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विश्वविद्यालय प्रशासन ने छात्रसंघ चुनाव को लेकर जारी की थी गाइड लाइन, शुक्रवार से चलाया जाना था अभियान

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ALLAHABAD: इलाहाबाद विश्वविद्यालय में प्रस्तावित छात्रसंघ चुनाव के लिए चुनाव अधिकारी के रूप में प्रो. आरके उपाध्याय की नियुक्ति किए जाने के बाद से परिसर छात्रों के पोस्टर, बैनर व होर्डिग्स से पट गया था. विश्वविद्यालय प्रशासन ने इन्हें हटाने के लिए छात्रों को गाइडलाइन के साथ गुरुवार तक का समय दिया था और शुक्रवार को अभियान चलाकर कार्रवाई भी किया जाना था लेकिन यह अभियान पहले ही दिन बेअसर साबित हो गया. चुनाव लड़ने वाले छात्रों ने पोस्टर तो हटाया नहीं बल्कि बड़ी-बड़ी होर्डिग्स और ज्यादा लगा दी.

अवैध तरीके से लगाई होर्डिग्स

विश्वविद्यालय के कला व विज्ञान संकाय के अधिकतर विभागों के गेट और उसकी दीवारों पर पिछले एक सप्ताह से चुनाव लड़ने के इच्छुक छात्रों की ओर से होर्डिग्स लगाई जा रही है. इतना ही नहीं कई छात्रों ने तो रसायन विज्ञान विभाग, अर्थशास्त्र विभाग व उर्दू विभाग की दीवारों को ही पोस्टर से पाट दिया है. जिसे विश्वविद्यालय प्रशासन ने अवैध बताते हुए ऐसे छात्रों से होर्डिग्स व पोस्टर को हटाने को कहा था. जिसकी अंतिम समय सीमा 24 अगस्त तक निर्धारित की गई थी.

प्राक्टर व्यस्त, सदस्यों का पता नहीं

विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार शुक्रवार को ऐसे छात्रों के खिलाफ चुनाव लड़ने से अयोग्य घोषित करने जैसी कार्रवाई की जानी थी. लेकिन चीफ प्राक्टर प्रो. राम सेवक दुबे विभागीय कार्यो की व्यस्तता की वजह से दोपहर एक बजे तक प्राक्टर आफिस में नहीं मौजूद थे. इतना ही नहीं आफिस में प्राक्टोरियल बोर्ड का कोई मेम्बर भी नहीं दिखा. यही वजह रही कि पहले ही दिन कार्रवाई बेअसर साबित हुई.

तीन दिन बाद वीडियोग्राफी

विश्वविद्यालय में छात्रसंघ चुनाव के लिए बनाए गए चुनाव अधिकारी प्रो. आरके उपाध्याय की मानें तो सोमवार से नियमित रूप से कला, विज्ञान व विधि संकाय के परिसर की वीडियोग्राफी कराई जाएगी. उसके पहले तक यदि होर्डिग्स या पोस्टर नहीं हटाया जाता है तो रिकार्डिग में जिनका पोस्टर दिखा उनके खिलाफ लिंगदोह समिति की सिफारिशों के मुताबिक कार्रवाई की जाएगी.

होर्डिग्स व पोस्टर लगाने वाले छात्रों को चेतावनी के साथ अंतिम मौका दिया गया है. कार्रवाई की जाएगी लेकिन एक-दो दिनों तक हम लोग देखेंगे कि किन-किन छात्रों के उपर विश्वविद्यालय प्रशासन की गाइड लाइन का असर हुआ है. इस संबंध में चुनाव अधिकारी से बात हुई है और परिसर की वीडियोग्राफी कराने का निर्णय लिया गया है.

प्रो. राम सेवक दुबे,

चीफ प्राक्टर, इविवि