-अच्छेलाल गिरोह के चार गुर्गो को खोज में एसटीएफ

-लास्ट मंथ दो गए थे पश्चिम बंगाल के मालदा

allahabad@inext.co.in

ALLAHABAD: नकली नोटों का बुरे काम करने वाला अच्छे लाल भले ही जेल की सलाखों के पीछे चला गया हो, लेकिन उसका गलीच धंधा अब भी चल रहा है. जिले में अब भी 10 लाख की फेक करेंसी को लेकर अच्छे लाल के चार गुर्गे घूम रहे हैं. चारों करेंसी को खपाने की फिराक में हैं, लेकिन उनकी लोकेशन फिलहाल किसी भी सुरक्षा एजेंसी के पास नहीं है.

छह गुर्गे हैं अंदर

देश की अर्थव्यवस्था को खोखला करने में जुटा रहा अच्छे लाल व उसके गैंग के छह गुर्गे इस वक्त जेल में हैं. थरवई में विजय बहादुर पटेल व रवि सरोज लास्ट मंथ दबोचे गए थे. वहीं, रमेश पटेल, जितेंद्र धूरिया, जीतलाल मौर्य व लालजी वर्मा को प्रतापगढ़ पुलिस ने सोमवार को अरेस्ट किया था. चारों के पास 50 हजार की फेक करेंसी बरामद हुई थी. हालांकि, फेक करेंसी के माहिर खिलाड़ी दाढ़ी, मास्टर व दोनों के चेले तिवारी व मौर्य पुलिस के हाथ अब तक नहीं आए हैं. चारों के असली नाम पुलिस को नहीं पता चल सके हैं. चारों को अच्छे लाल इन्हीं नामों से बुलाता था. दाढ़ी व मास्टर मछली शहर तथा तिवारी इलाहाबाद व मौर्य प्रतापगढ़ का रहने वाला है.

दाढ़ी अक्सर जाता था मालदा

दाढ़ी अच्छे लाल के गैंग का मुख्य मेंबर है. आवाज व गेटअप चेंज करने में माहिर दाढ़ी ही अक्सर पश्चिम बंगाल के मालदा टाउन जाता था. वहां से वह राजू से रुपए लेकर आता था और अच्छे तक पहुंचाता था. जिसके बाद अच्छे अपने गुर्गो को नोट खपाने में लगाता था. मास्टर का भी अक्सर मालदा टाउन चक्कर लगता था. दाढ़ी व मास्टर का कमीशन फिक्स था जबकि बाकी को एक लाख रुपए खपाने पर तीन से चार हजार रुपए तक मिल जाते थे.

करोड़ों का है मालिक

एसटीएफ ऑफिसर्स का कहना है कि पांच साल में नकली नोटों को खपा कर अच्छेलाल ढाई करोड़ रुपए से अधिक कमा चुका है. उसने इलाहाबाद व प्रतापगढ़ में काली कमाई से काफी प्रॉपर्टी खरीदी है. एसटीएफ के साथ ही लोकल पुलिस इसका पता लगाने में जुटी है कि यह प्रॉपर्टी कहां और किसके नाम से खरीदी गई. यह भी जानकारी जुटाई जा रही है कि कौन-कौन अच्छे के नोट खपाने में मदद करता था. सूचना यह भी मिली है कि अच्छे गैंग की कुछ बैंक के कर्मचारियों से भी मिलीभगत है. कुछ लोगों के नाम भी एसटीएफ को मिले हैं. ऐसे लोगों पर नजर रखी जा रही है.

तीन और गैंग भी सक्रिय

अच्छे फेक करेंसी के धंधे का अकेला सौदागर नहीं. उसके जैसे तीन और गिरोह भी काम कर रहे हैं. कीडगंज में जुलाई में पकड़ी गई पांच लाख की फेक करेंसी दूसरे नेटवर्क से इलाहाबाद तक पहुंची थी. बाकी के गिरोह भी एसटीएफ के राडार पर हैं. जल्द ही बड़ी बरामदगी भी हो सकती है.

फैक्ट फिगर

-फेक करेंसी को मालदा टाउन तक पहुंचाने का काम लोकल लोग करते हैं

-फेक करेंसी को सब्जियों, अनाज की बोरियों में भेजा जाता है

-इलाहाबाद तक पहुंचने से पहले फेक करेंसी दो से तीन हाथों से होकर गुजरती है

-एनएच 24 के कुछ ढाबों से भी फेक करेंसी बांटी जाती है

-फेक करेंसी को असली नोटों के साथ मिलाकर चलाया जाता है

-दिहाड़ी मजदूर, ट्रांसपोर्टर व सब्जी मंडियां होती हैं टारगेट

-यमुनापार में था अच्छे लाल का जबर्दस्त नेटवर्क

-कुछ लोकल दुकानदार भी उसके लिए करते थे काम

-इलाहाबाद में हर माह करीब 50 लाख की फेक करेंसी खपाई जाती है