- माध्यमिक शिक्षा अधिनियम की धारा 9 (4) के तहत दी गई थी बोर्ड की मान्यता

- जांच रिपोर्ट में हुआ खुलासा, बोर्ड को भेजी रिपोर्ट

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LUCKNOW : राजधानी में यूपी बोर्ड के करीब 250 स्कूल पर मान्यता समाप्ति की तलवार लटक रही है. इन स्कूलों को सशर्त मान्यता प्रदान की गई थी, लेकिन करीब डेढ़ दशक के बाद भी इन स्कूलों ने मान्यता को शर्तो को पूरा नहीं किया है. कुछ समय पहले आश्वासन समिति की बैठक में इन स्कूलों की रिपोर्ट मांगी गई थी, लेकिन बोर्ड को रिपोर्ट नहीं सौंपी गई थी. इस पर बोर्ड ने डीआईओएस से पूरी रिपोर्ट मांगी थी. इसके बाद डीआईओएस ने कई टीमों से स्कूलों का स्थलीय निरीक्षण कराया. इस दौरान सामने आया कि ज्यादात्तर स्कूलों ने मानक हीं नहीं पूरे किये. डीआईओएस ने स्कूलों की रिपोर्ट बोर्ड को भेज दी है.

1996 में दी गई थी मान्यता

साल 1996-97 में माध्यमिक शिक्षा अधिनियम 1921 की धारा 9 (4) के तहत स्कूल संचालकों को सशर्त मान्यता दी गई थी. साथ ही कहा गया था कि निर्धारित समय में सभी स्कूलों को मान्यता के नियमों की पूर्ति करनी होगी. सशर्त मान्यता देने की प्रक्रिया 2005 तक चली थी. उसके बाद स्कूलों से मानक पूरे कराने के लिए सिर्फ कागजों पर कार्रवाई चलती रही. बोर्ड के आदेश पर जब जांच कराई गई तो सामने आया कि कहीं स्कूल नहीं मिल रहे तो कहीं किराए के भवन में स्कूल चल रहा.

इन स्कूलों में भी टीम को मिले थे अधूरे मानक

डीआईओएस की ओर से भेजी गई जांच रिपोर्ट के मुताबिक डॉ. बीआर अंबेडकर हाईस्कूल में मानक के अनुसार क्लास रूम नहीं मिले. स्कूल की भूमि भी उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन की है. न्यू मॉर्डन पब्लिक इंटर कॉलेज में प्रयोगशाला मानक के अनुसार नहीं मिलीं. यहां खेल का मैदान भी नहीं है. इसके अलावा मॉडल सिटी पब्लिक स्कूल, सरदार पटेल पब्लिक स्कूल, लखनऊ मॉडल कॉलेज बरौली, आजाद हायर सेकेंडरी स्कूल आलमनगर, भार्गव पब्लिक इंटर कॉलेज इंदिरानगर, एएलएम हाईस्कूल सहित दर्जन भर से अधिक स्कूल ऐसे हैं, जिन पर मान्यता पूरे न करने के आरोप हैं.

कोट

बोर्ड ने धारा 9 (4) के तहत मान्यता प्राप्त स्कूलों की जांच रिपोर्ट मांगी गई थी. रिपोर्ट में 250 स्कूलों ने मान्यता की शर्तो को पूरा ही नहीं किया है. इनकी पूरी रिपोर्ट बोर्ड को भेज दी गई है. वहीं से अंतिम निर्णय होगा.

डॉ. मुकेश कुमार सिंह, डीआईओएस