-नेशनल शुगर इंस्टीट्यूट में तीन दिवसीय ट्रेनिंग प्रोग्राम शुरू, वेस्ट को कम करने के बताया उपाया

-एक्सप‌र्ट्स ने चीनी मिलों को लेटेस्ट टेक्नोलॉजी यूज करने को कहा

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KANPUR: शुगर इंडस्ट्री को अब सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड व यूपी पॉल्यूशन बोर्ड के डिसाइड किए गए मानकों पर खरा उतरना होगा. अभी जो वेस्ट लिक्विड 200 लीटर प्रति टन है उसे कम करके 160 लीटर प्रति टन पर लाना होगा. शुगर मिलों को अपनी टेक्नोलॉजी को अपग्रेड करना होगा. न्यू टेक्नोलॉजी का यूज करना शुरू कर देंगे तो पॉल्यूशन का लेवल खुद ब खुद कम होने लगेगा. यह विचार नेशनल शुगर इंस्टीट्यूट में आयोजित तीन दिवसीय ट्रेनिंग प्रोग्राम का इनॉग्रेशन करते हुए डायरेक्टर प्रो. नरेन्द्र मोहन अग्रवाल ने व्यक्त किए.

प्रेजेंटेशन देकर बताया

एनएसआई डायरेक्टर प्रो. अग्रवाल ने इंवॉयरमेंट को बेहतर रखना हम सभी की जिम्मेदारी है. कोशिश यही की जानी चाहिए कि जितना कम प्रदूषण हम करेंगे उतना ही बेहतर होगा. उन्होंने शुगर मिलों को ऑनलाइन कांटीनुअस इफ्लूएंट मॉनीटरिंग एण्ड कंट्रोल सिस्टम का यूज करने की भी सलाह दी. इस सिस्टम को लगाकर शोधित इफ्लूएंट की क्वॉलिटी व क्वांटिटी पता चल जाएगी. संस्थान के डॉक्टर संतोष कुमार ने कहा कि इफ्लूएंट को री-साइकिल करने की कई टेक्नोलॉजी हैं. शोधित जल में सल्फेट को हटाने के लिए प्रजेंटेशन देकर बताया. शुगर इंडस्ट्री में टर्सरी ट्रीटमेंट टेक्नोलॉजी का यूज करना चाहिए. डॉ विष्णु प्रभाकर श्रीवास्तव ने कार्बनिक रसायन इफ्लूएंट एनालिसिस का सिस्टम बताया. इस सिस्टम से निकलने वाले इफ्लएंट से खेतों की सिंचाई की जा सकती है या फिर नदी व नालों में भी बहाया जा सकता है.