उनका ये भी कहना है कि वेलेंटाइन्स डे पर दिल जु़ड़ने से ज्यादा टूटते हैं। 'द ब्रोकन हार्ट्स सोसाइटी' के संस्थापक डॉक्टर वर्धन ने बीबीसी से बातचीत में उन्होंने कहा, ''बहुत सारे लोग इस दिन को 'प्रोपोजल डे' यानि प्रस्ताव रखने के दिन की तरह लेते हैं। इससे ज्यादा नुक्सान होता है। प्रस्ताव कई बार अस्वीकार हो जाते हैं और दिल टूट जाते हैं.''

उन्होंने कहा, ''लोगों की अपने प्रेमी या प्रेमिका से उम्मीदें बहुत बढ़ जाती हैं। जब वह इन पर खरा नहीं उतर पाते तो अक्सर दिल टूट जाते हैं.'' चंडीगढ़ में लड़कियों के एक सरकारी कालेज में समाज शास्त्र पढ़ाने वाले डॉक्टर वर्धन ने इस संस्था को साल 1991 में शुरु किया था।

उनका कहना है, ''उन (यानी वर्ष 1991 में) दिनों विश्वविद्यालय में हम पीएचडी कर रहे थे। हमारे दोस्तों में दो तीन लोग ऐसे थे जो टूटे दिल से पीड़ित थे। तब मैंने इस संस्था को शुरु किया और इसका पंजीकरण भी कराया.''

हमने उनसे पूछा कि आखिर क्यों टूटता है दिल? वर्धन जो 42-वर्ष के हैं, बताते हैं - ''कहते हैं कि किसी को इतना भी न चाहो कि सनम बेवफा हो जाए। बहुत सारी परिस्थितियों में एक तरफा प्यार होता है और जब दूसरी तरफ से कोई जवाब नहीं मिलता तब भी दिल टूट जाता है.''

दिल टूटे तो क्या करें?

तो दिल टूटने पर क्या करें? डॉक्टर वर्धन कहते हैं, ''किसी की सलाह लें और अपने दिल की बात को सांझा करें। आप हमारे पास भी आ सकते हैं.'' वर्धन का कहना है कि उनके पास टूटे दिल के लगभग 800 मामले आ चुके हैं और कई बार दिल जोड़ने में सफलता हासिल हुई है।

उनका कहना है कि टूटे दिल के मामले लड़के और लड़कियों के लगभग बराबर ही होते हैं। वे कहते हैं, ''हालांकि लड़कियां समझती हैं कि उनके ही दिल ज्यादा टूटते हैं और लड़के समझते है कि लड़कियों को कोई फर्क नहीं पड़ता, केवल लड़कों के ही दिल टूटते हैं.'' उन्होंने कहा कि सितंबर में वे टूटे दिल वालों के लिए एक कैंप भी लगाने जा रहे हैं।

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