हापुड़ से मेरठ लाई गई मासूम के इलाज में लापरवाही

जिला महिला अस्पताल में इलाज के दौरान कम हो रहा वजन

Meerut. 'बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ' का नारा लगाने वालों, नवरात्र में एक मासूम दो दिन से भूखी है! वो महज एक दिन की थी जब अभागी मां उसे गंदे कपड़े में लपेटकर हापुड़ के एक गांव में नहर के किनारे छोड़ गई. जिला बाल संरक्षण ईकाई ने उसे जिला महिला अस्पताल में भर्ती करा दिया, जहां देखभाल में कोताही बरती जा रही है.

ये है मामला

हापुड़ के सिंभावली थाना क्षेत्र के गांव रजापुर से निकल रही नहर के किनारे 28 सितंबर की सुबह गंदे कपड़ों में लिपटी एक नवजात बच्ची मिली. सूचना पर पुलिस भी मौके पर आई और बिना उपचार बच्ची को ग्राम प्रधान के हवाले कर दिया. प्रधान ने बच्ची को गांव की नेमवती को सौंप दिया. 9 अक्टूबर को पुलिस ने गांव से बच्ची को लाकर संरक्षण इकाई को सौंप दिया. इकाई ने बच्ची को उपचार के लिए जिला महिला अस्पताल एनआईसीयू (न्यू इंटेंशल केयर यूनिट) में भर्ती करा दिया.

नहीं हो रही केयर

शुक्रवार को जिला बाल संरक्षण ईकाई की प्रतिनिधि ने उप मुख्य परिवीक्षा अधिकारी मेरठ मंडल श्रवण कुमार गुप्ता को बताया कि बच्ची की देखरेख में घोर लापरवाही हो रही है. यहां तक कि उसको प्रॉपरली फीड भी नहीं कराया जा रहा है. डॉक्टर इसे बेशक सामान्य प्रक्रिया बता रहे हों किंतु सच्चाई भी उजागर हुई कि एनआईसीयू में भर्ती मासूम का वजन 4 दिनों में 100 ग्राम कम हुआ है. उसका वजन 1.400 किग्रा की है.

जिला बाल संरक्षण ईकाई हापुड़ की जानकारी के बाद बच्ची की देखभाल के लिए आशा ज्योति केंद्र की टीम को निर्देश दिए गए हैं. वहीं अस्पताल प्रशासन से भी बात की जा रही है.

श्रवण कुमार गुप्ता, उप मुख्य परिवीक्षा अधिकारी, मेरठ मंडल

बच्ची की देखभाल में कोई कोताही नहीं बरती जा रही है. एनआईसीयू में स्टाफ उसे रेगुलर फीड करा रहा है. जन्म के बाद बच्चे का वजन कम होता है.

डॉ. मनीषा, एसआईसी, जिला महिला अस्पताल