- आरडीसी सेंटर में पड़ताल के बाद सामने आया सच

- विवाद के बाद मेडिकल जांच के लिए दो पक्षों को ले आई थी पुलिस

GORAKHPUR: जिला अस्पताल में मेडिकल रिपोर्ट बनवाने को लेकर असली और नकली का खेल चल रहा है. होमगार्ड और रेडियोलॉजिस्ट पर लगे आरोप की पड़ताल में ये खेल उजागर हुआ है. दैनिक जागरण आई नेक्स्ट को शिकायत मिली थी कि दो पक्षों के विवाद मामले में होमगार्ड ने रेडियोलॉजिस्ट की मदद से नकली मेडिको लीगल बनवाया. शिकायतकर्ता ने हमें असली और नकली रिपोर्ट की कॉपी भी मुहैया कराई जिसे लेकर दैनिक जागरण आई नेक्स्ट रिपोर्टर ने गुरुवार को इसकी पड़ताल की. जो हकीकत सामने आई वो चौंकाने वाली है. आरडीसी सेंटर से पता चला कि हाथ में फ्रैक्चर की असली रिपोर्ट को बदल नकली रिपोर्ट बना दी गई है.

दो रिपोर्ट, एक हैंडराइटिंग

जिला अस्पताल के आरडीसी सेंटर में मेडिकल रिपोर्ट के नाम पर बड़ा खेल हो रहा है. दैनिक जागरण आई नेक्स्ट के हाथ एक ऐसी रिपोर्ट लगी कि सभी को हैरत में डाल दिया. 20 नवंबर को बांसगांव एरिया में दो पक्षों में विवाद हो गया. विवाद के बाद दोनों पक्षों का पुलिस मेडिकल जांच कराने ले गई. लेकिन आरोप है कि दो रिपोर्ट जारी की गई. इसकी हकीकत जानने दैनिक जागरण आई नेक्स्ट टीम रिपोर्ट के साथ क्षेत्रीय निदान केंद्र पहुंची. जब जिम्मेदारों को मेडिकल रिपोर्ट दिखाई गई तो उनके होश उड़ गए. पहले तो नकली रिपोर्ट को असली बता दिया गया लेकिम जब दोनों मेडिकल रिपोर्ट सामने रखी गई तो सभी हैरान रहे गए. दोनों रिपोर्ट में डॉक्टर की एक ही राइटिंग थी. हस्ताक्षर भी एक जैसा दिख रहा था. एक रिपोर्ट को स्कैन कराया गया था तो दूसरी रिपोर्ट सही थी. दोनों रिपो‌र्ट्स एक ही व्यक्ति के नाम से बनी थीं.

नकली रिपोर्ट नॉर्मल, असली में चोट

जिला अस्पताल के रिकॉर्ड में जिस नाम से मेडिकल रिपोर्ट बनाई गई है वह बिल्कुल सही है लेकिन एक रिपोर्ट में नार्मल (एनएडी)और दूसरी रिपोर्ट में कंधे की जोड़ में चोट दिखाई गई है. शिकायतकर्ता ने रेडियोलॉजिस्ट पर फर्जी तरीके से मेडिकल रिपोर्ट बदलने का आरोप लगाया है.

बॉक्स

कहीं बिचौलिए तो नहीं बना रहे रिपोर्ट

जिला अस्पताल के जांच सेंटर पर मेडिकल रिपोर्ट बदलने का मामला पहली बार नहीं उठा है. कई बार जांच में सामने आ चुका है कि बिचौलिए पैसे लेकर रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं. सूत्रों की मानें तो इनकी यहां के जिम्मेदारों से अच्छी दोस्ती है. इसके बारे में आला अफसरों को भी खबर नहीं होती. इसका फायदा उठाकर मेडिकल रिपोर्ट में हेराफेरी की जाती है.

पर्दे के पीछे कई तिकड़म

जिला अस्पताल में हर रोज औसतन 20 से 25 मेडिकल रिपोर्ट बनाई जाती हैं. इनमें आधी मारपीट से जुड़ी होती हैं. सूत्रों की मानें तो इन मामलों में गंभीर धाराओं में केस दर्ज कराने के लिए मामूली जख्म रहने पर भी मेडिकल रिपोर्ट में संगीन दिखाने के लिए पर्दे के पीछे कई तिकड़म अपनाए जाते हैं. इस तरह की रिपोर्ट हासिल करने के लिए लोग हजारों रुपए खर्च करने से गुरेज नहीं करते. सूत्रों के अनुसार एक घायल की मेडिकल रिपोर्ट बनने के बाद दोबारा मेडिकल रिपोर्ट बनाई जाती है. आमतौर पर दूसरी रिपोर्ट में मामूली जख्म को भी गंभीर दिखाया जाता है. जांच होने के कारण ऐसे मामलों का खुलासा हुआ है.

ये था मामला

बांसगांव एरिया के जयंतीपुर के रहने वाले विवेक साहनी पुत्र मोहन साहनी और गांव के ही संतोष यादव पुत्र दयाशंकर यादव के बीच 19 नवंबर 2018 को किसी बात को लेकर विवाद हो गया. बांसगांव की पुलिस दोनों को थाने लेकर पहुंची. पुलिस ने मामला दर्ज कर होमगार्ड के साथ दोनों को बांसगांव स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भेज दिया. यहां से डॉक्टर्स ने उन्हें जिला अस्पताल भेजा. 20 नवंबर को जिला अस्पताल के आरडीसी सेंटर में होमगार्ड के सामने विवेक साहनी और संतोष यादव का मेडिकल परीक्षण किया गया. विवेक के भाई बृजेश साहनी का आरोप है कि मेडिकल रिपोर्ट दोनों का सामान्य था जिसकी रिपोर्ट मिल चुकी हैं. संतोष यादव के नाम से दो मेडिकल रिपोर्ट हैं. पहले की नार्मल रिपोर्ट तो दूसरी रिपोर्ट में कंधे में चोट दिखाई गई है.

वर्जन

अभी शिकायती पत्र नहीं मिला है. अगर मेडिकल रिपोर्ट में फर्जीवाड़ा किया गया है तो गलत है. पत्र मिलने के बाद मामले की जांच कराई जाएगी. जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.

- डॉ. श्रीकांत तिवारी, सीएमओ

यह मामला मेरे संज्ञान में नहीं है. शिकायत मिलने के बाद उसकी जांच कराई जाएगी. मेडिकल रिपोर्ट में गड़बड़ी है तो दोबारा जांच कराई जाएगी.

- डॉ. आरके गुप्ता, एसआईसी महिला अस्पताल