सावन के पहले सोमवार को गहरेबाजी देखकर रोमांचित हुए शहरी

प्रयाग गहरेबाजी संघ के अध्यक्ष बदरे आलम ने किया शुभारंभ

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ALLAHABAD: हट जाओ भाई, बहुतै तेज कदमताल है मान जाओ भाई मान जाओ. बारिश भी होय रही है. इन शब्दों के बाण के बीच सावन के पहले सोमवार को शहर की अति प्राचीन परंपरा गहरेबाजी का आगाज हुआ. इसका नजारा देखने के लिए रिमझिम बारिश के बीच शाम चार बजे से ही मेडिकल कालेज चौराहे से लेकर सीएमपी डिग्री कालेज की सड़क की दोनों पटरी पर शहरियों का मजमा लगा हुआ था. प्रयाग गहरेबाजी संघ के अध्यक्ष बदरे आलम ने जैसे ही गंगा जमुनी तहजीब की परंपरा का निर्वाह करते हुए शुरू करो का नारा लगवाया वैसे ही एक के पीछे एक गहरेबाजों ने अपने-अपने घोड़ों की रफ्तार को लगाम से हांकना शुरू कर दिया.

कन्हैया और चूहा की बाजीगरी

गहरेबाजी के लिए गोपाल महाराज का सुल्तान व चूहा, बदरे आलम का कन्हैया, अटाला के जमाल का अबलक, गुड्डू केसरिया का बादामी व बेली के सादिक का पचकल्याण नाम जैसे घोड़ों ने रफ्तार की बाजीगरी दिखानी शुरू की. मेडिकल कालेज चौराहे से लेकर सीएमपी तक कन्हैया व चूहा एक के पीछे एक कदम ताल करते हुए आगे बढ़ रहे थे. दर्शकों ने भी उनका खूब उत्साहवर्धन किया.

किसी ने तीन तो किसी का चार राउंड

मेडिकल से लेकर सीएमपी के बीच आठ सौ मीटर की दूरी आने और जाने के बाद गहरेबाजों ने अपने-अपने घोड़ों के साथ तीन से चार राउंड तक कदमताल किया. हालांकि प्रशासन के निर्देश की वजह से गहरेबाजों के आगे एक भी गहरेबाज के समर्थक अपनी गाडि़यों के साथ नहीं दिखे.