ईयर फोन लगाकर वाहन चलाने वालों पर सख्त हो गई है ट्रैफिक पुलिस

Meerut. टशन दिखाने के लिए युवा कभी खतरनाक सेल्फी लेते हैं तो कभी ईयर फोन लगाकर वाहन चलाते हैं. ट्रैफिक पुलिस का कहना है कि पिछले छह महीनों में ईयर फोन का इस्तेमाल सबसे ज्यादा सड़क हादसों का कारण बना है. इसी कारण शहर में अब लीड लगाकर वाहन चलाने वालो पर ट्रैफिक पुलिस नजर गढ़ाए हुए है.

पुलिस की नजर

टीएसआई मो. नदीम का कहना है कि ट्रैफिक पुलिस को सख्त हिदायत दी गई है कि ईयर फोन लगाकर बाइक या कार चलाने वाले चालक को किसी कीमत पर बख्शा न जाए. उनका तुंरत ही ई-चालान काटा जाए.

काटे गए चालान

टै्रफिक पुलिस का कहना है कि पिछले एक महीने में ई-चालान की संख्या भी बढ़ गई है. ट्रेमों व एंजिल टीम ने 1000 लोगों के ईयर फोन लगाकर वाहन चलाने पर ई-चालान काटे हैं.

लाइसेंस निरस्त

टीएसआई मो. नदीम का कहना है कि ईयर फोन लगाकर वाहन चलाने वालों का 100 रुपये का चालान काटा जाता है. अगर वह दूसरी बार ऐसा करते पाया जाता है तो उसका लाइसेंस निरस्त करने के लिए आरटीओ विभाग को पत्र लिखा जाता है. इस लेटर के बाद लाइसेंस निरस्त कर दिया जाता है.

आज का सवाल

क्या ईयरफोन लगाकर ड्राइविंग करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए. क्या है आपकी राय

ईयरफोन लगाकर ड्राइविंग करने वालों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए इससे दुर्घटना बहुत होती है.

विपिन शर्मा

यातायात नियमों का उल्लंघन करने पर वाकई कठोर कार्रवाई होनी चाहिए.

सुशील वर्मा

कार्रवाई करने से पहले इसे कानूनी चोला पहनाना जरूरी है. हमारे यहां ऐसा कोई कानून ही नही है जिससे कि ऐसे लोगो पर कार्रवाई की जाए. दूसरी बात यह की अगर कार्यवाही की जाए तो ऐसे लोगो के वाहन ही सीज कर देने चाहिए.

प्रियांक भारती

जो लोग ट्रैफिक नियमों को नहीं मानते हैं ऐसे लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए.

दीपक कुमार

ईयरफोन लगा कर गाड़ी चलाने वाले हर इंसान पर कार्यवाही होनी चाहिए चाहे वो स्कूल की गाड़ी चलाने वाले ड्राइवर हो या मोटर साइकिल पर ईयरफोन लगा कर चलने वाले विद्यार्थी. मोबाइल पर बात करते हुए या ईयरफोन लगा कर गाने सुनते हुए ड्राइव करने वालो का तुरंत चालान काटना चाहिए और स्टूडेंट्स को तो पनिशमेंट मिलना चाहिए.

जूही त्यागी

ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन पर होना तो बहुत कुछ चाहिए, पर होता कुछ नही .

संदीप सिंह

जी हां, ऐसे लोगों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए. जिससे दूसरे लोगों को सबक मिल सके.

हरीश बाधवा

ऐसे लोगों पर बिल्कुल सख्त कार्रवाई होनी चाहिए. जो हादसों के कारण बनते हैं.

रियाज

ईयरफोन लगाकर वाहन चलाना तो फैशन सा चल गया है. पूर्व में भी इसके गंभीर परिणाम देख चुके हैं. सुरक्षा के मानकों को लेकर जरूर कोई सख्त कदम उठाने चाहिए.

पंकज त्यागी

बिलकुल सख्त कार्रवाई होनी चाहिए आजकल ये ट्रेन्ड बन गया है सडकों पर लोग ईयरफोन लगा कर घूमते हैं जिस प्रकार हैलमेट ना पहनने पर चालान कटता है ईयरफोन पर भी यही नियम लागू हो.

अरूण शर्मा

इयरफोन ड्राइव के वक्त बैन होना चाहिए और ऐसा होने पर चालान काटना चाहिए. विद्यार्थी को तो इसके इस्तेमाल पर सजा का प्रावधान होना चाहिए. ऐसा कानून बन जाए तो लोगों मे खौफ सजा का रहेगा.

ममता मित्तल

ईयरफोन लगाकर वाहन चलाना

सिर्फ अपने लिये नहीं दूसरो के लिये भी जानलेवा है,इस पर सख्ती दिखाते हुए ऐसे करने वालों पर प्रशासन को कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए. इयरफोन की वजह से कई बड़ी घटनाएं हो चुकी हैं. इस बार कुशीनगर हादसे में मासूमों के अपनी जान देना पड़ी.

रवि कनौजिया

सड़क सुरक्षा सप्ताह को ठेंगा दिखा रही बंद सिग्नल लाइट्स

शहर के सभी प्रमुख चौराहों पर ट्रैफिक सिग्नल की हालत खस्ता

सड़क दुर्घटनाओं में कमी और वाहन चालकों को यातायात के नियमों के प्रति जागरुक करने के लिए इस सप्ताह देशभर में 29वां राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा सप्ताह मनाया जा रहा है. इस सप्ताह को कामयाब बनाने के लिए प्रशासन, परिवहन और एनजीओ के साथ-साथ स्कूल के बच्चे भी सड़कों पर उतरे हुए हैं.

लग रहा पलीता

एक तरफ सुरक्षा सप्ताह के तहत वाहन चालकों को यातायात नियमों का पालन करने के लिए जागरुक किया जा रहा है तो दूसरी तरफ चौराहों पर टै्रफिक सिग्नल्स की खस्ता हालत राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा सप्ताह में पलीता लगा रही है.

दौड़ रहे वाहन

इस सुरक्षा सप्ताह को सफल बनाने के लिए ट्रैफिक पुलिस शहर के सभी चौराहों और मार्गो पर पूरी तरह मुस्तैद है. जमकर चालान काटे जा रहे हैं और जुर्माना वसूला जा रहा है. लेकिन ट्रैफिक पुलिस शहर के किसी भी चौराहे पर ट्रैफिक सिग्नल लाइट को सुचारु नहीं कर पा रही है. इसी का नतीजा है कि शहर के चौराहों पर खराब सिग्नल लाइट के चलते वाहन चालक अपनी मर्जी से चौराहा पार यातायात नियमों को तोड़ रहे हैं.

दोपहर में ट्रैफिक

शहर के सभी चौराहों पर ट्रैफिक सिग्नल लाइट खराब पड़ी हैं. ऐसे में खुद ट्रैफिक पुलिसकर्मी या होमगार्ड की सुबह और शाम के समय ट्रैफिक संचालन की ड्यूटी लगा दी जाती हैं . लेकिन दोपहर के समय तेज धूप होते ही यह ड्यूटी ऑफ हो जाती है. वाहन चालक अपनी मर्जी से चौराहे पार करते हैं और हादसों को दावत देते हैं.

ट्रैफिक पुलिस की लाख कोशिशों के बाद भी यातायात सप्ताह दिखावा मात्र साबित हो रहा है.

नीरज पाल

शहर में कहीं भी रेड लाइट सुचारु नही हैं और हर समय चौराहे पर ट्रैफिक संचालन के लिए पुलिस कर्मी मौजूद नही होते. इस कारण से चौराहों पर अक्सर जाम के हालत बने रहते हैं.

अमित

अभियान केवल सीट बेल्ट और हेलमेट तक सीमित रहता है. जबकि यातायात के नियम आटो रिक्शा, ई रिक्शा, बस चालक धड़ल्ले से तोड़ते हैं. इन पर सख्त एक्शन होना चाहिए.

विष्णु