रेवेन्यू और रजिस्ट्री विभाग के पास नहीं है मालिकों का ब्योरा

MEERUT। जमींदारी विनाश अधिनियम के बाद मेरठ में संपत्तियों का जमकर बंदरबाट हुआ तो वहीं ऐतिहासिक कबाड़ी बाजार के ऊपरी हिस्सों में स्थित नाचघरों पर 1950 में नगरबधुएं काबिज हो गई। तब से लेकर आज तक कबाड़ी बाजार के कोठों के मालिकाना हक को सरकारी दस्तावेजों में लेकर विवाद है। किंतु मौके जो काबिज है कोठा उसी का है। पड़ताल में निकलकर आया कि एक-एक कोठे की कीमत आज की डेट में 50 लाख रुपए तक है, तो वहीं फर्जी तरीके से पॉवर ऑफ अटार्नी के नाम पर खरीद-फरोख्त हो रही थी। वहीं, सिटी मजिस्ट्रेट ने बताया कि कुल 55 कोठों को नोटिस जारी किए गए हैं। 15 कोठों को सील कर दिया गया है। बाकी कोठों को भी जल्द सील किया जाएगा।

जो काबिज, वहीं मालिक

बीते बुधवार को कोठों को सील करने के दौरान पुलिस-प्रशासन के समक्ष कई ऐसे दावेदार आए थे, जिन्होंने कोठे को अपना बताया। प्रशासन ने दस्तावेज पेश करने के लिए कहा तो वे 100 रुपए के स्टांप पर पॉवर ऑफ अटार्नी दिखाने लगे। प्रशासन ने जिसकी प्रमाणिकता को खारिज कर दिया। वहीं, कार्रवाई में प्रशासनिक अधिकारियों ने काबिज को मालिक माना है तो वहीं रेवेन्यू रिकार्ड में भी इन कोठों के मालिकाना हक को लेकर स्थिति साफ नहीं है।

नहीं है रिकार्ड

दरअसल, सब रजिस्ट्रार कार्यालय 2 के परिक्षेत्र में आ रहे कबाड़ी बाजार में पिछले 10 साल से किसी भी खरीद-फरोख्त की रजिस्ट्री नहीं हुई है। जबकि पुलिस के सामने जो पॉवर ऑफ अटार्नी कथित मालिकों ने रखीं थीं वे गत 3 वर्षो के अंतराल की थीं। स्पष्ट है कि पॉवर ऑफ अटार्नी को रजिस्टर्ड कराए बिना इन कोठों की खरीद-फरोख्त हो रही है तो वहीं स्टाम्प चोरी का प्रकरण भी उजागर हो रहा है। तहसील सदर के रेवेन्यू रिकार्ड में भी इन कोठों के मालिकान का रिकार्ड नहीं है। यदि जमींदारी विनाश अधिनियम से पूर्व का कोई रिकार्ड होगा भी तो वो गैर कम्प्यूटराइज्ड होगा।

50 लाख रुपए तक कीमत

मेरठ के रेड लाइट एरिया कबाड़ी बाजार में संपत्तियों के दाम आसमान छू रहे हैं। यहां 6 फीट चौड़ा और 20 लंबे कोठे की कीमत 50 लाख रुपए तक बताई जा रही है। वहीं बिजली का कनेक्शन, हाउस टैक्स, वाटर बिल भी काबिज के नाम पर आ रहे हैं और वे ही उसे अदा कर रहे हैं।

लीज डीड नहीं हुए रिन्यू

जमींदारी विनाश अधिनियम के बाद इन कोठों के मूल मालिकान ने 99 साल की लीज पर कोठों को किराएदार को सौंप दिया। तफ्तीश में निकलकर आया कि यहां किसी भी संपत्ति की लीज को रिन्यू नहीं कराया गया है। जानकारी में यह भी निकलकर आया कि कुछ संपत्तियों की मालिक सरकार भी है। इन संपत्तियों पर काबिज लोग रेवेन्यू विभाग में मामूली किराया भी जमा कर रहे हैं।

जमींदारी विनाश अधिनियम से पहले का रिकार्ड गैर कम्प्यूटराइज्ड है। जबकि उसके बाद के रिकार्ड को कम्प्यूटराइज्ड किया गया है। कबाड़ी बाजार की संपत्तियों के मूल वरिसान का रिकार्ड नहीं मिल रहा है। खसरा के आधार पर मालिकान की तलाश की जाएगी।

अभय सिंह, तहसीलदार, सदर

कबाड़ी बाजार क्षेत्र में गत वर्षो में संपत्ति के खरीद-फरोख्त के प्रकरण सब रजिस्ट्रार कार्यालय में नहीं आए हैं। यदि खरीद-फरोख्त हो रही है तो उसकी जांच कराई जाएगी।

देवेंद्र प्रताप, सब रजिस्ट्रार, सब रजिस्ट्रार परिक्षेत्र द्वितीय

कोठों पर काबिज के खिलाफ नोटिस जारी किए हैं और उसी आधार पर कोठों को सील किया जा रहा है। यदि कोई और मालिकान है तो वो अपने दस्तावेज जिला प्रशासन को सौंपे। हाईकोर्ट के निर्देशन में कार्रवाई को अंजाम दिया जा रहा है।

संजय कुमार पाण्डेय, सिटी मजिस्ट्रेट, मेरठ