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LUCKNOW : केस-1:

करीब नौ साल पहले घर वालों की रजामंदी से शादी हुई। पति-पत्नी दोनों प्राइवेट कंपनी में काम करते थे। सब कुछ ठीक चल रहा था। तलाक की वजह बनी पत्नी का शॉपिंग पर आधा घंटा लेट पहुंचना। पति ने पत्नी को पांच बजे सहारागंज मॉल शॉपिंग के लिए बुलाया था, लेकिन ऑफिस में बिजी होने से पत्नी आधा घंटे लेट पहुंची। इस पर तकरार हुई और बात तलाक तक पहुंच गई। जबकि उनके दो बच्चे भी हैं। मामला कोर्ट में विचाराधीन है।

केस-2-
2006 में शादी हुई। ऐशबाग में रहने वाले पति-पत्नी दोनों नौकरी करते थे। उनके साथ काम करने वाला पत्नी का दोस्त भी रहता था। तीनों साथ ही खाना खाते थे। एक बार खाना खाते समय दोस्त ने पत्नी की बनाई सब्जी की तारीफ की तो पत्नी ने उसे और सब्जी लेने को कह दिया। बस यही बात पति को नागवार गुजरी और उसने पत्नी पर शक करना शुरू किया और दोस्त को भी घर से निकाल दिया। इसके कुछ दिन बाद पत्नी ने अपने पति को छोड़ दिया।

शक में तबाह  हो रहे  परिवार
समाज में रिश्तों की डोर कितनी कमजोर हो गई है उसका अंदाजा इन केसों से लगाया जा सकता है। सात जन्मों के रिश्ते पल भर के गुस्से और शक में तबाह हो रहे हैं। परिवार परामर्श केंद्र में ऐसे कई अजीबो गरीब केस आ रहे हैं। ऐसी ही कई वजहों के चलते दोनों परिवार परामर्श केंद्र पहुंच रहे हैं। जहां उनको रिश्तों के मायने बताकर टूटने से बचाया जा रहा है। ऐसे कई केस हैं जिसमें काउंसिलिंग करके रिश्तों की डोर को फिर से जोड़ा गया है। वहीं कई  केस कोर्ट में विचाराधीन हैं।

बस दे दिया तलाक
अक्सर लोग आवेश में आकर ऐसा फैसला कर लेते हैं जिससे उन्हें बाद में पछताना पड़ता है। चंद मिनट के गुस्से में किए गये फैसले परिवार और जिंदगी को तबाह कर देते हैं। कई बार खाने को लेकर, पति ने पत्नी के बीच मामूली बहस, पत्नी का मायके में रुक जाना, पति का ज्यादा पढ़ा न होना तलाक का कारण बन रहा है।

घातक है आज का कल्चर
जरा-जरा सी बातों पर होने लगे तलाक, शॉपिंग पर लेट पहुंचने पर दे रहे तलाक घातक है आज का कल्चर आज समाज में जिस तरह का कल्चर है, वो रिश्तों के लिए घातक बन रहा है। ऐसे तलाक देने की सबसे बड़ी वजह एक दूसरे के लिए समय न होना, परस्पर विश्वास की कमी, गुस्से पर कंट्रोल न करना आदि हैं। रिश्तों में जो भरोसा होना चाहिए वो नहीं है। इसकी मुख्य वजह लोग आज भौतिक सुख की कल्पना में जी रहे हैं। अच्छी नौकरी, गाड़ी, पैसा, घर ही देखा जाता है। रिश्ते से ज्यादा इनको महत्व दिया जाता है। भावनात्मक रिश्तों की कमी हो रही है। अगर लोग एक दूसरे के इमोशन को समझें तो यह समस्या दूर हो जाएगी। डॉ. देवाशीष, मनोचिकित्सक

दिखती है इगो प्राॅब्लम
ऐसे कई मामले परिवार परामर्श केंद्र में आते हैं। लोग जरा सी मामूली बात पर रिश्ते तोडऩे पर अमादा रहते हैं। परामर्श के दौरान अक्सर ईगो प्राब्लम की समस्या दिखाई देती है। सिर्फ लड़के ही नहीं लड़कियों में भी यह समस्या मिलती है। कई बार तो हम लोग महीनों काउंसिलिंग करके रिश्तों की अहमियत बताकर उसको टूटने से बचा लेते हैं, मगर कई बार ऐसा नहीं हो पाता है।  आर एम भटनागर, काउंसलर, परिवार परामर्श केंद्र

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