7 सदस्यीय टीम 15 से 24 जुलाई तक करेगी मेरठ में सर्वे

रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशन सेंटर की टीम करेगी सर्वे, मास्टर प्लान 2031 की है तैयारी

अमृत योजना के तहत हो रहा शहर का सर्वे, एमडीए के निर्देशन में चलेगा अभियान

MEERUT। मेरठ में अवैध निर्माणों का डीमार्केशन शुरू हो रहा है। 15 से 24 जुलाई तक 7 सदस्यीय टीम मेरठ के एक-एक अवैध निर्माण की जांच करेगी और उसका डोजियर बनाकर शासन को सौंपेगी। मेरठ विकास प्राधिकरण उपाध्यक्ष राजेश कुमार पांडेय ने बताया कि उत्तर प्रदेश शासन के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशन सेंटर की टीम सर्वे का कार्य करेगी। सर्वे के दौरान प्राधिकरण की टीम भी साथ रहेगी।

महायोजना से पहले की कवायद

मेरठ को स्मार्ट सिटी बनाने का सपना बेशक पूरा नहीं हो सका किंतु सरकार ने शहर के डेवलेपमेंट के लिए प्लानिंग शुरू कर दी है। आगामी 10 वर्षो के विकास की रूपरेखा शासन स्तर पर तैयार हो रही है तो वहीं मास्टर प्लान 2031 इस बार कंप्यूटराज्ड और हाईटेक्नीक के जरिए बनाया जाएगा। मेरठ मास्टर प्लान 2031 को केंद्र सरकार की अमृत योजना के फंड से बनाया जा रहा है। इससे पूर्व शहर के एक-एक वैध-अवैध निर्माण का परीक्षण होगा। प्रदेश सरकार की रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशन सेंटर की टीम आगामी 15 जुलाई को मेरठ आ रही है, फील्ड सर्वे के लिए इस टीम में 7 परियोजना वैज्ञानिक अमित कुमार सिंह, प्रदीप तिवारी, श्रेष्ठ अग्रवाल, आशीष चंद्रा, रामकृष्णा, दर्शिका श्रीवास्वत और अंकिता शर्मा टीम में शामिल हैं। टीम 24 जुलाई तक मेरठ की एक-एक गली, एक-एक कॉलोनी का सर्वे करेगी।

ये होगा कार्य

2017 से पहले के अवैध निर्माणों को टीम सर्वे के दौरान चिह्नित करेगी।

अवैध कॉलोनियों का सिटी मास्टर प्लान और जोन बाउंड्री के डिजिटलाइजेशन समेत लैब कार्य को पूरा कर लिया गया है।

प्राधिकरण की ओर से टीम को गत दिनों सेटेलाइट इमेज भी उपलब्ध करा दी गई हैं।

सर्वे के बाद टीम अवैध कॉलोनियों, अवैध निर्माणों की मैपिंग करेगी

इन्हें गूगल मैप पर चिह्नित करने के साथ ही इनकी जियो टैगिंग करेगी।

इससे जन सामान्य को एक क्लिक में मेरठ की अवैध कॉलोनियों और निर्माणों के बारे में विस्तृत जानकारी मिलेगी।

मेरठ में अवैध निर्माणों के डीमार्केशन का कार्य 15 जुलाई से आरंभ हो रहा है। रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशन सेंटर की 7 सदस्यीय टीम 24 जुलाई तक मेरठ में अवैध कॉलोनियों और अवैध निर्माणों को सर्वे करेगी। मास्टर प्लान 2031, शहर के वैध-अवैध निर्माण चिह्नित होने के बाद ही बनेगा। अवैध निर्माणों की जियो टैगिंग भी टीम सर्वे के बाद करेगी।

राजेश कुमार पांडेय, उपाध्यक्ष, मेरठ विकास प्राधिकरण