लगाई गई 250 टीमें, दस फीसदी आबादी का लक्ष्य

48 घंटे में शुरू हो जाएगा मरीजों का इलाज, संभावित एरिया में होगी जांच

allahabad@inext.co.in

ALLAHABAD: टीबी के मरीज अक्सर सामने नही आते. समाज के डर से वह अपने रोग को छिपाकर रखते हैं तो कही जागरुकता के अभाव में रोगियों का इलाज देरी से शुरू होता है. यही कारण है कि यह बीमारी तेजी से सरकार की पकड़ से बाहर हो रही है. ऐसे में स्वास्थ्य विभाग ने तय किया है कि टीबी के मरीजों की घर-घर जाकर जांच की जाएगी. पता चलने पर उनका तत्काल इलाज शुरू करा दिया जाएगा.

एसीएफ के तहत चलेगा अभियान

सरकार की पहल पर एसीएफ यानी एक्टिव केस फाइडिंग योजना के तहत तकरीबन 250 टीमें जिले की कुल आबादी की दस फीसदी लक्ष्य तक अपनी अपनी पहुंच बनाएगी. यह विशेष अभियान 12 से 29 जून के बीच चलाया जाएगा. अगर रोगी का पता चलता है तो 48 घंटे के भीतर मरीज का इलाज शुरू करा दिया जाएगा. बता दें कि यह कार्यक्रम ग्रामीण और शहरी सहित 32 ट्रीटमेंट यूनिट पर चलेगा. जिले की दस फीसदी आबादी तकरीबन 6.8 लाख लोगों के घर पर टीमें जाएंगी.

पांच फीसदी मरीज मिलने की संभावना

कुल लक्षित जनसंख्या का पांच फीसदी टीबी के रोगियों की उम्मीद की जा रही है. घरों में जाकर लोगों को टीबी के लक्षणों की जानकारी दी जाएगी और इसके आधार पर रोगी का पता लगाया जाएगा. पता चलने पर इसकी जानकारी सुपरवाइजर को दी जाएगी. बताया गया कि जिले में शंकरगढ़, मांडा और कोरांव सहित ईट भट्टो के लेबर, मलिन बस्तियां, जेल कैप, पत्थर तोड़ने वाली जगह, वृद्ध आश्रम, अनाथालय वाली जगह, छोटी जगह पर ज्यादा आबादी, आदिवासी क्षेत्रों को अभियान को चिंहित किया गया है.

एक नजर में अभियान

- टीम में क्षय रोग विभाग के कार्यकर्ता सहित पोलियो कर्मी, तीन आंगनबाड़ी कार्यकत्री, आशा व एएनएम को शामिल किया गया है.

- पांच टीम पर एक सुपरवाइजर की तैनाती की गई है.

- अभियान 12 से 29 जून के बीच चलाया जाएगा.

- जिले की 68 लाख जनसंख्या के सापेक्ष 6.8 लाख आबादी को टारगेट किया गया है.

- चिंहित मरीजों का इलाज 48 घंटे के भीतर शुरू करा दिया जाएगा.

- डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के मुताबिक विश्व के 25 फीसदी टीबी के मरीज भारत में पाए जाते हैं और हर तीसरे मिनट में दो रोगी इस बीमारी के कारण मृत्यु का शिकार हो जाते हैं.

वर्जन..

सरकार की मंशा है कि देश को टीबी मुक्त बनाया जाएगा. इसी के तहत बड़ा अभियान चलाकर टीबी के मरीजों का पता लगाया जाएगा. जो मरीज किसी कारणवश सामने नही आ रहे, उनकी जांच कराकर इलाज शुरू करा दिया जाएगा.

डॉ. सीपी वर्मा, जिला क्षय रोग अधिकारी