क्त्रन्हृष्ट॥ढ्ढ: अगर आप भी सुपरस्पेशियलिटी सदर हॉस्पिटल में इलाज कराने जा रहे हैं तो आपको ओपीडी में बैठने की जगह नहीं मिलेगी. ऐसे में आपको खड़े-खड़े ही डॉक्टर से दिखाने के लिए इंतजार करना होगा. यहां बस नाम का सुपरस्पेशियलिटी हॉस्पिटल है लेकिन इलाज के लिए आने वाले मरीजों को जेनरल हॉस्पिटल की सुविधाएं भी नहीं मिल रही हैं. इस अव्यवस्था से सबसे ज्यादा परेशानी प्रेग्नेंट महिलाओं को रही है. वहीं चाइल्ड ओपीडी में भी मां बच्चों को गोद में लिए खड़े-खड़े अपनी बारी का इंतजार करती देखी जाती हैं. इसके बावजूद ओपीडी कांप्लेक्स में मरीजों के बैठने की कोई व्यवस्था नहीं की गई है. ऐसे में सवाल यह उठता है कि आखिर मरीजों को सुपरस्पेशियलिटी सुविधाएं कब मिलेंगी?

ओपीडी में डेली 700 मरीज

सदर हॉस्पिटल में हर दिन इलाज के लिए 600-700 मरीज आते हैं. इसमें 400 के करीब महिलाएं ही होती हैं. वहीं 150 बच्चों का इलाज ओपीडी में होता है. ऐसे में मरीज के बैठने की व्यवस्था नहीं होने से उनका दर्द और बढ़ जाता है. इतना ही नहीं, कई मरीज और परिजन तो थककर जमीन पर ही बैठ जाते हैं. नंबर आने पर वो डॉक्टर से दिखाकर जब निकलते हैं तो काफी राहत महसूस होती है.

सिर्फ नाम का सुपरस्पेशियलिटी

अगस्त 2017 में सीएम ने 200 बेड के सुपरस्पेशियलिटी हॉस्पिटल की शुरुआत की थी. जिसमें महिलाओं और बच्चों का इलाज किया जाता है. लेकिन एक साल बीत बाद भी आजतक मरीजों के लिए सुपरस्पेशियलिटी सुविधाएं शुरू नहीं की जा सकी हैं. इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि हॉस्पिटल का सिर्फ नाम ही सुपरस्पेशियलिटी है, लेकिन यहां पर मरीजों के बैठने के लिए भी पर्याप्त व्यवस्था नहीं है. जिसका खामियाजा इलाज के लिए ओपीडी में आने वाले मरीजों को भुगतना पड़ रहा है.