--10 शहरों में बनेगा अत्याधुनिक बस पोर्ट

--नेशनल इन्वेस्टर्स समिट में हुई चर्चा

-- पीपीपी मोड पर होगा निर्माण, शुरुआत बड़े शहरों से

- चार कंपनियों ने तैयार किया आठ शहरों का डीपीआर

- आइएसबीटी बना तो खर्च होंगे 900 करोड़ रुपये

रांची : झारखंड के 10 शहरों में अत्याधुनिक बस पोर्ट के निर्माण की दिशा में सरकार ने एक और कदम बढ़ाया है. पीपीपी मोड पर प्रस्तावित इस योजना पर 570 करोड़ रुपये की लागत आएगी. इससे इतर अगर रांची, धनबाद और जमशेदपुर में अंतरराज्यीय बस टर्मिनल (आइएसबीटी) का निर्माण होता है तो यह राशि बढ़कर 900 करोड़ रुपये हो सकती है. मंगलवार को होटल बीएनआर में आयोजित राष्ट्रीय निवेशक सम्मेलन में निवेशकों ने यह जानकारी दी. इस मौके पर बतौर मुख्य अतिथि शिरकत कर रहे नगर विकास एवं आवास विभाग के सचिव अजय कुमार सिंह ने प्रयोगात्मक तौर पर पोर्ट बनाने की कार्रवाई पहले रांची, धनबाद, मानगो जैसे बड़े शहरों में करने की नसीहत दी. इसकी सफलता का आकलन करने के बाद अन्य शहरों के लिए यह मसौदा तैयार करने को कहा.

चार कंसल्टेंट एजेंसियों की डीपीआर

बताते चलें कि धनबाद, मानगो, चाईबासा, गिरिडीह, फुसरो, मेदिनीनगर, दुमका, गोड्डा, सिमडेगा और दुमका के लिए चार कंसल्टेंट एजेंसियों ने डीपीआर तैयार किया है. सम्मेलन में झारखंड की निवेश नीति, पीपीपी मोड पर योजनाओं को मूर्त रूप देने में आ रही परेशानी, विभिन्न शहरों के बस पोर्ट के मॉडल, पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम आदि पर विभिन्न कंपनियों ने प्रजेंटेशन दिया. सम्मेलन में झारखंड अर्बन ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन लिमिटेड (जुटकोल), स्टेट अर्बन डेवलपमेंट एजेंसी के अलावा आरएस अग्रवाल इंफ्रास्ट्रक्चर प्रा. लिमिटेड, अभिजीत कंस्ट्रक्शन, मोदी प्रोजेक्ट्स लिमिटेड, सत्यम स्टील, हब टाउन, केपीएमजी, ग्लोबल आर्चर, पंचवटी ग्रुप आदि ने शिरकत की.

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पांच बार टेंडर, नहीं आया कोई

संबंधित 10 शहरों में बस पोर्ट के निर्माण के लिए अब तक जुटकोल द्वारा पांच बार टेंडर आमंत्रित किए जा चुके हैं, परंतु कोई भी कंपनी आगे नहीं है. नगर विकास एवं आवास विभाग के सचिव अजय कुमार सिंह ने खुद यह स्वीकार किया. उन्होंने कहा कि योजना के क्रियान्वयन से पूर्व यह सुनिश्चित कर लिया जाए कि कौन-कौन से ऐसे कारण है, जो परियोजना के लिए बाधक बन सकते हैं.

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पॉलिसी बदलेगी, डीपीआर भी बदलेगी

नगर विकास एवं आवास विभाग के सचिव ने यह स्पष्ट किया कि इंवेस्टर्स बस पोर्ट के निर्माण के क्षेत्र में आगे आएं, जरूरत पड़ी तो सरकार अपनी नीतियों में परिवर्तन करने को तैयार है. अगर डीपीआर में कहीं खामियां हैं, पोर्ट निर्माण के लिए चिह्नित जमीन बस पोर्ट के अनुकूल नहीं तो डीपीआर में संशोधन से भी गुरेज नहीं होगा. जुटकॉल के पास वर्तमान में दक्ष तकनीकी कर्मचारियों की कमी है, लिहाजा इस परियोजना का संचालन स्मार्ट सिटी कारपोरेशन की ओर से कराया जाएगा.

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गीता मंदिर बस पोर्ट का प्रेजेंटेशन, कंपनी ने किया सारे खर्च का वहन

मौके पर देश के आधुनिकतम बस अड्डों में से एक अहमदाबाद स्थित गीता मंदिर बस पोर्ट से संबंधित प्रजेंटेशन आइटीडीपी की ओर से दिया गया. भरत शाह ने बताया कि पीपीपी मोड पर विकसित इस पोर्ट के निर्माण पर वहां की सरकार को एक रुपये भी वहन नहीं करना पड़ा है. कंपनी ने एक निर्धारित अवधि के लिए उसका निर्माण किया है और उसे लीज पर लिया है. लागत राशि वसूल होने के बाद पोर्ट सरकार को सौंप दिया जाएगा. उन्होंने बताया कि संबंधित पोर्ट में चार हजार वर्गफीट में जहां पार्किंग की व्यवस्था है, वहीं पूछताछ और रिजर्वेशन के लिए 12 काउंटर बनाए गए हैं. चालकों के ठहरने, प्रतीक्षागृह, कैंटीन, चालकों के विश्राम स्थल आदि का भी निर्माण यहां किया गया है.

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