- ईवीएम मशीन में गड़बड़ी बताकर करा रहे हैं मिस कॉल

- व्हाट्सएप के साथ ही फेसबुक पर वायरल हुआ मैसेज

GORAKHPUR: विधानसभा इलेक्शन 2017 संपन्न होने के बाद जिस तरह से बसपा सुप्रीमो ने ईवीएम में गड़बड़ी की बात कही, उससे कुछ राजनीतिक दलों को फिर से राजनीति करने का मौका मिल गया है. बीजेपी की एकतरफा जीत को ईवीएम की गड़बड़ी से जोड़ते हुए अब लोगों ने सोशल मीडिया पर बवाल शुरू कर दिया है. वहीं दूसरी ओर सपा और कांग्रेस की ओर से एक नंबर जारी कर पीआईएल दाखिल करने के लिए सपोर्ट भी मांगा जा रहा है. कुछ राजनैतिक दल तो इसको लेकर सड़क तक पहुंच आए हैं.

एसएमएस के जरिए मांग रहे सपोर्ट

विधानसभा चुनाव का रिजल्ट आने के बाद ईवीएम पर सवाल उठने शुरू हो गए थे. पहले बसपा सुप्रीमो और इसके बाद एक-एक कर अलग-अलग लीडर्स ईवीएम में गड़बड़ी की बात को लेकर बयान दे रहे हैं. वहीं इन दिनों सोशल मीडिया पर भी एक मैसेज वायरल हो चला है कि 'सुप्रीम कोर्ट में यूपी इलेक्शन में ईवीएम धांधली होने और दोबारा चुनाव कराने के लिए रिट दाखिल हुई है. इस पर कोर्ट ने लोगों का सपोर्ट मांगा है. इसमें उन्होंने एक नंबर दिया है, जिस पर लोगों को मिस कॉल करनी है.

फेसबुक और व्हाट्सएप पर भरमार

ईवीएम से जुड़े कई तरह के मैसेजेज की सोशल मीडिया पर भरमार हो चली है. लोग जहां पुराने केसेज का हवाला दे रहे हैं, तो वहीं ईवीएम में गड़बड़ी से जुड़ी पुरानी न्यूज शेयर कर रहे हैं. इतना ही नहीं फेसबुक और व्हाट्सएप पर लोग नेशनल और इंटरनेशनल लेवल पर ईवीएम के यूज न करने की खबर को शेयर कर रहे हैं, वहीं मायावती के साथ ही अखिलेश यादव, लालू प्रसाद यादव के साथ ही कई दिग्गजों के हवाले से भी यह बात शेयर की जा रही है. यहां तक कि सुब्रमण्यम स्वामी के बयान का भी हवाला दिया गया है, जिसमें ईवीएम की माइक्रोचिप जापान में बनने की बात कही गई है, जबकि खुद जापान भी इसका इस्तेमाल नहीं करता है.

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नकार रहे हैं एक्सप‌र्ट्स

इस मामले में जब इलेक्शन की ट्रेनिंग देने वाले एक्सप‌र्ट्स से बातचीत की गई, तो उन्होंने गड़बड़ी को सिरे से नकार दिया. एक्सप‌र्ट्स की मानें तो ईवीएम में ऑनलाइन की कोई व्यवस्था नहीं होती, ऐसी कंडीशन में उसे हैक करने का सवाल ही पैदा नहीं होता. सबसे बड़ी बात वोटिंग के दिन सुबह पोलिंग शुरू होने से पहले मॉक पोल कराया जाता है, इसमें मतदान केंद्र प्रभारी या पोलिंग एजेंट के सामने मतदान शुरु करने से पहले मॉक पोलिंग की जाती है. इसमें सभी पोलिंग एजेंट खुद वोट डालते हैं, इससे यह पता चल जाता है कि सभी कैंडिडेट्स को वोट मिल रहा है या नहीं. ऐसे में यदि किसी मशीन में टेंपरिंग या तकनीकी गड़बड़ी होगी, तो मतदान शुरु होने से पहले ही पकड़ में आ जाएगी. इतना ही नहीं मॉक पोल के बाद सभी कैंडिडेट्स के पोलिंग एजेंट्स पोलिंग पार्टी के प्रभारी को सही मॉक पोल का सर्टिफिकेट देते हैं, जिससे किसी तरह की गड़बड़ी की कोई गुंजाइश ही नहीं है.