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- कॉलोनी में लगा है गंदगी का अंबार, लोग हो रहे हैं बीमार

- दूषित पानी पीने को मजबूर हैं मेडिकल कर्मचारी

GORAKHPUR: बीआरडी मेडिकल कॉलेज के जिम्मे बीमारों का इलाज कर उन्हें स्वस्थ करने की जिम्मेदारी है लेकिन खुद इसकी अपनी कॉलोनी में बीमार होने के पूरे इंतजाम हैं. कॉलोनी के आवासों की सालों से मरम्मत नहीं हुई तो हर तरफ गंदगी का अंबार है. कर्मचारी और उनके परिवार गंदगी के बीच तो रहते ही हैं, दूषित पानी पीने को भी मजबूर हैं. पानी की एक ही टंकी के हवाले हजारों परिवार गुजारा कर रहे हैं. इसके अलावे जर्जर आवास, टूटी रोड भी परेशानी का सबब हैं.

कॉलोनी है बदहाल

बीआरडी मेडिकल कॉलेज कैंपस में करीब एक हजार कर्मचारियों के आवास हैं. हजारों लोग रहते हैं लेकिन कॉलोनी पूरी तरह बदहाल है. सालों से इसकी मरम्मत नहीं हुई. तीन मंजिलें सरकारी आवास के मकानों में सीलन और लिकेज के चलते कर्मचारियों और उनके परिवारों का रहना दूभर हो रहा है. कई आवास में छत व दीवारों के प्लास्टर टूटकर नीचे गिर चुके हैं. सरकारी आवास की गलियां कूड़े के ढेर से पटी हुई हैं. गलियों में कूड़ा है तो नाली भी जाम है. इससे संक्रमण का खतरा बढ़ रहा है और कई लोग बीमार हो चुके हैं.

पीने का पानी प्रदूषित

बीआरडी मेडिकल कॉलेज सरकारी आवास में पीने के पानी की सप्लाई के लिए कैंपस में मात्र एक पानी की टंकी है. हालत यह है कि कॉलोनी के आवासों में दूसरी और तीसरी मंजिल तक पानी नहीं पहुंचता है. मजबूरी में कॉलोनी के लोग मोटर लगाकर पानी खींचते हैं. उसके बाद भी दूषित पानी ही मिलता है.

शिकायत के बाद भी नहीं सुनवाई

मेडिकल कॉलेज की सरकारी कॉलोनी की मरम्मत के लिए मेंटीनेंस डिपार्टमेंट है लेकिन, डिपार्टमेंट में सालों से जेई का पद रिक्त है. कार्यवाहक जेई हैं. कर्मचारी शिकायत करते हैं, लेकिन उनकी समस्या का निदान नहीं होता है. कर्मचारियों को मेडिकल कॉलेज के बड़े अफसरों का निर्देश है कि वह अपनी प्रॉब्लम को सार्वजनिक न करें. इसके चलते कर्मचारी कुछ बोलने से डरते हैं.

कॉलिंग

आवास की मरम्मत व सफाई के लिए कई बार संबंधित अधिकारी को पत्र दिया गया लेकिन आज तक न मरम्मत कराई गई और न ही सफाई. इसके चलते संक्रामक रोग का खतरा बना रहता है.

- ऊषा, हाउस वाइफ

कॉलोनी में 20 साल से अधिक समय से हैं. आवास पूरी तरह से बदहाल हैं. नाले चोक ले चुके हैं फिर भी जिम्मेदार अफसर सो रहे हैं.

- राजू, कर्मचारी

कॉलोनी में सबसे अधिक समस्या पानी की है. कर्मचारी व परिवार दूषित पानी पीने को मजबूर है. आवासों की स्थिति भगवान भरोसे हैं कि कब वह गिर जाए.

- अली अहमद

कॉलोनी में बरसात के पानी की निकासी के लिए नाला बना लेकिन वह कुछ ही दिन में टूट गया. कई आवास के दरवाजे टूटकर अलग हो गए है. लेकिन शिकायत के बाद भी कोई सुनवाई नहीं हुई.

- गुड्डू

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वर्जन

एक-एक कर सभी कमियां दूर की जा रही हैं. मेंटीनेंस डिपार्टमेंट को प्रस्ताव बनाने को कहा गया है. वहीं कॉलोनी और नालों की सफाई कराने के निर्देश दिए गए हैं.

डॉ. पीके सिंह,

प्रिंसिपल, बीआरडी मेडिकल कॉलेज