क्रांतिधरा से जुड़ी हैं अटल जी की कई कहानियां, कई बार आए मेरठ

1965 में जिमखाना मैदान से लाल बहादुर शास्त्री सरकार को ललकारा था

हजारों साल नर्गिस अपनी बे-नूरी पे रोती है

बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदा-वर पैदा

meerut@inext.co.in
MEERUT
यकीनन बड़ी मुश्किल से पैदा होते हैं अटल जी जैसे विराट पुरूष, जिनका व्यक्तित्व समाज के लिए आदर्श बन जाता है. पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के जीवन की कहानियों के कई किस्से क्रांतिधरा से जुड़े रहे. हार नहीं मानूंगा, रार नहीं ठानूंगा, काल के कपाल पर लिखता, मिटाता हूं गीत नया गाता हूं, अटल जी की कविताएं आज भी मेरठवासियों के जेहन में ताजा है. गुरूवार को शाम 5 बजकर 5 मिनट पर जब सियासत के अजातशत्रु पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी ने दिल्ली के एम्स में जब आखिरी सांस ली तो मेरठ में शोक की लहर दौड़ गई. नम आंखों से देर रात्रि तक उन्हें श्रद्धांजलि देने का दौर चलता रहा.

1965 में आए थे पहली बार

दरअसल, अटल जी 1965 में मेरठ आए थे. इस दौर में भारतीय जनसंघ लाल बहादुर शास्त्री की सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के लिए समर्थन जुटा रहा था. दरअसल, सरकार ने पाकिस्तान के साथ समझौता किया था, इसके तहत कच्छ (राजस्थान) में करीब दो हजार वर्ग किलोमीटर का क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय ट्रिब्यूनल के दखल के बाद पाकिस्तान को सौंप दिया गया था. इसके खिलाफ समर्थन के लिए अटल को मेरठ भेजा गया. उस समय उनकी आयु करीब 40 वर्ष की रही होगी. उन्होंने सरकार के खिलाफ क्रांति का बिगुल फूंका. उनके उद्बोधन का ही असर था कि मेरठ से बड़ी संख्या में लोग 16 अगस्त 1965 को दिल्ली पहुंचे थे.


यूपी के सीएम का थे चेहरा

इसके बाद वाजपेयी 1974 के यूपी विधानसभा चुनावों में मेरठ के जिमखाना मैदान में आए थे. ये वह दौर था जब जनसंघ और भाजपा ने उन्हें यूपी के मुख्यमंत्री के तौर पर प्रोजेक्ट किया था और पूरे प्रदेश में उनके नाम के पोस्टर लगे हुए थे. उस समय का प्रचलित नारा था. 'अटल के सकल हाथों में होगी प्रदेश की बागडोर.' इसके बाद 1977 में विधानसभा भंग हो गई तो दोबारा से चुनाव होने थे. इस चुनाव के लिए वह फिर से मेरठ पहुंचे. इस दौर में कई पार्टियों ने विलय करके जनता पार्टी बनाई गई थी. जिसके लिए जनता में खूब जोश था. इसके बाद 9 फरवरी 2002 में मेरठ के विक्टोरिया पार्क में भाजपा व लोकदल प्रत्याशी के समर्थन में आयोजित रैली में पूर्व प्रधानमंत्री पहुंचे थे, इस मंच पर केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह के अलावा रालोद प्रमुख अजीत सिंह मौजूद थे.


जब बाजार से मंगाए थे समोसे

भारतीय जनसंघ के संस्थापक सदस्यों में मेरठ से शामिल 50 सदस्यों में से एक रामगोपाल (85 वर्ष) ने दैनिक जागरण आई नेक्स्ट को बताया कि मेरठ में सदस्यता अभियान मोहनलाल कपूर के नेतृत्व में चलाया गया था, 25 पैसा सदस्यता शुल्क भी उन्होंने अदा दिया था. एक संस्मरण को ताजा करते हुए उन्होंने कहा कि एक बार मेरठ आगमन के लिए अटल जी को मोहनलाल कपूर के नेतृत्व में भारतीय जनसंघ के कार्यकर्ता दिल्ली स्थित निवास पर गए थे. सभी रात्रि 10 बजे पहुंचे, बेहद भावुक अटल जी ने कहा कि सभी भूखे होंगे, भई! कुछ खाने पीने का बंदोबस्त करो. अटल जी के निर्देश पर अनुचर बाजार से समोसे लेकर आया था. उन्होंने बताया कि भारतीय जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी की प्रथम पुण्यतिथि पर मुंबई में आयोजित होने वाले कार्यक्रम में मेरठ के कार्यकर्ताओं के साथ आगरा में अटल जी से मुलाकात हुई थी. वे भी इस यात्रा में आगरा से मेरठ के कार्यकर्ताओं के साथ ही मुंबई पहुंचे थे.


चीन से थी चिंता

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत प्रचार प्रमुख अजय मित्तल ने बताया कि जुलाई 1965 में मेरठ में जीमखाना मैदान में आयोजित सभा में अटल जी ने तत्कालीन शास्त्री सरकार को आने वाले खतरे के लिए आगाह करते हुए अविलंब परमाणु हथियारों को बनाने के लिए कहा था. अटल जी ने शास्त्री सरकार पर निशाना साधते हुए मेरठ के मंच से 'फौज में हारी, कौम में हारी, हारी-हारी सरकार हमारी.' इसके बाद 23 सितंबर 1965 को हिंदुस्तान-पाकिस्तान का युद्ध शुरू हो गया था. उन्होंने चीन से देश को हमेशा चेताया था. शास्त्री सरकार द्वारा उसी दौरान देश की आ‌र्म्ड डिवीजन को समाप्त करने के फैसले का अटल जी ने विरोध किया था, हालांकि तत्काल बाद ही पाक से युद्ध शुरू होने के बाद यह फैसला लागू नहीं हो सका.


अजातशत्रु थे अटल जी

सांसद राजेंद्र अग्रवाल ने कहा कि 1965-66 में पिलखुवा की एक जनसभा में सर्वप्रथम अटल बिहारी वाजपेयी का भाषण सुना था. मथुरा में संघ प्रचारक रहते हुए कई बार अटल जी से पं. दीनदयाल उपाध्याय की जन्मस्थली फरह में मुलाकात हुई. अटल जी हर वर्ष फरह आते थे और मुझ जैसे छोटे कार्यकर्ता से भी बात करते थे. देश के विकास की आधारशिला अटल जी ने अपने प्रधानमंत्री कार्यकाल में रखी थी, कई केंद्रीय योजनाओं ने विकास की रूपरेखा खड़ी की थी. राजनीति के शिखर पुरुष अटल जी को शत-शत नमन.


युवाओं को देते थे सीख

आरएसएस के विभाग प्रचार प्रमुख डॉ. नीरज सिंघल ने संस्मरण को ताजा करते हुए कहा कि हरिद्वार में एक वर्ग के दौरान अटल जी का सानिध्य प्राप्त हुआ था. तय कार्यक्रम के तहत उन्हें वर्ग में बौद्धिक देना था. अपने उद्बोधन के दौरान अटल जी ने युवाओं का हौसला बढ़ाया था.

यह देश के लिए एक अपूर्णीय क्षति है. देश की आजादी के बाद उत्पन्न विषम परिस्थितियों में अटल जी ने विपक्ष में रहते हुए सरकार हो हमेशा सही मार्गदर्शन दिया.

शिवकुमार राणा, जिलाध्यक्ष, भाजपा

देश की राजनीति के शीर्ष स्तंभ नहीं रहे. बड़ौत के जैन कॉलेज के मैदान में हरियाणा के मुख्यमंत्री देवीलाल और अटल जी की जनसभा आयोजित कराने का अवसर प्राप्त हुआ था. लोकतंत्र और प्रजातंत्र में अटल जी का बेहद भरोसा था.

राजपाल सिंह, जिलाध्यक्ष, सपा