रांची: झारखंड समेत बिहार, पश्चिम बंगाल, मध्यप्रदेश, हरियाणा और अन्य जगहों पर वाटर लेवल काफी नीचे चला गया है। इससे इन स्थानों पर पब्लिक में पानी के लिए मारामारी मची हुई है। उन्हें अपना जीवन यापन करना मुश्किल हो रहा है। सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड की इस रिपोर्ट के बाद काफी चिंता जताई जा रही है। अगस्त 2017 से अगस्त 2018 के दौरान इन राज्यों में दो मीटर यानि कि साढ़े छह फीट तक वाटर लेवल नीचे गिरा है। जिसके बाद बोर्ड ने देश भर में झारखंड समेत इन राज्यों के 72 लोकेशनों में एक्वीफायर जोन बनाने का निर्णय लिया है। ताकि गिरते जल स्तर को कम किया जा सके।

सूखने लगे अधिकतर कुएं

जानकारी के अनुसार सिर्फ कुआं ही नहीं, बोरवेल में भी जल स्तर कम हो रहा है। राजधानी रांची समेत, रामगढ़, धनबाद, संताल परगना के इलाके में वाटर लेवल तेजी से कम हो रहा है। रांची के मोरहाबादी, हटिया, कांके, हरमू और रातू इलाके में जल स्तर दो मीटर से छह मीटर तक कम हुआ है। इन इलाकों में कुएं के पानी का स्तर दो से चार मीटर तक कम हुआ है। अधिकतर कुएं गर्मी में सूखने लगे हैं। वहीं डीप बोरवेल की स्थिति भी एक वर्ष में बदल गयी है। अमूमन रांची में जहां 400 फीट तक के बोरवेल में एक इंच तक पीने के पानी का बेहतर स्त्रोत मिल जाता था। वह अब छह सौ फीट में भी नहीं मिल रहा है।

यहां अत्यधिक दोहन

झारखंड के धनबाद का झरिया इलाका, जमशेदपुर सदर, गोड्डा, चास, राजधानी रांची का कांके, रातू और मोरहाबादी इलाका अब भूमिगत जल के अत्यधिक दोहन की श्रेणी में शामिल हो गया है। राज्य के जल संसाधन विभाग की रिपोर्ट में कहा गया है कि ऐसी स्थिति अत्यधिक अपार्टमेंट बनने और बारिश के पानी का बेहतर भंडारन और पानी के रिचार्ज नहीं करने की वजह से उत्पन्न हुई है।