(रिएलिटी चेक)

दैनिक जागरण आई नेक्स्ट के रिएलिटी चेक में ताक पर दिखी यूजीसी की गाइडलाइन

- मशीन के साथ ही कॉलेजेज को पैड डिस्पोजल के इंतजाम का भी दिया गया है निर्देश

- जुलाई 2017 को जारी हुई थी गाइडलाइन, सात महीने बीतने के बाद भी स्थिति जस की तस

- प्रॉपर इंतजाम न होने के कारण ही पीरियड्स के दौरान क्लासेस छोड़ती है छात्राएं

अक्षय कुमार की नई मूवी के बाद पैडमैन सिल्वर स्क्रीन से लेकर सोशल मीडिया तक ट्रेंड कर रहा है. लेकिन इस मूवी से पहले ही यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (यूजीसी) इस बेहद संवेदनशील मुद्दे पर चिंता जता चुका है. इसके लिए जुलाई 2017 में यूजीसी ने सभी ग‌र्ल्स कॉलेजेज को निर्देश दिया कि स्पेशल छात्राओं में उनकी मंथली प्रॉब्लम के संबंध में प्रॉपर इंतजाम किए जाए. यूजीसी के इस आदेश का कहां-कहां पालन हुआ? इसकी जांच के लिए दैनिक जागरण आई नेक्स्ट टीम ने कई ग‌र्ल्स कॉलेजों की स्टूडेंट्स से सम्पर्क किया. सभी ने माना कि उनके कॉलेज में कोई इंतजाम नहीं है. ना ही उन्हें ये पता था कि यूजीसी की तरफ से कोई गाइडलाइन थी.

लगनी थी खास मशीन

यूजीसी ने ग‌र्ल्स स्टूडेंट्स की खास प्रॉब्लम में असिस्टेंस के लिए कॉलेजों में सेनटरी पैड्स वेंडिंग मशीन लगाने को कहा था. निर्देश में ये भी कहा गया था कि यूज्ड नैपकिन के डिस्पोजल के लिए इंसीनिरेटर यानि भट्टी लगाई जाए. यूजीसी की मंशा थी कि पीरियड्स के दौरान कॉलेज के पीरियड्स मिस करने वाली छात्राओं की उपस्थिति बढ़े. साथ ही उन्हें इस समस्या में आपात स्थिति के समय भटकना न पड़े.

कहीं नहीं नजर नहीं आई

दैनिक जागरण आई नेक्स्ट की पड़ताल में ग‌र्ल्स स्टूडेंट्स ने माना है कि उन्होंने कॉलेज में कभी ऐसी वेंडिंग मशीन नजर नहीं आई. ये भी स्वीकार किया कि उनके यहां कॉलेज में स्टूडेंट्स को पीरियड्स के दौरान कोई स्पेशल असिस्टेंस नहीं मिलता. लिहाजा छात्राएं खुद पूरे इंतजाम से आती हैं. जिनके साथ प्रॉब्लम ज्यादा होती है, वो उस दौरान नहीं भी आतीं.

क्या था गाइडलाइन में?

छात्राओं की सुविधा के लिए कॉलेजेज और हॉस्टल्स में पैड वेंडिंग मशीन लगे. साथ ही यूस्ड सेनेटरी पैड डिस्पोज करने के लिए इंसीनिरेटर और अलग डस्टबिन भी लगे क्योंकि इसका इधर-उधर फेका जाना स्वास्थ्य और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाता है. छात्राओं को असुविधा भी होती है.

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सेनेटरी पैड वेंडिंग मशीन ग‌र्ल्स हॉस्टल और कॉलेज, दोनों के लिए बहुत जरुरी है. दु:ख की बात ये है कि यहां ग‌र्ल्स की बेसिक नीड पूरी हो जाए यही बहुत है. मेडिकल फेसिलिटी के नाम पर कहीं कुछ नहीं है. रात के समय हॉस्टल के किसी लड़की की तबीयत बिगड़ जाए तो दवा तक उपलब्ध नहीं रहती.

डॉ. रेखा, प्रोफेसर, समाजशास्त्र विभाग, काशी विद्यापीठ

मैं खुद मानती हूं कि छात्राओं के लिए इस मशीन का लगना जरूरी है. यूजीसी से निर्देश मिलने के बाद कॉलेज में इस व्यवस्था को लागू करने के लिए एक कमेटी बनाई गई थी. दिल्ली से एक टीम आकर वीसी से मिली भी थी. लेकिन उसके बाद इस पर कोई चर्चा नहीं हुई. अब क्या हो रहा है, इसकी जानकारी नहीं है.

डॉ. कौशिक संध्या, प्राचार्या, महिला महाविद्यालय, बीएचयू

यूजीसी से मिले निर्देश की कॉपी आकर रखी है. लेकिन अभी मशीन नहीं लग सकी है. हमें जानकारी मिली कि केन्द्र सरकार की ओर से मशीन आने वाली है. उसी का इंतजार है. वैसे कॉलेज में छात्राओं के लिए पैड अवलेबल रहता है. डिस्पोजल के लिए इंसीनिरेटर की व्यवस्था भी की जाएगी.

डॉ. कुमकुम मालवीय, प्रिंसिपल, अग्रसेन कन्या पीजी कॉलेज

सेनेटरी पैड्स वेंडिंग मशीन लगाने को लेकर यूजीसी की ओर से अभी तक कोई आदेश नहीं आया है. अगर ऐसा कोई गाइडलाइन आई है तो उसे अमल में जरूर लाया जाएगा. वैसे कॉलेज व सभी हॉस्टल्स में पैड की व्यवस्था की गई है. जरुरत पड़ने पर छात्राओं को दिया जाता है.

डॉ. अल्का सिंह, प्रिंसिपल, बसंता कॉलेज, राजघाट

एक नजर

1,000 के लगभग छात्राएं रहती है बीएचयू के छह ग‌र्ल्स हॉस्टल में

2,500 के करीब छात्राएं पढ़ती हैं बीएचयू महिला महाविद्यालय में

225 छात्राएं रहती हैं बसंता कॉलेज राजघाट के दो हॉस्टल्स में

150 छात्राएं रहती हैं काशी विद्यापीठ के एक ग‌र्ल्स हॉस्टल में

70 छात्राएं रहती हैं अग्रसेन पीजी कॉलेज परमानंदपुर के हॉस्टल में

12 के करीब हैं जिले में ग‌र्ल्स डिग्री व पीजी कॉलेज