-गायब हो गई वर्दी, लापता हो गया आईकार्ड

-यात्रियों की सुरक्षा के लिए शहर में किया गया था इंतजाम

-बिना वर्दी के नजर आते ड्राइवर, मनमानी से होती परेशानी

द्दह्रक्त्रन्य॥क्कक्त्र:

शहर की सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद करने का दावा कर छह महीने पहले ऑटो ड्राइवरों को वर्दी और आईकार्ड पहनना अनिवार्य किया गया। बकायदा गांधी जयंती के दिन धूमधाम से समारोह का आयोजन हुआ। लेकिन अधिकारियों की यह पहल कागजों में ही सिमट गई है। इन छह महीनों में हालत यह है कि ट्रैफिक पुलिस सौ ड्राइवरों को भी वर्दी और आईकार्ड नहीं पहना पाई है। अधिकारी अभी भी इसकी तैयारी करने का ही दावा कर रहे हैं।

कहा गया था कि आटो ड्राइवर की पहचान सुनिश्चित होने से यात्रियों की सुरक्षा पुख्ता रहेगी। एसपी ट्रैफिक ने बताया कि वर्दी पहनाने की शुरुआत की गई थी। ज्यादातर आटो ड्राइवर को वर्दी दी गई। जल्द अन्य लोगों को नया आईकार्ड और वर्दी दी जाएगी।

भूल गए अभियान, वर्दी नहीं पहनते अधिकांश ड्राइवर

2018 में गांधी जयंती पर आंबेडकर चौराहे पर विधिवत कार्यक्रम में आटो ड्राइवर को नि:शुल्क वर्दी दी गई। एनजीओ और प्रमुख समाज सेवियों की मदद से टेंपो ड्राइवर को वर्दी और आईकार्ड देने के अभियान का खूब स्वागत हुआ। अभियान शुरू होने से यात्रियों के सुरक्षित आवागमन का खाका तैयार हुआ। वर्दी पहने ड्राइवर के सड़क होने पर हर महिला, स्कूल जाने वाली छात्राएं और अकेले यात्री सफर करने से नहीं हिचकेंगे। इसलिए इस अभियान को लोगों का सहयोग भी मिला। लेकिन साल गुजरने के बाद धीरे-धीरे ट्रैफिक पुलिस के जेहन से यह बात उतर गई। शहर में ज्यादातर आटो ड्राइवर बिना वर्दी के नजर आने लगे हैं। गोरखपुर शहर में 15 हजार आटो हैं। इनमें पांच हजार से अधिक तादाद ग्रीन आटो की है।

यह होता पब्लिक का फायदा

शहर विभिन्न रूट पर चलने वाले आटो सफर करने में डर नहीं लगता।

वर्दी और आईकार्ड से ड्राइवर के संबंध में पूरी जानकारी मिल जाती।

ड्राइवर का पूरा रिकार्ड ट्रैफिक पुलिस और थानों पर मौजूद रहता।

किसी तरह की घटना होने पर आसानी से आटो ड्राइवर की तलाश हो जाती।

यात्रियों का सामान छूटने पर उसे वापस लौटाने में मदद मिलती। दौड़भाग से बचते।

ड्राइवर की पहचान होने से रात में अकेली सफर करने वाली महिलाओं को प्राब्लम नहीं होती।

क्या हुआ था, क्यों नहीं परवान चढ़ी योजना

- शहर में आटो ड्राइवर के लिए वर्दी अनिवार्य की गई।

- हर रूट पर चलने वाले टेंपो के नंबर का निर्धारण हुआ।

- टेंपो पर मोबाइल नंबर, ड्राइवर का नाम और रूट दर्ज करना जरूरी हुआ।

- वूमेन हेल्प लाइन नंबर, पुलिस कंट्रोल रूम का नंबर भी लिखने का निर्देश।

- सभी ड्राइवर को वर्दी देने की पहल हुई। चेकिंग अभियान चलाया गया।

- ड्राइवर की मनमानी रोकने के लिए कार्रवाई पर जोर दिया गया। यूनियनबाजी में मामला फंसा।

- गुटबाजी पर अफसरों ने हाथ खींचा, धीरे-धीरे टेंपो यूनियन भी वर्दी को भूलते चले गए।

यहां से होता टेंपो का संचालन

कचहरी बस स्टेशन

सीएस चौराहा

पैडलेगंज, आजाद चौक

टीपीनगर, रुस्तमपुर, कचहरी

शास्त्री चौक, धर्मशाला बाजार, बरगदवां

असुरन चौक, पादरी बाजार, मेडिकल कालेज

सूबा बाजार खोराबार, कुसम्हीं बाजार, जगदीशपुर

आईकार्ड में होगा ब्लड ग्रुप, एक्सीडेंट में मिलेगी मदद

एसपी ट्रैफिक का कहना है कि इस अभियान को बंद नहीं किया गया है। हाल में करीब साढ़े हजार ड्राइवर का ब्लड ग्रुप टेस्ट कराया गया था। ब्लड ग्रुप कलेक्शन होने के बाद आईकार्ड बनने को भेजा गया है। नए आईकार्ड में नाम, पते, मोबाइल नंबर और एड्रेस के अलावा हर ड्राइवर का ब्लड ग्रुप दर्ज रहेगा। इससे किसी एक्सीडेंट या अन्य जरूरत पर ब्लड की प्रॉब्लम नहीं रहेगा। टेंपो ड्राइवर की मदद से कई यूनिट ब्लड जल्द से जल्द कलेक्ट कर लिया जाएगा। साथ ही ड्राइवर को ब्लड की जरूरत पड़ने पर मदद करने में आसानी होगी।

वर्जन

शहर में आटो ड्राइवर को वर्दी पहनाने का अभियान जारी है। करीब चार हजार लोगों का आईकार्ड तैयार कर लिया गया है। एक हजार का लर्निग लाइसेंस भी बनवा दिया गया था। वर्दी सिलवाने के लिए दी गई है। जल्द उसका वितरण कराया जाएगा।

-आदित्य प्रकाश वर्मा, एसपी ट्रैफिक