दोनों पैरों में सेप्टिक, चलने से लाचार बुजुर्ग को जिला अस्पताल में नही मिली मदद

तड़पते मरीज के लिए अनजान युवक बना फरिश्ता

तीन घंटे तक इलाज के लिए भटकता रहा बुजुर्ग

Meerut. जिला अस्पताल में मंगलवार को बीमार और लाचार बुजुर्ग को इलाज दिलाने पहुंचे अजनबी युवक को अस्पताल सुबह से दोपहर तक भटकाता रहा. खुद से चल पाने में असमर्थ मरीज को समय से न तो व्हील चेयर मिल पाई न ही इमरजेंसी के डॉक्टर्स हाथ लगाने को तैयार हुए. काफी मशक्कत करने के बाद मरीज की मरहम पट्टी कराने के बाद उन्हें आईसोलेशन वार्ड में एडमिट कराया गया. जानकारी मिलने पर देर शाम कुछ एनजीओ के सदस्य बुजुर्ग का हाल जानने के लिए जिला अस्पताल पहुंचे.

बुजुर्ग को मिला सहारा

दरअसल, मंगलवार सुबह आबूलेन निवासी निखिल अग्रवाल को अपने घर के पास से बुजुर्ग सड़क किनारे दर्द से कराहते हुए दिखा. निखिल बुजुर्ग की दयनीय हालत देखकर उसे तुरंत रिक्शा में बैठाकर इलाज के लिए जिला अस्पताल में इलाज के लिए पहुंच गया.

व्हीलचेयर में भी आनाकानी

पैरों से चलने से बेबस बुजुर्ग को जिला अस्पताल लेकर पहुंचे युवक ने बुजुर्ग को वार्ड के अंदर ले जाने के लिए इमरजेंसी वार्ड से व्हीलचेयर मंगाने का प्रयास किया, लेकिन इमरजेंसी मे व्हीलचेयर तक देने से इंकार कर दिया गया. डयूटी पर तैनात कर्मचारियों ने यह कहकर व्हीलचेयर देने से इंकार कर दिया कि यह सुविधा केवल इमरजेंसी केस को मिलती है. निखिल के कई बार समझाने पर भी उसे व्हीलचेयर तक उपलब्ध नही कराई गई. बाद में आर्थो चिकित्सक चौहान ने बुजुर्ग की जांच की, लेकिन इस दौरान मरीज की स्थिति काफी गंभीर होते देख उसे तुरंत इमरजेंसी में रेफर कर दिया.

दर्द से कराहता रहा

जैसे- तैसे करीब तीन घंटे जिला अस्पताल में तड़पने के बाद बुजुर्ग को इमरजेंसी के अंदर व्हीलचेयर से लाया गया, लेकिन इसके बाद भी इमरजेंसी में चिकित्सीय सुविधाओं के नाम पर बुजुर्ग मरीजों को प्राथमिक उपचार तक नही दिया गया. करीब एक घंटे तक बुजुर्ग व्हीलचेयर पर ही दर्द से कराहता रहा, लेकिन बुजुर्ग के शरीर से आती दुर्गध के चलते डॉक्टर्स ने उन्हें देखना भी गंवारा नहीं समझा, अन्य मरीजों का हवाला देकर उसे तुरंत वहां से ले जाने का फरमान सुना दिया साथ ही मरीज को आइसोलेशन वार्ड में रेफर कर दिया.

मिली सिर्फ मरहम-पट्टी

आइसोलेशन वार्ड में स्टाफ ने भी मरीज को इलाज देने में काफी उदासीनता दिखाई और काफी देर बाद मरहम पटटी की. मरीज के हाल चाल पूछने के लिए निखिल ने जब अस्पताल का नंबर मांगा तो स्टाफ ने पूरी बेरूखी से जवाब दिया कि हम खुद ही मरीज के बारे में आपको सूचित कर देगें. हालांकि बाद में डॉ. चौहान ने मरीज की पूरी जांच की और सभी जांचे लिखते हुए स्टाफ को मरीज का ध्यान रखने की ि1हदायत दी.

मदद के िलए आए लोग

मामले की जानकारी मिलते ही हियर द साइलेंस क्लब के सदस्यों ने जिला अस्पताल पहुंच कर बुजुर्ग की मदद के लिए कपड़े खाना व अन्य जरुरी सामान उपलब्ध कराया. इसके मरीज के साथ ही आईसोलेशन वार्ड में भर्ती तीन अन्य लावारिस मरीजों को भी कपड़े व अन्य जरुरी सामान वितरित किए गए.

मामले की जानकारी मिलते ही बुजुर्ग को तुरंत इलाज उपलब्ध कराया गया. आगे भी उन्हें समुचित इलाज उपलब्ध कराया जाएगा. अगर कहीं लापरवाही बरती गई है तो उसकी जांच कराई जाएगी.

डॉ. पी. के बंसल एसआईसी, जिला अस्पताल

बच्चे की मौत पर हंगामा

जिला अस्पताल में मंगलवार को बच्चा वार्ड में एडमिट बच्चे की मौत पर परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा काटा. हालांकि अस्पताल प्रशासन ने किसी तरह मामला को सुलझाया और समझा-बुझाकर परिजनों को वापस भेजा

26 अगस्त को एडमिट

डायरिया से पीडि़त बच्चे को 26 अगस्त तो जिला अस्पताल के बच्चा वार्ड में एडमिट करवाया गया था. बच्चे की हालात काफी गंभीर थी, जिसके बाद तुरंत ही बच्चे को ट्रीटमेंट दे दिया गया. परंतु मंगलवार सुबह बच्चे की हालात अचानक बिगड़ गई और बच्चे ने दम तोड़ दिया. जिसके बाद उसके परिजनों ने हंगामा शुरु कर दिया. इस बारे में डॉ. पीके जैन ने बताया कि परिवार जन बच्चे को दूध पिला रहे थे. दूध बच्चे के गले में फंस गया सांस रुकने की वजह से उसकी मौत हुई. परिजनों को इस बारे में समझा दिया गया है.