- झमाझम बारिश शुरू होते ही शहर में आ गई जलप्रलय

- 90 फीसद इलाकों में जलभराव, जनता का भड़का गुस्सा

lucknow@inext.co.in

LUCKNOW

एक तरफ राजधानी को स्मार्ट बनाने के लिए बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, योजनाओं बनाई जा रही है लेकिन हकीकत यह है कि महज 8 से 10 घंटे की बारिश में ही शहर के 90 फीसदी इलाके तालाब में तब्दील हो जाते हैं और जनता घरों में कैद हो जाती है. निगम के जिम्मेदार अपनी लापरवाही पर पर्दा डालने के लिए उन कारणों को खोजने में जुट जाते हैं, जिससे इलाकों में जलभराव हुआ. एक बार फिर से जिम्मेदार नए सिरे से निर्देश जारी करते हैं, जो अगली बारिश में फिर से बह जाते हैं.

नाला सफाई पर सवाल

संडे रात से सोमवार दोपहर तक हुई तेज बारिश ने स्मार्ट लखनऊ की बदहाल तस्वीर सबके सामने ला दी है. वीआईपी एरिया से लेकर घनी बस्ती वाले इलाके भी जलमग्न हो गए. मंत्री आवास से लेकर मेयर के घर के सामने तक पानी भर गया. सबस्टेशनों में पानी भरने से लोगों को बिजली संकट का सामना भी करना पड़ा. जिससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि शहर में नाला सफाई किस स्तर पर की गई है.

कोई सुनने वाला नहीं

एक तरफ शहर की जनता जलभराव से त्राहिमाम करती रही, वहीं दूसरी तरफ जिम्मेदारों ने उनकी सुध नहीं ली. जिससे लोगों का दर्द बढ़ता गया. उम्मीदों के साथ बहुतों ने निगम का हेल्पलाइन नंबर मिलाया लेकिन नतीजा सिफर रहा. जनता ने पार्षदों से भी मदद की गुहार लगाई लेकिन वे भी कुछ न कर सके.

रात में स्थिति खराब

किसी तरह दिन तो कट गया, लेकिन अंधेरा छाते ही लोगों की मुश्किलें और बढ़ गई. हर तरफ पानी भरा होने से लोग समझ नहीं पा रहे थे कि वे मदद के लिए कहां जाएं. पुराने लखनऊ की गलियों का तो हाल और भी ज्यादा बुरा रहा.

निश्चित रूप से यह एक बड़ा सवाल है कि नाला सफाई के बाद इलाकों में जलभराव कैसे और क्यों हुआ. इसकी जांच कराई जाएगी. संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि हर हाल में जलभराव से निपटने के इंतजाम किए जाएं.

संयुक्ता भाटिया, मेयर