RANCHI: समाज कल्याण विभाग में हो रही अनियमितताओं का खुलासा न हो जाए. अधिकारियों की चोरी पकड़ी न जाए. इसके लिए अधिकारियों ने एक षडयंत्र के तहत बेस्ट परफॉर्मर कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ शिवानी शर्मा को नौकरी से निकाल दिया. शिवानी ने यह भी बताया कि वह ऑफिस में काम करने जा रही थी, लेकिन उन्हें बाहर ही रोक दिया गया. चिट्ठी थमाई गई कि आपको कार्यक्रम पदाधिकारी के पद से मुक्त किया जा रहा है. शिवानी शर्मा उस वक्त राज्य सेंटर एडॉप्शन रिसोर्स एजेंसी की हेड और मैनेजर भी थीं. उनके मुताबिक, सरकारी काम में बाधा पहुंचाने को लेकर उन्हें न कोई शो-कॉज किया गया और न ही उनके आवेदन पर विचार किया गया.

कई प्रशस्ति पत्र व अवार्ड मिले थे

शिवानी शर्मा ने महिला बाल विकास व सामाजिक सुरक्षा विभाग में बतौर चार साल काम किया. इस दौरान उन्होंने पूरी निष्ठा बरती. लेकिन, 12 जून 2016 को उन्हें कार्यक्रम पदाधिकारी से हटाकर झारखंड राज्य बाल संरक्षण संस्था के पद से मुक्त कर दिया गया. साथ ही अधिकारी को कार्यालय से संबंधित संचिकाएं, लॉकर की चाबी एवं अन्य दस्तावेज दूसरे कार्यक्रम पदाधिकारी को सौंपने का निर्देश दिया गया. शिवानी शर्मा ने बतौर इंटरव्यू देकर नौकरी हासिल की थी. उनका इंटरव्यू आईएएस मृदुला सिन्हा ने लिया था और उन्हें सेलेक्ट किया था. शिवानी शर्मा को काम करते हुए उन्हें कई प्रशस्ति पत्र और अवार्ड भी मिले हैं.

प्रधान सचिव को लिखा था पत्र, सुनवाई नहीं

डॉ शिवानी सिंह ने पदमुक्त करने के बाद इस संबंध में विभाग के प्रधान सचिव एमएस भाटिया को पत्र लिखा था. पत्र के आलोक में जब कार्रवाई नहीं हुई तो उन्होनें इस मामले को मुख्यमंत्री जनसंवाद में भी उठाया है. डॉ शिवानी का आरोप है कि विभाग के निदेशक राजेश सिंह द्वारा उन्हें पत्र जारी कर हटाया गया है. जबकि, उन्हें कोई संतोषप्रद जानकारी नहीं दी गई है.

क्या कहते हैं निदेशक

महिला बाल विकास व सामाजिक सुरक्षा विभाग के निदेशक राजेश सिंह ने कहा कि डॉ शिवानी शर्मा पर प्रधान सचिव एमएस भाटिया ने कार्रवाई की है. इसमें उनकी कोई भूमिका नही है.