पहली मानसूनी बारिश का शहर के लोगों ने जमकर उठाया आनंद

15 से 20 जून तक ही यूपी में entry की जताई गई थी उम्मीद

last year 05 से 10 जुलाई के बीच आया था मानसून

vikash.gupta@inext.co.in

ALLAHABAD: मानसून ने आखिरकार गुरुवार को दस्तक दे ही दी. दस्तक भी क्या खूब दी. शाम को जब बदरा बरसने शुरू हुए तो फिर झूम के बरसे और कई दिनों से उमस व गर्मी झेल रहे इलाहाबादियों का तम-मन सब भिगो दिया.

24 घंटे में एक हजार किलोमीटर

इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में आटोमेटिक वेदर सेंटर के प्रोफेसर सुनीत द्विवेदी ने बताया कि अरब सागर से होकर आने वाली हवाओं और बंगाल की खाड़ी से होकर आने वाली मानसूनी हवाओं ने मैदानी भाग में पैठ जमा ली है. बारिश शुरू हो गई जो अभी कुछ दिन बनी रहेगी. करेंट में 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से मानसून आगे बढ़ रहा है और एक दिन में तकरीबन 01 हजार किलोमीटर का सफर तय कर रहा है.

इस साल होगी बेहतर बारिश

प्रो. सुनीत द्विवेदी ने बताया कि मुम्बई की ओर से आने वाला मानसून लोकल एरिया को कवर करते हुये दिल्ली और राजस्थान की ओर मूव करेगा. जुलाई के पहले सप्ताह में पूरा एरिया कवर होना तय है. साल 2013, 2014 और 2015 यूपी में मानसून के लिहाज से अच्छे नहीं रहे. वर्ष 2016 में जरूर अच्छी बरसात हुई. करेंट ईयर पिछले कुछ सालों के सबसे बेहतर साल में एक होने जा रहा है.

100 दिन 40 पार पारा

अच्छे मानसून का बड़ा कारण लम्बे समय तक पूरी तारतम्यता के साथ पड़ी गर्मी को माना जा रहा है. इसकी शुरूआत मार्च के शुरूआती दिनों में ही हो गई थी. विशेषज्ञों का कहना है कि अमूमन पिछले कुछ वर्षो में अप्रैल से ही गर्मी का आगाज होता था. इस बार मार्च खत्म होते ही गर्मी ने टॉप गेयर लगा दिया. मई वाली गर्मी अप्रैल में ही पड़ गई. मार्च, अप्रैल और मई में लगातार पारा 40 डिग्री सेल्सियस या इससे ऊपर रहा. विशेषज्ञों का कहना है कि साल 2017 में टाईम ड्यूरेशन को देखें तो मार्च से जून तक की अवधि में लगभग 100 से ज्यादा दिनो तक 40 डिग्री या इससे अधिक पारा रहा है जोकि अपने आप में एक रिकार्ड है.

राजस्थान से होगी विदाई

इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में ज्योग्राफी डिपार्टमेंट के प्रो. बीएन मिश्रा ने बताया कि देश में मानसून का सीजन चार महीनों का होता है. मई के दूसरे सप्ताह में बंगाल की खाड़ी में स्थित अंडमान निकोबार द्वीप समूह में मानसून दस्तक देता है और एक जून तक केरल में मानसून के आगमन का समय निर्धारित होता है. मानसूनी हवायें बंगाल की खाड़ी से आगे बढ़ती हैं और हिमालय से टकराकर वापस लौटते हुए उत्तर भारत के मैदानी इलाकों को भिगोती हैं. केरल में मानसून जून के शुरू में दस्तक देता है और अक्टूबर तक करीब पांच महीने रहता है. जबकि राजस्थान में सिर्फ डेढ़ महीने ही मानसूनी बारिश होती है. वहीं से मानसून की विदाई भी होती है.

ऐसे सक्रिय होती हैं मानसूनी हवायें

ग्रीष्म ऋतु में जब हिन्द महासागर में सूर्य विषुवत रेखा के ठीक ऊपर होता है तो मानसून बनता है. इस प्रक्रिया में समुद्र गरमाने लगता है और उसका तापमान 30 डिग्री तक पहुंच जाता है. इस दौरान धरती का तापमान 45 से 46 डिग्री तक पहुंच चुका होता है. ऐसी स्थिति में हिन्द महासागर के दक्षिणी हिस्से में मानसूनी हवाएं सक्रिय होती हैं. ये हवाएं आपस में क्रॉस करते हुए विषुवत रेखा पार कर एशिया की तरफ बढ़ने लगती हैं. इसी दौरान समुद्र के ऊपर बादलों के बनने की प्रक्रिया शुरू होती है. विषुवत रेखा पार करके हवाएं और बादल बारिश करते हुए बंगाल की खाड़ी और अरब सागर का रुख करती हैं. इस दौरान देश के तमाम हिस्सों का तापमान समुद्र तल के तापमान से अधिक हो जाता है. ऐसी स्थिति में हवाएं समुद्र से जमीन की ओर बहनी शुरू हो जाती हैं. ये हवाएं समुद्र के जल के वाष्पन से उत्पन्न जल वाष्प को सोख लेती हैं और पृथ्वी पर आते ही ऊपर उठती हैं और वर्षा करती हैं.

..और होती है झमाझम

बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में पहुंचने के बाद मानसूनी हवाएं दो शाखाओं में विभाजित हो जाती हैं. एक शाखा अरब सागर की तरफ से मुंबई, गुजरात, राजस्थान होते हुए आगे बढ़ती है तो दूसरी शाखा बंगाल की खाड़ी से पश्चिम बंगाल, बिहार पूर्वोत्तर होते हुए हिमालय से टकराकर गंगीय क्षेत्रों की ओर मुड़ जाती हैं. इस प्रकार जुलाई के पहले सप्ताह तक पूरे देश में झमाझम पानी बरसने लगता है.

यूपी में मानसून की इंट्री क्भ् जून थी. लेकिन साउथ इंडिया से आगे बढ़ने में मानसूनी हवाओं को दिक्कत हो रही थी. बाधा अब हट चुकी है. लोकल एरिया में मानसून का आगमन दस दिन लेट हुआ है. उड़ीसा की ओर से आने वाली शाखा भी काफी मजबूत नजर आ रही है.

प्रो. सुनीत द्विवेदी, आटोमेटिक वेदर सेंटर, इलाहाबाद यूनिवर्सिटी