कानपुर। जब से स्मार्टफोन हमारी जिंदगी में आया है, तरह-तरह के एप्लिकेशंस का इस्तेमाल करना हमारी आदत या यूं कहिए कि मजबूरी बन गई है। पेमेंट करना हो तो एक ऐप, मैसेज भेजना हो तो दूसरी ऐप, सोशल मीडिया से कनेक्‍ट होना है तो कई-कई ऐप्‍स। क्या कभी आपके मन में आया है कि एप्स कब तक हमारे साथ रहेंगे और इनके बाद क्या होने वाला है? आखिरकार टेक्नोलॉजी की रफ्तार बहुत तेज है और वह किसी एक चीज पर लंबे समय तक टिकती नहीं, बल्कि आगे बढ़ जाती है। एप्स की अगली पीढ़ी आखिरकार कैसी होगी? इस सवाल का जवाब हैं- सुपर एप्स।

अपने फोन में 50-100 ऐप्‍स रखने की जरूरत होगी खत्‍म,ये सुपर ऐप्‍स करेंगी आपकी जिंदगी आसान

क्या होती है सुपर ऐप?
सुपर एप्स का मतलब ऐसे एप्स से हैं, जो कोई एक काम नहीं करता, बल्कि सब कुछ करता है। सुपर एप्स ऐसा एप्लिकेशन है, जो रोजमर्रा के एप्स की तुलना में न केवल बहुत व्यापक और बड़ा है, बल्कि ज्यादा तेजतर्रार, ज्यादा फास्ट, ज्यादा स्मार्ट और ज्यादा पावरफुल भी है। आश्चर्य की बात है कि यह अवधारणा हमारे पड़ोस से यानी कि चीन से लोकप्रिय हुई है। इन दिनों दुनिया में एक सुपर एप्स के चर्चे हैं, जिसका नाम है- वीचैट। यह एक चीनी सुपर एप है, जिसका नाम सुनने में तो ऐसा लगता है, जैसे- यह व्‍हाट्सऐप जैसा मैसेजिंग एप होगा, लेकिन हकीकत में यह सिर्फ मैसेजिंग तक सीमित नहीं है। सुपर एप वीचैट मैसेजिंग के अलावा इतना कुछ करता है कि इसके चीनी यूजर्स दिन में कम से कम दस बार इस पर लौटते हैं। सुबह से शाम तक वे इस चैट पर जमे रहते हैं और लोकप्रियता का आलम यह है कि 80 करोड़ चीनी लोग इसे इस्तेमाल करते हैं। जी हां, 80 करोड़! वीचैट को 2011 में चीनी इंटरनेट कंपनी टेन्सेन्ट ने लॉन्च किया था।

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हर चीज मिलती है इस ऐप पर
वीचैट में आम यूजर की जरूरत की हर चीज है। आज हमें जिन कामों के लिए दर्जनों एप्स का इस्तेमाल करना पड़ता है वे सभी सुविधाएं अकेले इस एप में मौजूद हैं, जैसे- व्‍हाट्सऐप की तरह इंस्टैंट मैसेजिंग, फेसबुक की तरह लाइफ की घटनाओं और इवेंट्स को दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ साझा करने की सुविधा, रेस्टोरेंटों से खाना ऑर्डर करने का फीचर, टैक्सी बुक करने की व्यवस्था, गूगल मैप्स की तरह सड़कों के नेविगेशन की सुविधा, साथ भोजन किया हो तो मिल-बांटकर भुगतान करने की सुविधा, सिनेमा के टिकट बुक करने की सुविधा और ई-कॉमर्स के जरिए चीजें खरीदने की सुविधा। चाहें, तो इसी के जरिए पेटीएम की तरह भुगतान कर सकते हैं और चाहें तो फ्लिपबोर्ड या डेली हंट की तरह ताजातरीन खबरें और आर्टिकल भी पढ़ लीजिए। वीचैट के यूजर को कोई दूसरा एप इस्तेमाल करने की जरूरत शायद ही पड़ती हो। पहले पश्चिमी देशों में इस एप को बहुत हल्के में लिया गया, लेकिन अब उन्होंने भी इसका लोहा मान लिया है, क्योंकि यह सुविधाजनक होने के साथ-साथ बहुत ज्यादा प्रोफिटेबल भी है। क्या आप मानेंगे कि इस एप की सालाना आमदनी 2018 में 1.2 अरब डॉलर है यानी 80 हजार करोड़ रुपये से भी ज्यादा। इसकी वैल्यू करीब 80 अरब डॉलर आंकी गई है यानी कि 58 लाख करोड़ रुपये। तो यह है नए जमाने का एप यानी कि सुपर एप। क्या आपको नहीं लगता कि अब हमें भी ऐसे एप्स की जरूरत सचमुच है? वैसे बता दें कि अब व्‍हाट्सऐप और फेसबुक मैसेंजर भी सुपर ऐप बनने में लगे हुए हैं। हो सकता है कुछ सालों के भीतर कई सुपर ऐप्‍स हमारा काम आसान बनाने के लिए भारत में भी उपलब्‍ध हो जाएं।

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