स्कूल प्रिंसिपल बोले, बच्चों के निखार को जरूरी है इंटेलीजेंस टेस्ट

दैनिक जागरण आई नेक्सट के पैनल डिस्कशन में एक्सप‌र्ट्स ने दी अपनी राय

MEERUT। बदलते परिवेश और तकनीक के युग में परंपरागत कॅरियर स्ट्रीम से हटकर कई नए कॅरियर ऑप्शन लगातार सामने आ रहे हैं। हालांकि इन ऑप्शंस के प्रति न तो पेरेंट्स बहुत ज्यादा अवेयर हैं न ही स्टूडेंट्स अपनी क्षमता को समझकर कॅरियर का सही चुनाव कर पाते हैं। नतीजन करियर बिल्डिंग के वक्त स्टूडेंट्स के साथ ही पेरेंट्स भी पूरी तरह से कंफ्यूज हो जाते हैं। इस दुविधा से बचने के लिए एजुकेशन के दौरान ही कॅरियर के प्रति अवेयर और स्किल्स को समझना बहुत जरूरी होता है, जिसमें इंटेलिजेंस टेस्ट काफी महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं। सोमवार को दैनिक जागरण आई नेक्स्ट ऑफिस में आयोजित हुए पैनल डिस्कशन में स्कूलों के प्रिंसिपल्स ने भी यह माना कि इस तरह के टेस्ट से स्टूडेंट्स के इंटरेस्ट, इंटेलिजेंस और एप्टीट्यूड का पता चलता हैं जिसके आधार पर ही आगे जाकर कोई भी बच्चा अपने कॅरियर का निर्माण करता है।

यह रही मुख्य बातें

बच्चों के कॅरियर चुनाव के लिए पेरेंट्स को अपना स्टीरियो टाइप तोड़ना होगा।

एजुकेशन पॉलिसी में बदलाव व सुधार होना चाहिए।

स्टूडेंट्स को चाहिए कि वह अपने स्किल्स के हिसाब से कॅरियर चुने।

इंटेलिजेंस और एप्टीट्यूड को रेग्यूलर परखना चाहिए।

पेरेंट्स और बच्चों की बांडिंग अच्छी होनी चाहिए।

स्कूल्ज को लगातार काउंसलिंग कर पेरेंट्स को मोटिवेट करना चाहिए।

पेरेंट्स को चाहिए की वह अपने बच्चों को टाइम दें और उनके स्किल्स को समझें

इनका है कहना

बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए पेरेंट्स का इनवाल्वमेंट बेहद जरूरी है। स्कूल अकेले कुछ नहीं कर सकते हैं। पेरेंट्स बच्चों को टाइम देना शुरु करें। पेरेंट्स को बच्चे के इंटरेस्ट को जानना बहुत जरूरी है।

राहुल केसरवानी, सहोदय अध्यक्ष

स्कूलों में पीटीएम पेरेंट्स काउंसलिंग नहीं है, जबकि पेरेंट्स इसे मात्र यही समझते हैं। उनका माइंड सेट सिर्फ मा‌र्क्स तक ही सीमित है। जबकि बदलते वक्त के साथ उन्हें कॅरियर के बढ़ते फील्ड को स्कोप को समझना होगा।

एचएम राउत, प्रिंसिपल, दीवान पब्लिक स्कूल

सबसे पहले तो बच्चे खुद अपनी क्षमताओं को समझें और अपने स्किल्स के अनुसार खुद को फोकस करें। जो भी उन्होंने चुना है, उसे एक्सेप्ट करें और अपने पेरेंट्स को भी अपने डिसीजन को लेकर कनविंस करें।

रुचि शर्मा, प्रिंसिपल, दीवान पब्लिक स्कूल इंटरनेशनल

इंटेलिजेंस टेस्ट बच्चों के लिए बहुत जरूरी है। आज के समय में बच्चों को कॅरियर चुनने के लिए प्रॉपर गाइडेंस चाहिए। हर फील्ड में कॉम्पीटिशन बहुत ज्यादा हाई हैं। ऐसे टेस्ट बच्चों के लिए गाइड का काम करते हैं।

चंद्रलेखा जैन, प्रिंसिपल, सेंट जोंस सीनियर सेकेंडरी स्कूल

इस तरह के टेस्ट से बच्चों में छिपी हुई प्रतिभा सामने आती है। बच्चों की नॉलेज पॉवर पहचानने के लिए इस तरह के टेस्ट काफी हेल्पफुल रहते हैं। इन्हें स्पोर्ट करना चाहिए।

अल्पना शर्मा, प्रिंसिपल, सीजेडीएवी

काउंसलिंग बहुत जरूरी है। बच्चों के बारे में पेरेंट्स और स्कूल दोनों को ही अपना-अपना रोल समझना होगा। स्कूलों को बच्चों के प्रति पेरेंट्स बनकर सोचना होगा।

अजीत सिंह, डायरेक्टर, वेद इंटरनेशनल स्कूल

स्कूलों की नीति में बदलाव व सुधार होना चाहिए। एप्टीट्यूड टेस्ट बच्चों की साइकलॉजी समझने में मदद करते हैं। यह काफी हद तक बच्चों के लिए करियर काउंसलिंग के तौर पर बहुत स्पोर्टिव होते हैं।

संजय जैन, प्रिंसिपल, प्रेजीडेंसी पब्लिक स्कूल

पढाई से अलग इंटेलीजेंस टेस्ट बच्चों की क्षमता निखारने में काफी मदद करते हैं। इससे बच्चों को अपनी स्ट्रेंथ और वीकनेस के बारे में बहुत हद तक जानकारी मिल जाती है।

निधि मलिक, प्रिंसिपल, सेंट जेवियर व‌र्ल्ड स्कूल

इंटेलिजेंस टेस्ट बच्चों के लिए मोटिवेशन का काम करते हैं। बच्चों को पार्टिसिपेट करवाने के लिए पेरेंट्स को काफी अवेयर होना होगा। कॅरियर के लिहाज से यह बहुत बेहतर है।

विभा गुप्ता, प्रिंसिपल, शांति निकेतन

स्टूडेंट्स को उनकी क्षमताओं को समझने, अपनी नॉलेज को परखने के लिए इस तरह के टेस्ट में जरूर पार्टिसिपेट करना होगा। इससे उनको अपने स्किल्स की पहचान होती है और तैयारी का भी पता चलता है।

प्रीति मल्होत्रा, प्रिंसिपल, द आर्यस स्कूल

कॅरियर बिल्डिंग में अब स्टूडेंट्स के पास काफी ज्यादा ऑप्शन हैं। ऐसे में पेरेंट्स के साथ ही बच्चों को भी अपनी स्किल्स को समझकर ही करियर का चुनाव करना होगा। ऐसे टेस्ट इसमें मदद करते हैं।

पूनम शर्मा, प्रिंसिपल, जेएस एकेडमी

स्टूडेंट्स आज भी पेरेंटस की पसंद की कॅरियर का चुनाव करते हैं। प्रेशर से बच्चों का खुद का टेलेंट छिप जाता है। पेरेंट्स को ऐसे टेस्ट के जरिए बच्चों की प्रतिभा का आंकलन करना चाहिए।

सतीश शर्मा, प्रिंसिपल, शांति पब्लिक स्कूल

इंटेलिजेंस टेस्ट के प्रति पेरेंट्स का अवेयर होना बहुत जरूरी है। स्कूल इसमें अपना पूरा रोल निभाते हैं, लेकिन पेरेंट्स को चाहिए कि वह अपने इंट्रेस्ट को समझते हुए अपने हिसाब से विषयों का चुनाव करें।

करमेंदर सिंह, प्रिंसिपल, कालका पब्लिक स्कूल

बेसिक लेवल पर बच्चों की नॉलेज को समझने और उनकी स्किल्स को पहचानने के लिए यह टेस्ट काफी हेल्पफुल होते हैं। पेरेट्स को भी अब कॅरियर आप्शन के नए प्लेटफार्म के प्रति अवेयर होना होगा। यह टेस्ट इसमें महत्वपूर्ण रोल प्ले करते हैं।

वाघमिता त्यागी, वाइस प्रिंसिपल, गार्गी ग‌र्ल्स स्कूल

आई क्यू टेस्ट बच्चों की स्किल्स को समझने के लिए हेल्पिंग हैंड होते हैं। ऐसे टेस्ट बच्चों के बेस को मजबूत करते हैं और उन्हें उनकी क्षमताओं को समझने में मदद भी करते हैं।

डॉ। पूनम देवदत्त, करियर काउंसलर

इंटेलीजेंस टेस्ट बच्चों को गाइड करने के लिए इंडिकेटर्स का काम करते हैं.बच्चों की साइकोलॉजिकल नीड्स व उनके स्किल्स को डेवलप करने में इनका काफी महत्व होता है।

डॉ। विभा नागर, काउंसलर

इंटेलिजेंस टेस्ट बच्चों के कॅरियर पाथ को बिल्ड करने के लिए बहुत नीडफुल हैं। बदलते परिवेश में इन टेस्ट के जरिए ही बच्चे अपनी छिपी हुई प्रतिभा को बाहर निकाल पाते हैं।

सचिन चौधरी, कैरियर काउंसलर