-1978 में बाढ़ बना चुकी है इतिहास, सर्वाधिक पहुंचा था जलस्तर

-इस साल भी बन रहे हैं आसार, बार-बार बढ़ रहा है जलस्तर

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ALLAHABAD: जिले में बाढ़ की मुसीबत नई नहीं है. 1948 से लेकर अभी तक नौ बार बाढ़ ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है. जिले को सबसे बड़ी विभीषिका 1978 में झेलनी पड़ी थी जब गंगा-यमुना का जलस्तर अपने सर्वोच्च पर पहुंचा था. इस साल भी भीषण बारिश और बार-बार जलस्तर बढ़ने से बाढ़ के आसार बन रहे हैं. आइए जानते हैं जिले में बाढ़ का इतिहास..

खतरे के निशान के आसपास रहती हैं नदियां

गंगा-यमुना का दोआबा क्षेत्र होने के चलते बारिश के मौसम में इलाहाबाद में बाढ़ का दबाव बनना आम बात है. संगम के आसपास नदियों का जलस्तर आसानी से खतरे के निशान पहुंच जाता है. लेकिन आजादी के बाद से अब तक नौ बार ऐसा हुआ है जब नदियां खतरे के निशान के काफी ऊपर पहुंची और जिले को भीषण बाढ़ का सामना करना पड़ा. ऐसे में हजारों गांव तबाह हो गए और करोड़ों के लागत की फसलें स्वाहा हो गई. बड़ी संख्या में लोग बेघर भी हो गए.

कब-कब आई भीषण बाढ़

1948, 1956, 1967, 1971, 1978, 1983, 2003, 2013, 2016

जानते हैं बाढ़ का इतिहास

वर्ष गंगा का जलस्तर यमुना का जलस्तर अनुमानित नुकसान

1978 88.39 मीटर 87.99 मीटर 7.82 करोड़ रुपए

1983 86.56 मीटर 86.73 मीटर 5.71 करोड़ रुपए

2003 85.98 मीटर 85.65 मीटर

2013 86.82 मीटर 86.60 मीटर

2016 86.16 मीटर 86.02 मीटर 10.05 करोड़ रुपए

सर्वाधिक प्रभावित होने वाले एरिया

गंगापार- सोरांव, फूलपुर, हंडिया

यमुनापार- करछना, बारा, मेजा व कोरांव

दोनों नदियों के बीच- इलाहाबाद शहर

बॉक्स..

जब थम गई थीं सांसें

शताब्दी की सबसे बड़ी बाढ़ 1978 में यमुना बैंक रोड से यमुना नदी का पानी शहर में प्रवेश करने से लोगों की सांस फूल गई थी. लोग घर छोड़कर भागने पर मजबूर थे. बक्शी बांध से भी जल रिसाव होने लगा था. इस बाढ़ में 5 हजार से अधिक घर क्षतिग्रस्त हो गए थे. इसी तरह 2013 में बक्शी बांध एसटीपी से लगे रिंग बांध के ढह जाने से भी अल्लापुर समेत कई एरिया के डूबने का खतरा उत्पन्न हो गया था. इस बाढ़ में आठ लाख लोगों का जीवन प्रभावित हुआ था.