-अप्रैल 2020 तक प्रोजेक्ट पूरा करने का लक्ष्य

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क्कन्ञ्जहृन्: पटना शहर में प्रस्तावित डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम साइंस सिटी निर्माण के लिए विश्व की तीन बड़ी एजेंसियों ने संयुक्तरूप से मिलकर योजना का पूरा प्रारूप तैयार किया है. अब इस प्रारूप पर निर्माण की प्रक्रिया शुरू होगी. विज्ञान एवं प्रावैधिकी विभाग ने निर्माण एजेंसी का चयन करने के लिए योजना प्रारूप भवन निर्माण विभाग को भेज दिया है. संभावना जताई गई है कि अक्टूबर तक एजेंसी का चयन कर साइंस सिटी के निर्माण का कार्य शुरू हो जाएगा.

यूके और कनाडा की भागीदारी

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सपनों की साइंस सिटी की डिजाइन बेंगलुरु की कंपनी 'फ्लाइंग एलिफेंट स्टूडियो' ने तय की है. कनाड़ा (मॉनट्रियल) की कंपनी 'जीएसएम प्रोजेक्ट' ने साइंस सिटी की थीम का निर्धारण किया है. जबकि यूके की कंपनी 'ब्लीड' इस पूरी योजना की कंसलटेंट थी.

चार सौ करोड़ रुपए होंगे खर्च

राजेंद्र नगर के निकट मोइनुलक स्टेडियम के पीछे और बाजार समिति के पास साइंस सिटी के लिए चिन्हित जमीन की घेराबंदी की प्रक्रिया अंतिम चरण में है. इस परियोजना की लागत तकरीबन चार सौ करोड़ रुपये है. विभाग के आधिकारिक सूत्रों की माने तो साइंस सिटी के भवन निर्माण का काम 2020 अप्रैल तक पूरा कर लिया जाएगा.

साइंस सिटी में बहुत कुछ

साइंस सिटी में विद्यार्थियों के लिए बहुत कुछ होगा. यहां आर्यभट्ट की खोज से जुड़े सेक्शन होंगे तो विज्ञान में अब तक किस प्रकार के चमत्कार हुए हैं यह जानकारी भी. पृथ्वी की गतिमान प्रक्रिया, पृथ्वी के स्थल, समुद्र और वायु मंडल की तस्वीरें और दूसरे ग्रह कैसे हैं ऐसी जानकारियां डिजिटल उपकरणों की मदद से यहां डिस्प्ले की जाएंगी. यहां विद्यार्थी डाटा के प्रयोग की जानकारी भी ले सकेंगे. यह तमाम जानकारियां बच्चों के साथ ही बड़ों के आकर्षण का केंद्र बनेगी.

दो सौ बच्चों की आवासीय सुविधा

साइंस सिटी में दो सौ बच्चों के लिए आवासीय सुविधा रहेगी. राज्य के दूसरे हिस्से या दूसरे प्रदेश से आकर विद्यार्थी यहां कुछ समय रहकर भी चीजों को जान-समझ सकेंगे. ज्ञान देने के लिए यहां तमाम आधुनिक संसाधनों का प्रयोग होगा. 20.48 एकड़ जमीन पर बनने वाली साइंस सिटी राज्य सरकार का ड्रीम प्रोजेक्ट है.

साइंस सिटी में अत्याधुनिक डिजिटल टेक्नोलॉजी का प्रयोग होगा. प्रोजेक्ट को लेकर सरकार लगातार सक्रिय है. हम अक्टूबर महीने से इस प्रोजेक्ट पर काम शुरू करेंगे और 15 से 18 महीने में इसे पूरा करने का हमारा लक्ष्य है. योजना पर तकरीबन चार सौ करोड़ रुपये खर्च होंगे.

-अतुल सिन्हा, निदेशक विज्ञान एवं प्रावैधिकी