- ट्यूबवेल ऑपरेटर भर्ती परीक्षा पेपर लीक कांड

- ताबड़तोड़ छापेमारी में एसटीएफ ने पेपर लीक गैंग का किया राजफाश

- मोटी रकम ऐंठकर अभ्यर्थियों को मुहैया कराए थे पेपर

14.80 लाख रुपये नकद

3 आन्सर शीट

5 एडमिट कार्ड

13 मोबाइल फोन

एक बोलेरो जीप

- 08 जिलों में होनी थी परीक्षा

- 3210 पदों के लिए होनी थी भर्ती

- 205376 अभ्यर्थियों ने किए थे आवेदन

lucknow@inext.co.in
LUCKNOW: प्रदेश में पेपर लीक माफिया सरकारी सिस्टम में किस कदर पैठ बना चुका है, इसका खुलासा बीती रात मेरठ में हुआ. ट्यूबवेल ऑपरेटर की रविवार को होने वाली परीक्षा का ट्रेजरी में रखा पेपर माफिया के पास एक रात पहले ही पहुंच गया. माफिया ने मोटी रकम ऐंठकर पेपर अभ्यर्थियों को बांट भी दिया. हालांकि, सोशल मीडिया में पेपर वायरल होने के बाद परीक्षा को कैंसिल कर दिया गया. वहीं, मामले का खुलासा होने पर एक्टिव हुई यूपी एसटीएफ ने ताबड़तोड़ छापेमारी कर गैंग के सरगना समेत 11 आरोपियों को दबोच लिया. आरोपियों में पांच अभ्यर्थी भी शामिल हैं.

पार्क में तैयारी करा रहे थे
एसएसपी एसटीएफ अभिषेक सिंह के मुताबिक, शनिवार रात सूचना मिली कि पेपर लीक माफिया रविवार को प्रदेश के कई जिलों में आयोजित ट्यूबवेल ऑपरेटर भर्ती परीक्षा का पेपर मेरठ में लीक कराने में सफल हुआ है. जानकारी मिलने पर एसटीएफ मेरठ यूनिट टीम को एक्टिव किया गया. टीम ने छानबीन शुरू की तो पता चला कि पेपर लीक गैंग के सदस्य कैंट रेलवे स्टेशन के करीब उमराव एन्क्लेव के करीब पार्क में अभ्यर्थियों को लीक पेपर से तैयारी करा रहे हैं. टीम फौरन वहां पहुंची और पार्क में मौजूद 11 आरोपियों को दबोच लिया. टीम ने आरोपियों के कब्जे से 14.80 लाख रुपये नकद, 3 आन्सर शीट, 5 एडमिट कार्ड, 13 मोबाइल फोन व एक बोलेरो जीप बरामद की है.

लिया था तीन लाख एडवांस
दबोचे गए गैंग के सरगना सचिन ने शुरुआती पूछताछ में बताया कि वह प्राथमिक विद्यालय, अमरोहा में सहायक अध्यापक है. वह बीते दो साल से आयोजित होने वाली विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर आउट कराकर अभ्यार्थियों को भर्ती कराता आ रहा है. रविवार को आयोजित होने वाली ट्यूबवेल ऑपरेटर की भर्ती परीक्षा में उसने हर अभ्यार्थी से 3-3 लाख रुपये एडवांस वसूल किये थे. भर्ती होने के बाद हर सफल अभ्यर्थी से 4 लाख रूपये लेता था. इस तरह हर अभ्यर्थी से 7 लाख रुपये की डील होती थी. सरगना सचिन ने बताया कि अभ्यार्थियों को पेपर आउट होने के बाद उनके आन्सर की (प्रश्नों के उत्तर) देने के लिए मौके पर बुलाया था.

ट्रेजरी का नाम आते ही एसटीएफ बैकफुट पर
एसटीएफ सूत्रों के मुताबिक, सचिन ने टीम ने सामने कुबूल किया कि उसने बरामद पेपर को ट्रेजरी से आउट कराया था. हालांकि, ट्रेजरी से जुड़े अफसरों की मिलीभगत की बात सामने आने के बाद मेरठ जिला प्रशासन से लेकर राजधानी तक हड़कंप मच गया और एसटीएफ भी बैकफुट पर आ गई. जब इस बारे में एसटीएफ अधिकारियों से जानकारी मांगी गई तो उन्होंने जांच जारी होने की बात कही. उनका कहना था कि जांच पूरी होने के बाद ही पूरे नेटवर्क से पर्दा उठ सकेगा.

यह हुए अरेस्ट

नाम रोल

सचिन निवासी गंगानगर मेरठ सरगना

शुभम कुमार निवासी हापुड़ गैंग मेंबर

सुमित शर्मा निवासी हापुड़ गैंग मेंबर

परमीत सिंह निवासी मेरठ गैंग मेंबर

लोकेश निवासी सहारनपुर गैंग मेंबर

गौरव कुमार निवासी हापुड़ गैंग मेंबर

अंकित पाल निवासी मेरठ परीक्षार्थी

दीपक निवासी अमरोहा परीक्षार्थी

सुरेंद्र सिंह निवासी अमरोहा परीक्षार्थी

प्रदीप निवासी अमरोहा परीक्षार्थी

कपिल निवासी मेरठ परीक्षार्थी

अखिलेश ने ट्वीट कर कसा तंज
सपा सुप्रीमो और प्रदेश के पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने ट्यूबवेल ऑपरेटर भर्ती परीक्षा का पेपर लीक होने पर ट्वीट कर प्रदेश सरकार पर तंज कसा. उन्होंने लिखा कि 'एक बार फिर पेपर लीक और रद्द हुआ. इस बार ये कारनामा upsssc परीक्षा में हुआ. बार-बार विभिन्न परीक्षाओं के पेपर लीक होने से बेरोजगारों पर क्या गुजरती है, ये बात ये संवेदनहीन सरकार क्या जाने. ये प्रदेश में बढ़ रहे भ्रष्टाचार और सत्ताधारियों-अपराधियों की सांठगांठ का प्रमाण है.'