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JAMSHEDPUR: शहर के एमजीएम अस्पताल की तरह रेलवे हॉस्पिटल की हालत भी दयनीय है. आपको जानकर हैरानी होगी, रेलवे हॉस्पिटल बस चार डॉक्टरों के भरोसे चल रहा है. अस्पताल में बस सर्दी-खांसी और बुखार का इलाज हो सकता है. अन्य किसी भी चींज का इलाज उपलब्ध नहीं है. इसलिए वहां से मरीजों को रेफर करने बजाय कोई चारा नहीं रहता है. रेलवे हॉस्पिटल में लोगों को सुविधाओं के नाम पर कुछ नहीं मिलता है. हॉस्पिटल में डॉक्टरों के साथ साफ कर्मी भी नदारत रहते ौैं. मरीजों को भी सही वक्त पर दवायें उपलब्ध नही हो पाती है.

हालत है खस्ता

रेलवे हॉस्पिटल की हालत पूरी तरह से खस्ता है. रेलवे हॉस्पिटल में 12474 से ज्यादा रेलवे कर्मी और उनके आश्रितों की जिम्मेदारी है, पर हॉस्पिटल चार डॉक्टरों की भरोसे चल रहा है. एक ओपीडी में मरीजों को देखा जाता है, दूसरे ओपीडी सिर्फ नाम के लिए खुले हैं, आंख, कान, दांत विभाग भी ठीक रूप से नहीं चलता है. कागजों पर डॉक्टरों की ड्यूटी बांटी जाती है, पर यहां डॉक्टर नहीं मिलते हैं. अगर हम चक्रधरपुर रेल मंडल की बात करे तो 24 विभाग ऐसे है जिनमें एक भी डॉक्टर. इन विभाग में अगर कोई मरीज आ गया तो रेफर करने अलावा कोई उपाय नहीं है.

दो हॉस्पिटल एवं दस हेल्थ यूनिट के भरोसे हजारों पैसेंजर्स

हाजारों रेल कर्मी तथा उनके परिवारों तथा रेल यात्रियों के लिए मंडल में महज दो हॉस्पिटल तथा दस हेल्थ यूनिट है, जिसमें डिवीजनल रेलवे हॉस्पिटल चक्रधरपुर. सब डिवीजनल रेलवे हॉस्पिटल टाटानगर एव बंडामुंडा, हेल्थ यूनिट झारसुगड़ा, डंगवापोशी, लोको चक्रधरपुर, लोको टाटा एवं बंडामुंडा के शामिल है.

इन विभागों में डॉक्टर नहीं

गेस्ट्रोलॉजी, नेफरोलॉजी, न्यूरोलॉजी, फिजिएट्री, रेयूमेटोलॉजी, कार्डियोलॉजी, यूरोलॉजी, प्लास्टिक सर्जन, जीएल सर्जन, न्यूनेटॉजी, ऑनकोसर्जरी, पलमोनालॉजी, पेडिट्रीशियनस , न्यूरोलॉजी, आई ईएनटी, स्किन स्पेशलिस्ट, आर्थोपेडिक, पेडिट्रीशियन, रेडियोलॉजी, पैथोलॉजी, माईक्रोबाइलॉजी, हेमाटॉलाजी, इनड्रोकीनोलॉजी, रेडियोथेरेपी, के डॉक्टर चक्रधरपुर मंडल के रेल हॉस्पिटल एवं हेल्थ यूनिट में नहीं है.

पदाधिकारियों दी गई जानकारी

इस पर जब हमने अस्पताल प्रबंधक डॉ अलका डाडिल से बात की तो उन्होंने बताया की इस बारे चक्रधरपुर मंडल के वरीय पदाधिकारियों को जानकारी दी गई है. जल्द ही सुविधाएं दुरुस्त होंगे.

इसके लिए लगातार प्रयास किया जा रहा है, डॉक्टरों की इंटरव्यू लिया जा रही है. कांट्रेक्ट बेसिस पर हम डॉक्टर को लाना चाह रहे है. शहर की तथा बाहर डॉक्टरों को इंटरव्यू के इंवाइट किया जा रहा है. हॉस्पिटल में एसी लगाए जा रहे हैं. हाल में ही दो एंबुलेंस की भी व्यवस्था की गई थी. टाटानगर के लिए ज्यादा सोचना नही पड़ता है क्योंकि हमारा टाटा मेन हॉस्पिटल तथा ब्रम्हानंद हॉस्पिटल के साथ टाइएप है. किसी कर्मचारी को या यात्रियों को उपचार की जरुरत होती है जो रेलवे हॉस्पिटल में उपलब्ध नही है तो उन्हें टाटा मेन हॉस्पिटल तथा ब्रम्हानंद रेफर किया जाता है. अन्य जगहों के लिए भी प्रयास जारी है.

-भास्कर, सीनियर डीसीएम, चक्रधरपुर रेल मंडल