एक नजर उन खास शब्दों पर जो हर ब्लास्ट के बाद कभी नेता, कभी मिनिस्टर्स तो कभी पुलिस और इंटेलीजेंस ऑफिसर्स हर दफा यूज करते आए हैं. ये वो शब्द हैं जो ‘कामन मैन’ की तकलीफ को कहीं से कम नहीं करते है.

blast के बाद साहबों के 10 common बहाने

‘Medium-intensity blast’

अक्सर ब्लास्ट के बाद पुलिस और इंटेलीजेंस ऑफिसर्स कहते हैं ‘ये एक लो इंटेसिटी ब्लास्ट था’ या ‘ये एक मीडियम इंटेसिटी’ ब्लास्ट था वगैरह वगैरह. ये अलग बात है कि ब्लास्ट की इंटेसिटी से पब्लिक कोई फर्क नहीं पड़ता है क्योंकि उनका अपना इंटेसिटी हाई हो या लो, दोनों में ही मारा जाता है.

’High alert’
ब्लास्ट के बाद देश के सभी शहरों और राज्यों में ‘हाई एलर्ट’ डिक्लेयर कर दिया है. ‘हाई एलर्ट’ वर्ड का यूज हर नए ब्लास्ट के बाद गवर्नमेंट की तरफ से किया जाता है. ये अलग बात है कि जनता को भी नहीं मालूम कि इस ‘हाई अलर्ट’ वर्ड का मतलब वाकई में क्या होता है.

‘A cowardly/dastardly act’

‘ये ब्लास्ट कायरता में उठाया गया  एक कदम था’, हर ब्लास्ट के बाद टेररिस्ट्स को कायर बताने और मुंहतोड़ जवाब देने का सिलसिला भी पिछले कई सालों से चला आ रहा है.

‘Bring this act to justice’

‘ब्लास्ट के पीछे जो लोग जिम्मेदार हैं, हम जल्द ही उन्हें सामने लेकर आएंगे.’ हर ब्लास्ट के बाद वादे तो किए गए, लेकिन असलियत सबको मालूम है. अभी तक जो लोग पकड़े गए हैं उन्हें जनता आसानी से उंगलियों पर गिन सकती है और जिन्हें सजा मिली है उनके बारे में भी जवाब दे सकती है.

’Review’ security’
ब्लास्ट के बाद हर जगह की सिक्योरिटी रिव्यू करने और उसे पहले से और ज्यादा टाइट करने के भी कई वादे किए जाते हैं. पब्लिक सोचती रह जाती है कि आखिर सिक्योरिटी के बेहतर अरेंजमेंट्स कहां किए गए हैं.

’Rush hour ‘
ब्लास्ट के बाद मौके पर इंटेलीजेंस एजेंसीज और पुलिस भले ही देर में पहुंचे, लेकिन हमारे नेता वहां पहुंचने में देर नहीं लगाते हैं. वहां पहुंचकर कुछ रटे-रटाए स्टेटमेंट्स दोहराना उनके रूटीन में शामिल हो गया है. लोंगों को भी समझ नहीं आता है कि आखिर ये नेता वहां पर क्यों आए हैं.

‘Security has been beefed’ up
सिक्योरिटी ब्लास्ट के बाद ही क्यों बढ़ाई जाती है, ये भी एक मिलियन डॉलर क्वैश्चन बनकर रह गया है. ब्लास्ट के पहले सिक्योरिटी का ध्यान क्यों नहीं रखा जाता है, कोई नहीं जानता है.

‘Not to be intimidated’
हम इस ब्लास्ट से बिल्कुल भी डरने वाले नहीं हैं. जीं हां ये एक लाइन भी दुश्मनों को साफ इशारा होती है कि भारत की जनता निडर है और वो शायद इस ब्लास्ट के बाद एक और ब्लास्ट भी आसानी से झेल सकती है.

‘Probing all angles’

हर ब्लास्ट के बाद ब्लास्ट के हर एंग्ल पर जांच की बात भी दोहराई जाती है. कोई समझ नहीं पाता कि आखिर ब्लास्ट के वो कौन से अहम एंगल हैं जिसकी तहकीकात की बात हर बार कही जाती है.

‘Clues from footage’

आखिरी में एक और लाइन जिसे 2006 में मुंबई ट्रेन ब्लास्ट से लेकर 13 जुलाई को हुए ब्लास्ट के बाद भी सुना गया कि हम फुटेज के जरिए क्लू हासिल करने की कोशिश करेंगे. तभी अचानक पता लगता है कि वो फुटेज ही कहीं मिसिंग है.

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