लाइट इंस्टाल करने के कुछ दिनों बाद ही सिटी की सैकड़ों स्ट्रीट लाइट बंद हो गईं. इसे बनाने को लेकर आसपास के लोगों ने कंप्लेन भी की. लेकिन कोई भी इस ओर झांकने तक नहीं आया. स्थिति यह है कि लाइट नहीं जलने के कारण लोगों को डर सताने लगा है कि कहीं अंधेरे में उनके साथ चोरी-छिनतई न हो जाए.

कई बार कंप्लेन

गली-मोहल्लों में महीनों से खराब लाइट बनाने को लेकर लोगों ने कई बार कंप्लेंट की. इसके बाद भी लाइट बनाने के लिए कोई नहीं आया. लोगों ने वार्ड में घूम रहे एजेंसी के स्टाफ को भी लाइट खराब होने की जानकारी दी. लेकिन उन्होंने लाइट बनाने से इन्कार कर दिया. उनका कहना था कि आफिस में कंप्लेन करने के बाद ही कुछ हो सकता है. इसके बाद एजेंसी के लोग निकल गए.

इइएसएल को सौंपा है काम

नगर विकास विभाग ने राजधानी समेत पूरे राज्य में गली-मोहल्लों में लाइट लगाने का काम इइएसएल कंपनी को दे दिया है. इसके तहत एजेंसी ने पुरानी वेपर लाइट को बदलकर एलइडी लाइट लगाई है. ऐसे में लाइट लगाने से लेकर मेंटेनेंस का काम एजेंसी को ही देखना है. जिससे कि रांची नगर निगम अब इस मामले में कोई हस्तक्षेप नहीं कर सकता. वहीं पार्षद केवल लाइट खराब होने की सूचना दे सकते हैं. इसके बाद एजेंसी के स्टाफ मेंटेनेंस का काम करेंगे. इस चक्कर में खामियाजा तो राजधानी की पब्लिक को भुगतना पड़ रहा है.

इधर अंधेरा, उधर 24 घंटे जल रही लाइट

स्ट्रीट लाइट नहीं जलने के कारण सिटी के कई इलाके अंधेरे में डूबे हुए हैं. वहीं दूसरी ओर कुछ इलाकों में लाइट 24 घंटे जलती रहती है. लेकिन इसे देखने वाला कोई नहीं. वहीं किसी भी पोल पर लाइट बंद करने के लिए स्विच भी नहीं लगाया गया है. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर इस व्यवस्था को देखने की जिम्मेवारी किसकी है. केवल एजेंसी को काम देकर विभाग पल्ला नहीं झाड़ सकता.