2 अगस्त तक डेब्ट लिमिटेशन बढ़ाने का प्रेशर झेल रहे अमेरिकन प्रेसीडेंट बराक ओबामा आखिरकार सोमवार को प्रमुख सांसदों के बीच फाइनेंशियल लॉस कम करने और डेब्ट पेमेंट में चूक से बचने के लिए सहमति बनाने में सफल रहे. समझौता होने के बाद ओबामा ने कहा, ‘समझौते के पहले भाग के तौर पर अगले दस साल में खर्चों में एक हजार अरब डॉलर की कटौती होगी.’ उन्होंने कहा, ‘कटौती के चलते सालाना घरेलू खर्च पिछले कई सालों में सबसे कम होगा. फिर भी यह ऐसा लेवल होगा, जहां हम एजूकेशन और रिसर्च जैसे इंप्लॉयमेंट क्रिएट वाले कार्यों में इनवेस्टमेंट कर सकेंगे.’

बच गए रे ओबामा!

क्या होता असर?

कैश की कमी से जूझ रहे अमेरिका में अगर डेब्ट लिमिटेशन नहीं बढ़ाई जाती तो अमेरिका सहित पूरी दुनिया पर इसका गहरा असर होता. जानकारों के मुताबिक, अमेरिका में रिसेशन के चलते होम लोन, कार लोन और क्रेडिट कार्ड पर इंट्रेस्ट रेट और महंगा हो जाता. इससे शेयर मार्केट में भारी गिरावट आती और दुनिया की रिजर्व करेंसी माने जाने वाले अमेरिकन डॉलर की कीमतें भी नीचे जातीं.

क्या थी debt crisis?

अमेरिकन गवर्नमेंट की लीगल डेब्ट लिमिट 14.3 ट्रिलियन डॉलर है. मई तक वह पूरी लिमिट इस्तेमाल कर चुका था. यानी अब उसे और उधारी नहीं मिल सकती थी. ऐसे में यह खतरा मंडरा रहा था कि अमेरिका डिफॉल्टर हो जाएगा, इसलिए उस पर डेब्ट लिमिट बढ़ाने का प्रेशर था. यूएस कांस्टीट्यूशन के तहत यह फैसला संसद में दोनों पार्टीज के बीच सहमति के बाद ही लिया जा सकता था.

बच गए रे ओबामा!

अब क्या होगा?

घरेलू खर्चों में कटौती का असर एजूकेशन, हाउसिंग और ट्रांसपोर्टेशन प्रोग्र्राम्स पर पड़ेगा. अमेरिका का डिफेंस सेक्टर भी कमजोर होगा, क्योंकि इसमें 350 बिलियन डॉलर की कटौती का प्रावधान किया गया है. टैक्स में बढ़ोतरी न होने और खर्चों में कटौती से अमेरिका के रेवेन्यू पर प्रेशर बढ़ेगा. ऐसे में शुरुआती दौर में डेब्ट क्राइसिस का असर अमेरिकन इकॉनमी पर देखा जा सकता है.

क्या उठाए गए कदम


- डेब्ट लिमिटेशन में बढ़ोतरी
- अगले दस साल में खर्चों में एक हजार अरब डालर की कटौती
- सालाना घरेलू खर्च पिछले कई सालों में सबसे कम
- इस साल खर्चों में 2,000 अरब डॉलर से लेकर 3,000 अरब डॉलर के बीच कटौती

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