-सर्वे में बढ़े 162 एमडीआर पेशेंट, चिंतित स्वास्थ्य महकमा चलाने जा रहा अभियान -75 पेशेंट का हुआ इलाज, 62 ने छोड़ी दुनिया, प्राइवेट हॉस्पिटल्स छु़पा रहे हैं टीबी पेशेंट्स का डाटा varanasi@inext.inv VARANASI डिस्ट्रिक्ट में टीबी मरीजों की संख्याओं में इजाफा हुआ तो विभाग चिंतित हो गया. ऐसी सिचुएशन तब है जबकि बहुत से प्राइवेट हॉस्पिटल्स ने टीबी पेशेंट का डाटा छुपा रखा है. हेल्थ डिपार्टमेंट के सर्वे में टीबी के लगभग क्म्ख् एमडीआर पेशेंट मिले. साल ख्0क्म् में जिले में रजिस्टर्ड कुल ब्0फ्फ् मरीज थे. साल ख्0क्फ् से सितंबर ख्0क्7 तक एमडीआर के कुल म्97 नए पेशेंट मिले. जिनमें से 7भ् को इलाज से ठीक किया गया तो वहीं इनमें से म्ख् की डेथ हो गई. इसे देखते हुए महकमा ने दिसंबर माह से बनारस में टीबी मरीजों को खोजने के लिए एक विशेष अभियान चलाने की योजना बनाई है. ताकि नये पेशेंट को दवा के माध्यम से ठीक किया जा सके. क्फ्00 टीबी मरीजों की दी जानकारी गवर्नमेंट ने प्राइवेट हॉस्पिटल्स को भी टीबी मरीजों की संख्या अवेलेबल कराने का निर्देश दिया है. मगर, बहुत से प्राइवेट हॉस्पिटल्स टीबी पेशेंट की जानकारी डीटीओ को उपलब्ध नहीं करा रहे हैं. लास्ट ईयर लगभग क्फ्00 टीबी पेशेंट का डाटा मिला था, लेकिन इनकी संख्या दस हजार से अधिक बताई गई है. टीबी पेशेंट में बढ़ोत्तरी को देखते डीटीओ ने प्राइवेट डॉक्टर से अपील भी की है कि यदि वह टीबी के किसी मरीज का इलाज कर रहे हों तो इसकी सूचना जिला क्षय रोग विभाग को दें. अभियान में होगी ये टीम दिसंबर में चलने वाले अभियान में ब्0 पर्यवेक्षकों के अंतर्गत क्90 टीमें बनाई जा रही हैं. जिनको इस बीमारी के संवेदनशील मोहल्ले में घर-घर जा कर संदिग्ध रोगियों को खोजना होगा. अभियान में क्षय रोगियों की जल्द पहचान करके उनका इलाज शुरू करना व बीमारी को रोकने में मदद करना है. ट्यूबरक्लोसिस यानी टीबी एक संक्रामक रोग है जो मरीजों के खांसने और थूकने से फैलता है. टीबी की जांच, इलाज परामर्श व दवा आदि फ्री में दी जाती है. डॉ. केके ओझा, डीटीओ टीबी रोकथाम के लिए व्यवस्था डिस्ट्रिक्ट टीबी सेंटर के अलावा क्भ् टीबी सेंटर हैं. जिसमें 8 रूरल एरिया और 7 सिटी एरिया में हैं. इन सेंटर्स पर जांच के साथ परामर्श, दवा व इलाज की सुविधा उपलब्ध है. डिस्ट्रिक्ट में ब्भ् डीएमसी है जहां बलगम जांच की सुविधा उपलब्ध है. इसके साथ ही म्00 से अधिक डॉट्स प्रोवाइडर हैं जो पेशेंट को उनके घर तक जाकर देखरेख में दवा की खुराक देते हैं. क्या है एमडीआर जिन मरीजों में टीबी की प्राथमिक दवा का असर नहीं होता है. इस कंडीशन को मल्टी ड्रग रेजिस्टेंस या एमडीआर कहते हैं. भारत में 8ब्,000 एमडीआर के रोगी हैं लेकिन इनकी संख्या बढ़ती जा रही है और यह चिंता का कारण है. क्या है एक्सडीआर एक्सडीआर यानि एक्स्टेंसिवली ड्रग रेसिस्टेंट टीबी एमडीआर का ही खतरनाक रूप है. इसमें एमडीआर में दी जाने वाली दवा भी कारगर नहीं रहती. ऐसे में बहुत अधिक पावर वाली दवा देनी पड़ती है जिसका मरीज के अंगों पर गंभीर असर होता है. एक नजर ब्000 से अधिक हैं डिस्ट्रिक्ट में टीबी रोगी क्म्ख् से अधिक हैं एमडीआर पेशेंट ब्0 डीएमसी सेंटर है संचालित भ्00 है डॉट्स सेंटर क्0 एनजीओ भी कर रहे हैं काम