PATNA: सर्व शिक्षा अभियान में हिसाब किताब को दुरुस्त करने को लेकर सरकार सख्त हो गई है. वित्तीय व्यवस्था को दुरुस्त और पारदर्शी बनाने के लिए शुरू किए गए काम्प्रहेंसिव फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम (सीएफएमएस) वेबपोर्टल पर यदि समय पर खर्च का हिसाब किताब नहीं सौंपा गया तो इस वर्ष सर्वशिक्षा अभियान मद की राशि पर रोक लग सकती है. बिहार शिक्षा परियोजना परिषद की ओर से जिलों के कार्यक्रम पदाधिकारियों को इस संबंध में एक पत्र जारी किया गया है. परियोजना निदेशक संजय सिंह द्वारा कार्यक्रम पदाधिकारियों को भेजे पत्र में कहा गया है कि चालू वित्तीय वर्ष से वित्तीय लेन-देन के तमाम कार्य सीएफएमएस वेबपोर्टल के जरिए किए जाने हैं.

पोर्टल पर नहीं दर्ज है खर्च

सर्वशिक्षा अभियान के तहत नियोजित शिक्षकों का वेतन भुगतान भी इसके तहत ही किया जाना है. सिंह ने पूर्व की एक बैठक का हवाला देकर कहा है कि यह निर्देश दिए गए थे कि 25 मार्च 2018 तक शिक्षकों का पंजीयन और वित्तीय वर्ष 2017-18 में सर्वशिक्षा अभियान मद में प्राप्त राशि और खर्च का ?योरा भी संबंधित वेबपोर्टल पर कर दिया जाए. बावजूद बेगूसराय, किशनगंज, बांका, पूर्णिया, रोहतास, अरवल, मधेपुरा, सहरसा, शिवहर, गोपालगंज और लखीसराय जैसे जिलों को मिलाकर महज 36 हजार शिक्षकों का पंजीयन वेबपोर्टल पर किया गया है. जिलों ने बीते वर्ष के खर्च का हिसाब-किताब भी संबंधित पोर्टल पर दर्ज नहीं किया है.

पत्र भेज दी गई राशि रोकने की दी चेतावनी

पत्र में अधिकारियों को हिदायत देते हुए कहा है कि यदि कार्य में सुस्ती का आलम ऐसा ही रहा तो वर्ष 2018-19 में भारत सरकार से सर्वशिक्षा अभियान मद में मिलने वाले अनुदान पर रोक लगाई जा सकती है. परियोजना निदेशक ने जिलों के कार्यक्रम पदाधिकारियों को 31 मई तक की मोहलत देकर कहा है कि प्रत्येक जिले के शिक्षकों का पंजीयन सीएफएमएस पर करना सुनिश्चित किया जाए और खर्च का हिसाब-किताब भी दिया जाए.