- खेल गतिविधियों के लिए लीज पर यूपी सरकार से मिली थी जमीन

- खुलेआम आयोजित किए जाते थे आलीशान शादी समारोह

- जिनके ऊपर थी यह सब रोकने की जिम्मेदारी वह रहे मौन

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LUCKNOW : देश की नामी गिरामी खेल अकादमियों में शुमार बीबीडी यूपी बैडमिंटन अकादमी खेल का मैदान कम शादी घर ज्यादा बन चुकी थी. आरोप है कि यहां सहालग के सीजन में खिलाडि़यों की प्रैक्टिस पर फुल स्टॉप लग जाता था. प्रबंधन का सारा फोकस शादियों के लिए लॉन बुकिंग पर रहता था. आरोप है कि खेल गतिविधियों के लिए यूपी सरकार से लीज पर मिली जमीन का इस्तेमाल कॉमर्शियल गतिविधियों के लिए किया जा रहा था. जिसके जरिये अकादमी के कर्ताधर्ता डॉ. विजय सिन्हा और उनके बेटे निशांत सिन्हा ने आठ साल में करोड़ों रुपए का वारा न्यारा किया. वहीं जिनके ऊपर इसे रोकने की जिम्मेदारी थी वह भी आंखें मूंदे बैठे रहे.

लाखों रुपए का गोलमाल

यूपीबीए में अपना साम्राज्य चला रहे बाप-बेटे टेरर इताना था की कोई भी पदाधिकारी इसका विरोध करने की हिम्मत भी नहीं जुटा पाता था. आये दिन होने वाली शादियों में होने वाले शोर शराबे से तंग आकर आस पास रहने वाले लोगों ने इसकी शिकायत लखनऊ विकास प्राधिकरण से भी की, लेकिन फिर भी इस समस्या का कोई हल नहीं निकला. एलडीए अधिकारियों ने नोटिस भेजी, लेकिन ले-देकर मामला सुलटा लिया गया.

कैंपस में खोल दी फ्लावर शॉप

मामला शादियों से होने वाली कमाई तक सीमित नहीं था. यूपीबीए कैंपस में शम्सी एंड संस की यहां पर फूलों की दुकान खुलवा दी गई. गेट नम्बर एक के पास खुली दुकान से शादी ब्याह में सजावट से लेकर बुके बेचने तक का काम होने लगा. इसके अलावा टेंट का भी काम भी चलता है. इस दुकान से डॉ. विजय सिन्हा और उनके बेटे निशांत सिन्हा मोटी रकम किराए के नाम पर वसूलते थे, लेकिन उस धनराशि की एंट्री भी उत्तर प्रदेश बैडमिंटन अकादमी के फाइनेंसशियल रिकॉर्ड में नहीं होती थी. लगभग शम्स एंड शम्सी की दुकान भी यहां पर पिछले आठ साल रही. लेकिन डॉ. विजय सिन्हा के अलग होते ही उसने भी यहां से खिसकने में ही भलाई समझी.

हॉस्टल के कमरे बनते थे जनवासा

अपने तानाशाह रवैये के चलते बाप-बेटे ने खिलाडि़यों के हॉस्टल्स को जनवासे के रूप तब्दील कर दिया था. शादी बरात के दौरान हॉस्टल वर और वधू पक्ष को एलॉट कर दिए जाते. जिस जगह खिलाड़ी फिजिकल ट्रेनिंग के लिए जाते हैं वहां पर मंडप बनाया जाता और रात में दूल्हा-दुल्हन के फेरे होते. इसी जगह पर खाना भी परोसा जाता.

स्टेटस सिंबल था अकादमी में शादी

बैडमिंटन अकादमी में शादी करना स्टेटस सिम्बल बन गया था. पार्किंग के साथ ही शादी के आयोजन स्थल के लिए इतनी बड़ी जगह गोमती नगर जैसे इलाके में मिलना आसान नहीं था. बुकिंग के नाम पर दो से तीन लाख रुपए वसूले जाते. लेकिन यूपीबीए के फाइनेंसशियल रिकार्ड में इसकी एंट्री नहीं होती. अनुमान है कि हर साल यहां पर शादी के बुकिंग से 50 लाख रुपए से अधिक की रकम का हेरफेर होता था.

शादी के दिन प्रैक्टिस बंद

कई बार यहां ट्रेनिंग करने वाले खिलाडि़यों ने जब यहां होने वाली शादियों को विरोध किया तो उन्हें यहां से बाहर निकालने की धमकी दी जाती. खिलाडि़यों का कहना था कि एक दिन होने वाली शादी के चलते उनका शेड्यूल चौपट हो जाता. पता चला जिस दिन शादी और उस दिन फिजिकल शेड्यूल होने के कारण उनकी प्रैक्टिस थम जाती. ऐसे में उनकी तैयारियों पर असर भी पड़ता. खिलाडि़यों की दिक्कतों को देखकर यहां पर संयुक्त सचिव अनिल ध्यानी ने इसका विरोध किया, लेकिन बाप-बेटे ने उन्हें भी देखने की धमकी दडाली.

यहां पर फैले भ्रष्टाचार के लिए कई मैंने विरोध किया, लेकिन मेरी एक बात नहीं सुनी गई. प्रशिक्षक होने के नाते खिलाडि़यों के सामने आने वाली परेशानियों को समझ सकता था. अपनी जेब भरने के लिए यहां पर शादी की बुकिंग भी शुरू कर दी.

- अनिल ध्यानी, संयुक्त सचिव

ूपीबीए

हमारे यहां वीवीआईपी शादियों की बुकिंग होती थी, लेकिन उसके लिए मैं किसी तरह की धनराशि नहीं लेता था. यह गलत आरोप है. धनराशि लेने-देने का काम कोषाध्यक्ष का होता है. मैंने किसी तरह की कोई रकम शादी या किराए के नाम पर नहीं ली है.

- डॉ. विजय सिन्हा, पूर्व सचिव, यूपीबीए

बैडमिंटन अकादमी में कॉमार्शियल एक्टीविटी के मामलों की मुझे जानकारी नहीं है. लेकिन इस प्रकरण की जांच कराई जाएगी.

- अरुण कुमार, सचिव एलडीए