गाय सामने आते ही अनियंत्रित हुई बस

डिवायडर के बाद पोल से टकराते ही पलटी बस

आगरा. देहात में किसानों की चिंता बने आवारा पशु अब शहर में हादसों का सबब भी बनने लगे हैं. रविवार को शाहगंज स्थित शंकरगढ़ की पुलिया पर गाय सामने आने पर एक बस अनियंत्रित होकर पलट गई. हादसे में दादी और उसकी नातिनी की मौत हो गई जबकि अन्य लोग घायल हो गए. घटना के बाद बस चालक भाग निकला. घायलों को एसएन में भर्ती कराया गया है.

किरावली से भोगीपुरा तक जाती है बस

शनिवार को एक बस भोगीपुरा से चलकर किरावली के लिए जा रही थी. बस में करीब 23 से 30 सवारी थीं. 11 बजे करीब बस शंकरगढ़ की पुलिया की तरफ आई. उस दौरान बस तेज गति में थी. तभी अचानक एक गाय बस के सामने आ गई

बस पलटने से हुई मौत

गाय देख कर चालक ने बस दूसरी तरफ काटने की कोशिश की पर उससे बस अनियंत्रित हो गई. बस डिवायडर से टकरा कर पलट गई और पोल से जा टकराई. सवारियों को इतना तेज झटका लगा कि आगे बैठे लोग बस के सामने का शीश तोड़ने हुए बाहर निकल गए. इस दौरान एक महिला और छोटी बच्ची की मौत हो गई.

बाजार जा रही थीं दादी-नातिन

हादसे में मृत महिला का नाम लड़ामदा, जगदीशपुरा निवासी 45 वर्षीय ऊषा देवी पत्‍‌नी महेश चंद तथा बच्ची का नाम ऊषा देवी की नातिन 12 वर्षीय प्रिया बताया गया. ऊषा देवी अपनी पुत्रवधु ओमवती पत्नी हरेन्द्र व नातिन प्रिया के साथ रामनगर की पुलिया पर बाजार से सामान खरीदने के लिए जा रही थीं. हादसे में ओमवती सहित कई अन्य लोग भी घायल हो गए.

पुलिस करती रही इंतजार

दुर्घटना की सूचना पर भाजपा के केके भारद्वाज साथियों के साथ मौके पर पहुंच गए. केके भारद्वाज के मुताबिक उस दौरान लोग घायलावस्था में सड़क पर तड़प रहे थे और पुलिस एम्बूलेंस का इंतजार कर रही थी. उस दौरान लोगों ने ई-रिक्शा व ऑटो को रोक कर घायलों को बिठाया और एसएन इमरजेंसी भेजा. दुर्घटना के बाद चालक भाग निकला.

दुर्घटना में कई हुए घायल

इस भीषण दुर्घटना ने लोगों की चीखें निकाल दी थीं. आसपास के लोगों ने किसी तरह बस में फंसे लोगों को बाहर निकाला था. दुर्घटना में 60 वर्षीय परमा नंद व उनकी पत्‍‌नी वीरमति व ऊषा देवी की पुत्रवधू ओमवती घायल हो गई. अन्य चोटिल खुद ही इलाज कराने चले गए. हादसे के दौरान काफी देर तक यातायात प्रभावित रहा था.

आवारा पशुओं पर नहीं किसी की नजर

शहर की सड़कों पर आवारा पशुओं का कब्जा है. इनके चलते लोगों को खासी दिक्कत होती है. कई बार हादसे होते-होते बचते हैं लेकिन प्रशासन इन पर ध्यान नहीं दे रहा है. कई लोग अपने जानवरों को दिन में छोड़ देते हैं, जो रोड पर निकल आते हैं. सिटी में ऐसी कोई सड़क नहीं बची है, जहां पर आवारा जानवर न होते हों. हाईवे पर भी आवारा जानवरों का कब्जा है.