- बड़ी रजिस्ट्रियों को नहीं भेजा जाता मूल्यांकन के लिए

- सब रजिस्ट्रार मिलीभगत कर दबा देते हैं ऐसे प्रकरण

आगरा. स्टाम्प चोरी के मामले लगातार सामने आ रहे हैं. इससे राजस्व की हानि होती है. स्टाम्प चोरी में सब रजिस्ट्रारों की भी भूमिका रहती है. अगर ठीक से मौका मुआयना किया जाए, तो स्टाम्प चोरी हो ही नहीं सकती. इसमें सब रजिस्ट्रारों की भी जिम्मेदारी तय की जा रही है.

आईजी और एआईजी स्टाम्प भी हैं जिम्मेदार

रजिस्ट्री कराने के दौरान कुछ लोग स्टाम्प चोरी करते हैं. लेकिन इस काम में सब रजिस्ट्रार भी पीछे नहीं होते हैं. रजिस्ट्री का मूल्यांकन नहीं कराया जाता है. नियमानुसार बड़ी रजिस्ट्री को जिलाधिकारी के पास मूल्यांकन के लिए भेजना चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है. इसका उदाहरण अंजना टॉकीज है. अंजना टॉकीज की जुलाई माह में रजिस्ट्री हुई थी, जिसका मूल्यांकन कराए जाने के लिए रजिस्ट्री को जिलाधिकारी के पास नहीं भेजा गया. क्योंकि स्टाम्प चोरी के मामले में पक्षकारों के साथ एआईजी स्टाम्प निरंजन कुमार भी शामिल थे. जब जिलाधिकारी से शिकायत हुई तो आनन फानन में करीब 20 लाख की स्टाम्प चोरी दिखाते हुए रिपोर्ट भेज दी. इस प्रकरण को लेकर जिलाधिकारी गंभीर हैं. प्रशासन का मानना है कि अगर शिकायत नहीं होती तो राजस्व को करीब 20 लाख का घाटा हो गया होता.

रजिस्ट्री होने के बाद ये होना चाहिए

- रजिस्ट्री के बाद स्थलीय निरीक्षण होना चाहिए

- दस बड़ी मालियत की रजिस्ट्री एक माह में जिलाधिकारी के पास मूल्यांकन व स्थलीय जांच के लिए भेजी जाती है.

- 15 बैनामा अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व को भेजे जाने चाहिए

- 20 बैनामा एआईजी स्टाम्प को भेजे जाने चाहिए

- 25 बैनामों का स्वयं सब रजिस्ट्रार को स्थलीय निरीक्षण करना होता है

सौदेबाजी के बैनामों की नहीं होती जांच

असल में हो ये रहा है कि बड़ी रजिस्ट्रियों में सौदेबाजी कर सब रजिस्ट्रार और एआईजी स्टाम्प स्थलीय निरीक्षण के लिए न तो जिलाधिकारी के पास भेजते हैं और न ही अपर जिलाधिकारी के पास भेजते हैं. स्वयं स्थलीय निरीक्षण भी नहीं करते हैं. जब शिकायत होती है तो स्टाम्प कमी की रिपोर्ट अचानक भेज दी जाती है. इससे सरकार को करोड़ों रुपये की हानि हो रही है.