सुरक्षा व्यवस्था राम भरोसे, सुधार का भी नहीं हो रहा प्रयास

एक साल पहले एक लाख रूपये से लगे थे 24 सीसीटीवी

Meerut. सुरक्षा और स्टाफ की हीलाहवाली को मद्देनजर रखते हुए जिला अस्पताल में लगाए गए सीसीटीवी मात्र शोपीस बनकर रहे गए हैं. जिसके बाद से अस्पताल और मरीजों की सुरक्षा पूरी तरह से राम भरोसे चल रही है.

24 कैमराें की नजर

जिला अस्पताल परिसर में करीब 24 कैमरे मरीजों की हिफाजत के लिए लगाए गए थे. इनमें दो कैमरे मेन गेट पर, एक ओपीडी के बाहर, चार से पांच कैमरे ओपीडी के अंदर, एक कैमरा मेल सर्जिकल वार्ड में, एक पीजीएस स्टोर के सामने, एक आइसोलेशन वार्ड के सामने, एक ऑपरेशन थियेटर, एक एसआईसी रूम में, तीन से चार एसआईसी ऑफिस परिसर में, एक इमरजेंसी के बाहर, दो से तीन इमरजेंसी के अंदर, डायालसिस यूनिट के बाहर आदि जगहों पर कैमरे लगाए गए थे लेकिन सभी कैमरे बंद पड़ हुए हैं. सीसीटीवी के सेटअप के लिए अस्पताल ने एक लाख से अधिक रूपये का बजट खर्च किया था.

यह है स्थिति

रख-रखाव सही न होने की वजह से यहां परिसर में लगे सभी कैमरे बंद पड़े हुए हैं. जबकि स्थिति यह है कि कई जगहों के कैमरों से शरारती तत्वों ने टायर और जरूरी उपकरण उखाड़ कर इन्हें खराब कर दिया है. अधिकतर कैमरों की वायर भी टूटी हुई हैं जबकि कुछ कैमरे खराब हो चुके हैं. ऐसे में अस्पताल में होने वाले हंगामों का कोई रिकार्ड अस्पताल नहीं रख पा रहा है. सीसीटीवी न होने की वजह से आएं दिन वाहन चोरी होने की घटनाएं भी बढ़ रही हैं.

कई बार हम कैमरे रिपयेर करवा चुके हैं लेकिन अस्पताल में बने रेजिडेंशियल एरिया में रहने वाले बच्चे परिसर में ही पतंग उड़ाते हैं. जिसके चलते मांझा सीसीटीवी के वायर में फंस जाता है और वायर टूट जाती है.

डॉ. सुनील कौशिक, सीएमएस, जिला अस्तपाल