एक्सक्लूसिव

- सेशन शुरू होने के 5 महीने बाद भी प्राइमरी और जूनियर स्कूल के बच्चे कर रहे किताबों का इंतजार

- सिर्फ 60 फीसदी बच्चों को ही अब तक मिलीं किताबें, अक्टूबर में छमाही एग्जाम कराने की तैयारी

kanpur : सर्व शिक्षा अभियान के तहत सरकार हर साल करोड़ों रुपए बहा रही है। कोई बच्चा अशिक्षित न रहे, इसके हर संभव प्रयास भी किए जा रहे हैं। लेकिन शहर के प्राइमरी और जूनियर स्कूलों के हालात अभियान को मुंह चिढ़ा रहे हैं। 2017 का शिक्षा सत्र कानवेंट स्कूलों की तर्ज पर अप्रैल से शुरू तो कर दिया गया लेकिन पांच महीने बाद भी हजारों बच्चे किताबों का इंतजार कर रहे हैं। जबकि दूसरी ओर शिक्षा विभाग छमाही एग्जाम की तैयारी कर रहा है।

सर्व शिक्ष अभियान की हकीकत

अप्रैल महीने से शुरू हुए सत्र के बाद विभाग ने सभी स्कूलों में 25 जुलाई तक बुक्स का वितरण करने का दावा किया था। डेडलाइन बीतने के बाद भी सिर्फ 60 परसेंट बच्चों को ही किताबों बांटी जा सकी। 40 परसेंट बच्चों को आज तक सरकारी किताबें नहीं मिल सकी हैं। किताबे न होने का असर उनकी पढ़ाई पर पड़ रहा है।

पुरानी किताबों से पढ़ाया जा रहा

किताबों की कमी से टीचर्स बच्चों को पुरानी किताबों से ही पढ़ा रहे हैं। टीचर्स का कहना है कि किताबों का वितरण न हो पाने के चलते, जो बच्चे पास हुए थे उनकी किताबों से काम चलाया जा रहा है। किताबों के वितरण की जिम्मेदारी शिक्षा विभाग की बनती है, लेकिन अधिकारियों की लापरवाही से यह हालत हुई है।

अक्टूबर में छमाही एग्जाम

बीएसए ऑफिस के डिस्ट्रिक्ट क्वाडिनेटर प्रवीन पान्डेय के मुताबिक बच्चों की प्रगति देखने के लिए छमाही एग्जाम कराए जाते हैं, जो इस बार अक्टूबर महीने में कराए जा सकते हैं। एक्जाम में यह ध्यान रखा जाएगा कि बच्चों को जो पढ़ाया गया है उसी के आधार पर सवाल पूछे जाएंगे।

'' किताबों की उपलब्धता के आधार पर स्कूलों में वितरण सुनिश्चित किया जाता है। करीब 60 परसेंट स्कूलों में किताबों का वितरण कराया जा चुका है। अन्य बच्चों को भी जल्द मिल जाएंगी। बच्चों को जो पढ़ाया जाएगा, परीक्षा में उसी से संबंधित सवाल पूछे जाएंगे.''

जय सिंह, बीएसए, कानपुर

यह भी जान लीजिए

- सिटी में 1465 प्राइमरी स्कूल

- सिटी में 628 जूनियर स्कूल

- प्राइमरी के छात्रों की संख्या 1.5 लाख

- जूनियर क्लासेज के छात्रों की संख्या 50240