-योजना के तीन माह बाद भी टीबी मरीजों को नहीं मिली प्रोत्साहन राशि

-टीबी मरीजों के भरण पोषण के लिए 500 रूपया प्रतिमाह देने का है प्रावधान

टीबी मुक्त भारत के लिए सरकार बेहद गंभीर है. ज्यादा से ज्यादा मरीज को इलाज के लिए सरकारी हॉस्पिटल तक पहुंचे इसको लेकर सरकार ने उनके पुष्टाहार के लिए प्रोत्साहन राशि के रूप में पांच सौ रूपए प्रतिमाह देने देने की स्कीम बनाई है. इस योजना को लागू हुए तीन माह से ज्यादा हो गए है. लेकिन अफसोस की इसका लाभ अब तक एक मरीज को भी नहीं मिला है. सीधे तौर पर कहे तो पीएम मोदी के ड्रीम प्लान टीबी मुक्त भारत का सपना उनके संसदीय क्षेत्र में ही टूट रहा है. प्रोत्साहन राशि को लेकर यहां के अधिकारी भी गंभीर नहीं है. ऐसा तब है जब टीबी मरीजों ढूढ़ने के लिए बनारस में सोमवार से सर्च अभियान शुरु हो रहा है.

केस-1

अलईपुर निवासी राजकुमार वर्मा का कहना है कि चार माह पूर्व विभाग की ओर चलाए गए अभियान में जांच के दौरान उनमें टीबी की पुष्टी हुई थी. तभी से उनका इलाज चल रहा है. लेकिन उन्हें यह नहीं बताया गया कि उन्हें प्रोत्साहन राशि भी मिलेगा.

केस -2

कज्जाकपुरा निवासी फिरोज का कहना है कि 3 माह से टीबी का इलाज कराने के लिए मंडलीय हॉस्पिटल के टीबी विभाग में जाता हूं. आने जाने में काफी पैसा लग जाता है. 500 रुपए प्रोत्साहन राशि के लिए फार्म भरा है लेकिन अभी तक खाते में पैसा नहंी आया.

केस-3

शिवपुर निवासी प्रमोद जायसवाल मोटर वर्कशाप पर काम करते है. उन्हें टीबी है इलाज चल रहा है. लेकिन प्रोत्साहन राशि नहीं मिल रहा. इसके लिए कई बार शिकायत भी की है. लेकिन अभी तक खाते में पैसा नहीं पहुंचा. अधिकारी कहते है अभी समय लगेगा.

केस-4

लोहटिया के रहने वाले बिनोद बिंद का कहना है कि 500 रुपए तो दूर उन्हे ये भी नहंी पता है कि सरकार उनके लिए ऐसी कोई स्कीम भी चला रही है. अगर उन्हे इतना पैसा मिल जाए तो अस्पताल आने जाने का खर्च निकल आएगा.

क्या है प्रोत्साहन राशि

टीबी मरीजों को नियमित रूप से दवा लेने को प्रोत्साहित करने के लिए 500 रुपये हर महीने देने का प्रावधान है. स्कीम के तहत पुराने मरीजों का जितने महीने का इलाज बचा है, उतने महीने उन्हें पैसे दिए जाएंगे. जबकि नए को इलाज शुरू होते ही पैसे मिलने शुरू हो जाएंगे. पैसा सीधा मरीज के खाते में जाएगा. टीबी मरीजों का सही रिकॉर्ड एकत्र हो सके, इसके लिए डॉक्टरों को भी टीबी मरीज की पहचान करने पर 500 रुपये दिए जाने है. अगर वह मरीज का इलाज पूरा कर स्वास्थ्य विभाग को जानकारी देता है, तो उसे अतिरिक्त 500 रुपये दिए जाएंगे.

अब तक क्यों नहंी मिला लाभ

अधिकारियों का कहना हैं कि इस स्कीम का लाभ पाने के लिए बैंक खाता और आधार होना जरुरी है. मरीज अभी तक न तो अपना खाता नंबर दिये है न आधार. वहीं सूत्रों का कहना है कि विभाग ने अभी तक निक्षय पोर्टल पर सभी मरीजों का डेटा अपलोड नहीं किया है.

टीबी रोकथाम के लिए व्यवस्था

-डिस्ट्रिक्ट टीबी सेंटर के अलावा 15 टीबी सेंटर हैं. जिसमें 8 गा्रमीण व 7 शहरी क्षेत्र में हैं. यहां जांच, परामर्श, दवा व इलाज की सुविधा उपलब्ध है.

-डिस्ट्रिक्ट में 45 डीएमसी है जहां बलगम जांच की सुविधा उपलब्ध है. -600 से अधिक डॉट्स प्रोवाइडर हैं जो पेशेंट को उनके घर तक जाकर देखरेख में दवा की खुराक देते हैं.

एक नजर

4779

से अधिक हैं डिस्ट्रिक्ट में टीबी रोगी

167

पेशेंट पिछले साल चले तीन अभियान में चिन्हित हुए

162

से अधिक हैं एमडीआर पेशेंट

40

डीएमसी सेंटर है संचालित

500

है डॉट्स सेंटर

10

अभी मरीजों ने विभाग में खाता नंबर और पहचान पत्र सबमिट नहीं कराया है. बगैर इसके खाते में पैसा नहीं जा पाएगा. अगर निक्षय पोर्टल मरीजों का डेटा अपलोड नहीं हो रहा है तो उसकी जांच कराई जाएगी.

डॉ. वीबी सिंह, सीएमओ