-ईवे बिल जेनरेट करने से बचने को 50 हजार से कम के बिल काट रहे व्यापारी

-मोटर व्हीकल की बजाय हाथगाड़ी, रिक्शा और तांगे से भेज रहे हैं माल

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KANPUR: जीएसटी लागू हुए एक साल हो चुका है, लेकिन जिस मंशा के लिए यह सिस्टम लागू हुआ है, उसका व्यापारियों ने तोड़ भी निकाल लिया है. जीएसटी काउंसिल ने 50 हजार से ज्यादा कीमत के माल के ट्रांसपोर्टेशन के लिए ई वे बिल जेनरेट करने की व्यवस्था बनाई है. जिससे व्यापारी ने कितना माल किसको बेचा इसकी जानकारी रखी जा सके. इसके लिए एक मिनिमम लिमिट 50 हजार रुपए तक की गई है. इससे ज्यादा कीमत के माल के लिए ई वे बिल जेनरेट करना पड़ता है, लेकिन व्यापारियों ने इसका तोड़ निकालते हुए बड़े माल की बिलिंग पार्ट में करना शुरू कर दिया है. यह काम शहर के अंदर माल की सप्लाई में किया जा रहा है. इस माल के ट्रांसपोर्टेशन के लिए मोटर व्हीकल की बजाय रिक्शा, तांगा, ई रिक्शा का प्रयोग हो रहा है.

टुकड़ों में बिल काट टैक्स चोरी

जीएसटी लागू होने के बाद से शहर के थोक बाजारों में कच्चे पर्चे का काम तेजी से बढ़ा है. लेकिन ई वे बिल सिस्टम लागू होने की वजह से कच्चे पर्चे पर माल भेजने में भी कुछ व्यापारियेां को प्रॉब्लम हो रही थी. जो इसका रास्ता उन्होंने बड़े माल का टुकड़ों में बिल काट कर निकाला. जिससे उस माल पर ई वे बिल जेनरेट करने की जरूरत ही खत्म हो गई.

रिक्शे का आया मौसम

ट्रांसपोर्ट नगर से नयागंज, कलक्टरगंज, एक्सप्रेस रोड के व्यापारिक प्रतिष्ठानों में हर रोज करोड़ों का माल रिक्शा, ई रिक्शा, तांगा और भैंसा गाड़ी से आज भी लद कर पहुंचता है. ई वे बिल सिस्टम लागू होने के बाद इनकी संख्या में तेजी से बढ़ोत्तरी भी हुई है. इसके अलावा इंडस्ट्रीयल एरिया में भी यह चलन धड़ल्ले से चल रहा है. जिस पर खुद कामर्शियल टैक्स विभाग की नजर भी नहीं पड़ी है.

पोर्टल का भी बहाना

ई वे बिल से बचने के लिए ठेला, रिक्शा, तांगा का प्रयोग कर रहे व्यापारियों का एक तर्क यह भी है कि कई बार बिल जेनरेट करने में पोर्टल की स्पीड आड़े आती है. कई बार सर्वर धीमा होने की वजह से बिल जेनरेट करने में देरी होती है. ऐसे में बिना ई वे बिल के ही माल भेज देते हैं.