शिव सरोज की आत्महत्या पर रांचीआइट्स ने कहा, पुलिस वाले बदलें अपना रवैया

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RANCHI (4 Aug) : शिव सरोज कुमार की आत्महत्या के मामले में रांची के लोगों में गुस्सा भी है और मृतक के परिजनों के प्रति सहानुभूति भी. लोग चाहते हैं कि इस मामले की निष्पक्ष जांच हो. रिपोर्ट जल्द से जल्द आए और दोषियों को बचाने की कोशिश न हो. दैनिक जागरण-आई नेक्स्ट ने इस प्रकरण में लोगों से उनकी राय जानी. यहां प्रस्तुत है कुछ चुनिंदा लोगों की प्रतिक्रिया :

पुलिसकर्मियों पर शिव सरोज ने जो आरोप लगाए हैं, वह बेहद गंभीर हैं. इन्हें नजरंदाज नहीं किया जाना चाहिए. जांच पूरी होने तक सभी आरोपियों से किसी प्रकार का काम नहीं लेना चाहिए.

अंकिता

यह पुलिस महकमे के लिए आत्ममंथन का समय है. कोई इतना परेशान हो जाए कि वह आत्महत्या कर ले, जरूर कहीं न कहीं उसके साथ ज्यादती हुई है. जांच शीघ्र हो, न्याय भी जल्द मिले.

बंटी जुल्का

आम लोग थाने जाने से ही डरते हैं. चोरी होती है, तो लोग एफआईआर दर्ज कराने से भी परहेज करते हैं. लोगों में इतना भय होता है कि वे पुलिसवालों के सामने खड़े होने से कतराते हैं.

मनोहर तिर्की

पुलिसकर्मियों की प्रताड़ना के एक से बढ़कर एक किस्से सामने आते रहे हैं. ऐसा लगता है कि उनकी ट्रेनिंग में कहीं भी आम लोगों के साथ बेहतर व्यवहार की बातें शामिल नहीं होतीं.

नितिन

जब तक शिव सरोज जैसे युवाओं को प्रताडि़त किया जाता रहेगा, तब तक आत्महत्याएं होती रहेंगी. पुलिस महकमे के आला अधिकारियों को यह समझना होगा कि आम लोग पुलिस से डरते हैं.

ाजीव रंजन

यह मामला बेहद मार्मिक है. दोषियों को सख्त सजा मिलनी चाहिए. सरकार इस प्रकरण में निष्पक्ष जांच कराए, ताकि आइंदा किसी शिव सरोज को प्रताडि़त करने से पहले पुलिस वाले हजार बार सोचें.

राकेश किरण

आम आदमी के साथ हर जगह पुलिस वाले बेहद सख्ती से पेश आते हैं. उन्हें अपने व्यवहार में थोड़ी नर्मी लानी चाहिए. अगर शिव सरोज ही दोषी था, उसके खिलाफ पुलिस को कार्रवाई करनी चाहिए थी.

ऋषभ

आत्महत्या कहीं से भी अच्छा फैसला नहीं कहा जा सकता. शिव अगर प्रताडि़त हुआ था, तो उसे डटकर लड़ना चाहिए था. इन सब के बावजूद इस मामले में अगर कोई दोषी है, तो सजा जरूर ि1मलनी चाहिए.

संजय महली

मुआवजा या नौकरी का ऑफर किसी के बच्चे को वापस नहीं ला सकता. सरकार को ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए कि आगे से ऐसा किसी के साथ न हो. आम लोगों को भी संयम बरतना चाहिए.

शाहनवाज बारी

हर मामले के बाद निलंबन और जांच की रस्म अदायगी होती है. इससे आगे बढ़कर कोई ऐसा कदम उठाना चाहिए, जिससे आम लोगों में शासन के प्रति विश्वास जगे और आगे से किसी को आत्महत्या नहीं करनी पड़े.

विवेक