हाईटैक पुलिसिंग करने के लिए डीजीपी ने उठाए कदम

दरोगा को आटोमेटिक मल्टी मॉडल फिंगर प्रिंट तकनीक की कराई जाएगी ट्रेनिंग

फोरेंसिक और सीसीटीवी फुटेज निकालने की सिखाई जाएगी बारीकियां

Meerut. यूपी पुलिस के दारोगा को तेजतर्रार बनाने की तैयारी प्रदेश सरकार ने कर ली है. उन्हें केस की विवेचना के लिए अब स्पेशल ट्रेनिंग दी जाएगी. यह ट्रेनिंग करीब एक महीने बाद शुरू हो जाएगी. इसके बाद, वे सीबीआई की तर्ज पर केसों की विवेचना करेंगे.

नई तकनीक की ट्रेनिंग

सूत्रों के अनुसार, दारोगा को फोरेंसिक जांच और फिंगर एक्सपर्ट के नमूनों से ही हत्या का खुलासा करने के टिप्स सिखाए जाएंगे. इसके लिए उन्हें आईटी प्रोफेसरों से ऑटोमैटिक मल्टी-मॉडल फिंगर प्रिंट तकनीक की ट्रेनिंग दिलाई जाएगी. इसमें हाथों के अंगुलियों के निशान के अलावा रेटिना की पहचान करके डाटा जुटाया जाता है.

फुटेज खंगालने के गुण

पुलिस अधिकारियों का मानना है कि अधिकतर घटनाओं में सीसीटीवी फुटेज मिल जाती है, लेकिन पुलिस अफसरों को फुटेज निकालनी तक नहीं आती. इसके लिए पुलिस अधिकारी अलग से एक्सपर्ट बुलाते हैं, लेकिन इसमें काफी समय खराब होता है और अपराधी घटना को अंजाम देकर बहुत दूर निकल जाता है.

मोबाइल डाटा टर्मिनल तकनीक

दारोगा को मोबाइल डाटा टर्मिनल तकनीक से लैस किया जाएगा. इस तकनीक में दारोगा मौके पर ही अपराधियों की कॉल डिटेल निकलवा सकता है, जिससे केस को जल्दी खोलने में मदद मिलेगी.